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	<title>कैलाश सनोलिया &#8211; The Harishchandra &#8211; Hindi</title>
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		<title>मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में एक ऐसी सीट जहां भाजपा में आपस में महाभारत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[कैलाश सनोलिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Oct 2023 13:28:41 +0000</pubDate>
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<p>नागदा। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में स्थित नागदा-खाचरौद विधानसभा क्षेत्र में तीन बार भाजपा टिकट से चुनावी समर में उतरे  पूर्व विधायक दिलीपसिंह शेखावत को अबकि बार टिकट से वंचित कर दिया। हाईकमान ने अब भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य डॉ.तेजबहादुर सिंह चौहान पर भरोसा किया है।  इस निर्णय से  खिलाफत कर भाजपा का एक खेमा विरोध में खड़ा हैं। टिकट बदलने की मांग पर डटा-अड़ा है। इस महाभारत के  दो मुख्य पात्र हैं। एक  खेमे का ध्वज  टिकट से वंचित दिलीपसिंह शेखावत थामे हैं। दूसरा खेमा डॉ.तेजबहादुर के साथ है। टिकट से वंचित व्यथित दिलीपसिंह ने इस निर्णय के बाद दो बार शक्ति प्रदर्शन कर अपनी ताकत को दिखाने का प्रयास किया। यहां तक अपने समर्थकों की हजारों की भीड़ के बीच  बीफार्म मिलने तक इस संघर्ष को जारी रखने का ऐलान कर दिया।  वे उचित प्लेटफार्म पर अपनी बात रखकर अभी भी टिकट पाने की आश लगाए बैंठे हैं।</p>
<p><strong>शह और मात का खेल   </strong></p>
<p>इस सूबे में अभी तक दिलीप सिंह शेखावत भाजपा के हर मामले में अगुवाई करते आए।  संगठन ने उन्हें तीन बार टिकट दिया। एक विजय 2013 में हाथ लगी। दो बार पराजय 2008 एवं 2018 में नसीब हुई। वे  2013 से 2018 तक एक संवैधानिक पद बतौर विधायक काबिज रहे हैं। 2018 का विधानसभा चुनाव पराजय  के बाद पार्टी की गाइड लाइन के मुताबिक वे बतौर एमएलए इस सूबे के सेनापति बने रहें। लेकिन इस सूबे में अब उनकी जगह डॉ. तेजबहादुरसिंह चौहान को प्रोजेक्ट कर देने से निः संदेह शेखावत की सियासत पर ग्रहण के बादल मंडरा गए।</p>
<p>डॉ.चौहान की उम्मीदवारी से यूं कहा जाए कि श्री शेखावत की कश्ती सियासत के सागर के भंवरजाल में लड़खड़ा गई। जैसा राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं श्री चौहान की जीत एवं पराजय  दोनों ही परिस्थतियों में दिलीपसिंह के इस सूबे में एकाधिकार की राजनीति को धक्का लग रहा है। डाक्टर चौहान यदि जीतेे तो वे सिकंदर, या पराजय के साथ  घर लौटे तो सूबे के सिरमोर की कमान उनके हाथ में होगी। भाजपा में परंपरा हैकि हारे उम्मीदवार कों एमएलए के किरदार में तवज्जो मिलती है।  इस समीकरण से  पहला पक्ष डाक्टर चौहान की जीत के आंकलन से समीक्षा की जाए तो जैसा तेजबहादुरसिंह के स्वभाव-मिजाज की तासिर नरेेंद्र मोदी की उस थीम से सामंजस्य करती हैकि-  ना खाउंगा ना खाने दूंगा। यह एक बहुत बड़ा फैक्टर  यहां की सरजमीं पर है। यह बड़ा फेेैक्टर भी इस महाभारत की बुनियाद में सुरंग बनाकर डॉ चौहान के खिलाफ कार्य कर रहा है। डाक्टर चौहान की ईमानदार कार्यशैली सेे  कई चेहरे विचलित हैं, घबराहट सें दिलों की धड़कन तेज है। इसलिए दूसरा पहलू यदि पराजय के साथ डॉ चौहान घर लौटे तो पार्टी गाइड लाइन के मुताबिक वे इस क्षेत्र में आगेवानी करेंगे। जैसा कि वर्तमान में पूर्व विधायक दिलीपसिंह के हाथों में यह जिम्म्मेदारी का ध्वज है। ऐसी स्थिति में दोनो पहलू से दिलीपसिंह की सियासत प्रभावित होगी। राजनीति का यह सर्वमान्य  सिद्धात हैकि जब किसी राजनेता का पावरगैम कमजोर पड़ता है, या  सत्ता से विमुख होकर लड़खड़ता तो उसमें छटपटाहट ,बैचेनी सार्वजनिक रूप से परिलक्षित होती है। यहंा जो समीकरण चल रहा है यह उसी और संकेत कर रहा है। अब शेखावत के सामने यह सवाल यह आरहा हैकि इस पूरे समीकरण से कैसे उभरा जाए। जिसके लिए भीड़तंत्र को बतौर हथियार बनाकर सियासत के सागर के  भंवरजाल में फसी अपनी कश्ती को किनारे लगाने की कवायद चल पड़ी है। बड़ी बात यह हैकि संगठन के निर्णय को चुनोैती देकर टिकट बदलने का मसला है। यह कार्य भाजपा की सनातन संस्कृति &#8211; संस्कार को चिढ़ा रहा है। अनुशासनहीनता की कार्यवाही के पायदानों के पेराकारों को एक आईना भी है।</p>
<p><strong>1985 का इतिहास ताजा     </strong></p>
<p>इस प्रकार के नजारे कांग्रेस संस्कति में तो आम थे, लेकिन अब कथित अनुशासित एवं संस्कार से सराबोर भाजपा संगठन में भी इस प्रकार का संक्रमण फैल रहा है । हालांकि इस दल में इस प्रकार की दूसरी बार  पुनरावृति हो रही है। वर्ष 1985 में तत्कालीन भाजपा जिला अध्यक्ष स्व मांगीलाल शर्मा को लालसिंह राणावत को टिकट देना रास नहीं आया था। श्री शर्मा ने  हाईकमान के निर्णय को चुनौती दे डाली थी। श्री शर्मा चुनाव चिन्ह शेर के साथ  निर्दलीय मैंदान में उतरे थे। उस समय  कार्यकर्ताओं के सामने इसी प्रकार का धर्मसंकट खड़ा हुआ था। शर्मा के समर्थक टिकट बदलने की मांग पर अड़े थे। लेकिन पार्टी टस से मस नही हई। श्री शर्मा का नाम उस युग में लोकप्रिय, जूझारू, मजदूर हितैषी  एक ईमानदार राजनेता की शोहरत में शुमार था। उस समय वे भाजपा के उज्जैन जिला अध्यक्ष पद पर काबिज थे।  उस जमाने के कदावर एवं लोकप्रिय राजनेता  श्री शर्मा महज 9800 मतों के आसपास सिमट गए । हालांकि भाजपा से प्रतिशोध की भावना में वे अवश्य सफल हुए। उस समय भाजपा प्रत्याशी लालसिंह राणावत को हराने में कामयाब हुए थे।  कांग्रेस के रणछोडलाल आंजना 3838 मतो चुनाव जीत गए । इस पराजय से ही तत्कालीन भाजपा का एक खेमा खुश हुआ ।  अब श्री शेखावत बार- बार अपने भाषण में कार्यकर्ताओं को तवज्जो दे रहे और कार्यकर्ताओं को सम्मान देने की बात कर रहे है। उधर,  कार्यकर्ता भी सोशल मीडिया पर जोश-खरोश में अपनी अभिव्यक्ति का इजहार इस प्रकार से कर रहे हैं-अब सघंर्ष नहीं रण होगा। मतलब कार्यकर्ता तो अपने नेता को संकेत चुनाव लड़ने का दे रहें ंहैं। कार्यकर्ताओं की इस भावना को कितना सम्मान होगा यह अभी भविष्य की गर्त में है। इस सूबे में  एक दूसरा उदाहरण इसी प्रकार का हैं। इसी प्रकार  2003 में इस सूबे में कांग्रेस में हुआ था। 1993 में विधायक रहे दिलीपसिंह गुर्जर को 2003 में टिकट नहीं मिला। श्री गुर्जर ने  कांग्रेस पार्टी के निर्णय से खफा होकर निर्दलीय चुनाव चिन्ह इंजिन से किस्मत आजमाई । वे 14,429 मतों से जीत गए। इस चुनाव में कांग्रेस उम्म्मीदवार को जमानत बचाने के लाले पड़ गए ।</p>
<p><strong>प्रत्येक परिस्थति को परखे</strong></p>
<p>वर्तमान में भाजपा में जो बखेड़ा खड़ा हुआ उससेे यह तो स्पष्ट हैकि अब संगठन पर व्यक्तिवाद हावी होने की कोशिश है। व्यक्तिगत सता सुख की महात्वकांक्षा की अंतिम पराकाष्ठा से एक गुट  हाईकमान के निर्णय को चुनौती देने की हिम्मत कर बैठा। यहां तक घोषित उम्मीदवार डॉ चौहान की शक्ति ,शोहरत की कमजोरी सामंतवादी सोच एवं सार्वजनिकता में गुमनामी के आरोप लगा दिए।   भाजपा संगठन इस प्रकार की दलील एवं प्रदर्शन के आगे नतमस्तक होगा या अनुशासन हीनता का डंडा चलाएगा, उसकी तस्वीर अभी धंूधली है। लेकिन फिलहाल तो इस महाभारत के संवेदनशील प्रकरण में भाजपा हाईकमान की खामोशी  ने धृतराष्ट युग की याद ताजा कर दी।  लेकिन यह तो संभव हैकि सियासत के इस मैंदान में तेजबहादुर के हाथ से बल्ला छिनना टेडीखीर होगा।</p>
<p>एक अनुशासित दल में हाईकमान की निर्णय को चुनौती देकर यह क्यों हो रहा है  उस पर विश्लेषण करना  आज सामयिक है। पहला कदम प्रेशर पोलिटिकस संभव है। जिसमें सियासत के सागर के भंवरजाल में डगमगाती कश्ती है। इसलिए टिकट बदलने का प्रदर्शन भीड़ के माध्यम से किया जा रहा है।  लेकिन विश्व का सबसे बड़ा दल कहे जाने वाले पार्टी के निर्णायक मंडल  इस प्रकार के प्रदर्शन को कितना तवज्जो देंगे और टिकट बदले उस पर फिलाहल तो संशय के बादल  है। दूसरी मंशा श्री शेखावत खेमे की यह मानी जा सकती हैकि बेहत्तर शक्ति प्रदर्शन के बाद मान-.मनुहार के बाद सम्मान जनक हल निकालने की तलाश संभव है । ताकि सांप भी ना मरे और लाठी भी ना टूटे। भविष्य में संवैधानिक  कोई पद का  नजराना भी मांगा जाए। लेकिन इस बिंदु में यह बाधा संभव हैकि यदि संयोग से काग्रेेस सरकार बनी तो इस नजराना के मार्ग में कांटे बिछ जाएंगे। दूसरी बात यदि भाजपा सरकार में आई तो शिवराज के हाथों में अब प्रदेश की बागडोर नहीं होगी। श्री शेखावत के आंगन की सियासत को धूप शिवराज की खिड़की से ही मिलने की जैसी चर्चा है। शिव को अब कुर्सी से दूर करने की रणनीति भाजपा हाईकमान ने स्वयं बनाई है। इसलिए यह हल भी संशय में है। फिर जिन 12 लोागों पर टिकट कटवाने  के आरोप लगा जा रहे वे अपने साथ  इस क्षेत्र में उपेक्षा के गहरे  जख्मों को दबाए बैठे हैं। ये भी अच्छे दिन आने पर इनाम मांगेंगे।ये लोग भी अपनी सरकार बनते ही  अपना- अपना  नजराना मंडल- कमंडल की और अपेक्षा रखेंगेें। पार्टी आखिर किस- किस को  खुश कर पाएगी। एक बड़ा  फैक्टर यह हैकि जिस प्रकार से श्री शेखावत खेमे से भीड़तंत्र को जुटाया जा रहा हैं और सोशल मीडिया पर समर्थकों  की मंशा चल रही हैकि- अब संघर्ष नहीं  रण होगा। यदि निर्णय मैंदान में जाने का हुआ तो  त्रिकोणीय मुकाबले के आसार संभव है। इस निर्णय से श्री शेखावत को उनकी तकदीर दो रास्ते की और ले जा सकती है। या तो सियासत की धार परवान चढेगी या अपने हाथों अपने पांव पर कुल्हाड़ी। विकल्प यह भी संभव  हैकि समय के साथ समझौता कर तेजबहादूर के संग जुट जाए।</p>
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		<title>मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[कैलाश सनोलिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 28 Aug 2023 08:33:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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<p>नागदा। मप्र मे नवंबर माह में विधानसभा चुनाव है। जिसको सियासती पारा चढा हुआ है।  मुख्यमंत्री शिवराजसिंह ने मालवा अंचल के उज्जैन जिले में स्थित नागदा को जिला बनाने की घोषणा की है। जिसकी प्रक्रिया भी शुरू हो गई। नागदा विधानसभा सीट पर वर्तमान में कांग्रेस के दिलीपसिंह गुर्जर एमएलए है।  आगामी विधानसभा चुनाव में इस सीट पर  कांग्रेस से  चार बार के विधायक श्री गुर्जर की टिकट लगभग तय है।  भाजपा में टिकट को लेकर स्वयंबर मचा हुआ है। यह भाजपा के दो कदृदावर नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ थावरचंद गेहलोत, जो वर्तमान में कर्नाटक के राज्यपाल है, तथा  मप्र शासन में कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त असंगठित कामगार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष सुल्तानसिंह शेखावत के  गृहनगर की सीट है।</p>
<p>भाजपा ने प्रदेश की  39 सीटों पर प्रत्याशियों के नामों की पहली सूची जारी की है, जिसमें में मालवा अंचल के उज्जैन जिले की दो  तराना एवं घटिया सीट के  उम्मीदवारों के नाम शुमार है। ये दोनों अजा वर्ग की सुरक्षित है। पिछले वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में इन दोनों सीटों पर भाजपा को शिकस्त मिली है। जैसा बताया जा रहा है भाजपा ने कमजोर सीटों पर  पहली सूची में नाम तय किए  हैं। नागदा सीट पर अधिकांश बार  मुकाबला रहा या कांग्रेस का कब्जा रहा है।  बावजूद पहली सूची में  इस सीट पर उम्मीदवार की घोषणा को रोकना प्रत्याशियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा माना जा रहा है। हालांकि इस सीट पर अब भाजपा की कड़ी नजर है।  इस कारण सीएम ने 15 बरसों से झूल रही जिला बनाने की मांग चुनाव के एन वक्त पर पूरी करने की घोषणा की है। नागदा सीट पर पिछली बार भाजपा उम्मीदवार दिलीपसिंह शेखावत की  हार के बाद कई नए चेहरों में टिकट को लेकर उत्सुकता है।</p>
<p>अब यह चेहरा बदला जाएगा या पुनरावृति होगी अभी तस्वीर धुंधली भाजपा ने इस सीट से  दिलीपसिंह शेखावत  पिछले चुनावों में लगातार तीन बार कांग्रेस के दिलीपसिंह गुर्जर के खिलाफ मैंदान में उतारा है। जिसमें से शेखावत को  2 बार पराजय और एक मर्तबा सफलता मिली है।  2018 में भाजपा प्रत्याशी शेखावत  कांग्रेस के श्री गुर्जर से 5117 मतो से हार गए थे। दोनों के बीच पहली बार 2008 में टक्कर हुई जिसमें कांग्रेस के गुर्जर 9500 से भी अधिक मतो पिछली से जीत गए।  दूसरी बार 2013 में भाजपा के दिलीपसिंह शेखावत ने 16,115 मतो से बाजी मारी। गत चुनाव में शेखावत की 5112 वोटो की पराजय  के बाद अबकि बार  कई दावेदारों के नाम इस दलील के साथ  सामने आ रहे हैंकि  तीन में से 2 बार प्रत्याशी शेखावत की हार से चेहरा बदला जा सकता है। हालांकि शेखावत का नाम भी दौड़ में शुमार है। भाजपा से लगभग एक दर्जन प्रत्याशियों के नाम एक अनार सौ बीमार कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं। इस सीट के इतिहास की खासियत हैकि कांग्रेस ने पिछडा वर्ग के उम्म्मीदवार पर दांव खेला है, तो भाजपा ने ठाकुर प्रत्याशियों को ही टिकट से नवाजा है</p>
<p>अबकि बार ये दावेदार- अबकि बार भाजपा में राजपूत  उम्मीदवारों की बात की जाए तो मप्र शेखावत, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के पूर्व अध्यक्ष तथा पूर्व विधायक लालसिह शासन में कैबिनेट मंत्री का दर्जा मप्र शासन असंगठित कामगार कल्याण बोर्ड अध्यक्ष सुल्तानसिंह राणावत, पूर्व विधायक दिलीपसिंह शेखावत, भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य डॉ तेजबहादुरसिंह चौहान एवं मोतीसिंह शेखावत के  नामों की चर्चा है।  मोतीसिंह  बोर्ड अध्यक्ष सुल्तानसिंह के बेटे हैं। गैर ठाकुर प्रत्याशियों में पूर्व नपा अध्यक्ष शोभायादव  पूर्व नपा उपाध्यक्ष राजेश धाकड़, भाजपा जिला महामंत्री धर्मेश जायसवाल , किसान नेता दयाराम धाकड़ एवं विहिप नेता भेरूलाल टांक के नामों की सुगबुगाहट है। उंट किस करवट बैठेगा  कहा नहीं जा सकता। भाजपा यहां देने में फूंक -फूंक कर कदम रख रही है। पिछले चुनाव की टिकट की पुनरावृति होगी या परिवर्तन इसमें अभी संशय है।</p>
<p><strong>8 बार ठाकुरों ने मैंदान संभाला</strong></p>
<p>जातिगत समीकरण देखा जाए तो नागदा ठाकुर पिछडा वर्ग बाहुल्य सीट है। भाजपा के अस्तित्व में आने के बाद 1985 से लगातार इस सीट से पार्टी ने ठाकुरों को 8 बार मैदान में उतारा है। जिस में से ठाकुर प्रत्याशी 3 बार चुनाव जीते और 5 बार हारे हैं। भाजपा के राजपूत उम्मीदवार 1990, 1998 एवं 2013 में  कामयाब हुए। जबकि 1985, 1993, 2003, 2008 एवं 2018 में पराजय का सामना करना पड़ा। दो बार लालंिसंह राणावत 1990 एवं 1998 में  विधायक बने। जबकि  2013 में दिलीपसिंह शेखावत विधानसभा पहुंचे।</p>
<p>भाजपा के अस्तित्व में आने के पहले की बात की जाए तो इसी दल की विचारधारा के वीरेंद्रसिंह कंचनखेड़ी 1957 में हिंद महासभा से तथा 1967 एवं 1972 में भारतीय जनसंघ की टिकट से विधायक बने। 1967 में संविद सरकार में मंत्री भी बने। इधर, कांग्रेस ने पिछडा वर्ग पर भरोसा किया और अधिकांश बार  गुर्जर समाज के उम्मीदवार पर दाव खेला। वर्ष 1985 के चुनाव में पिछड़ा  वर्ग के रणछोड़लाल आंजना ने भाजपा के ठाकुर प्रत्याशी लालसिंह राणावत को 3828 मतों से पटकनी दी । वर्ष 1990 में भाजपा के राणावत चुने गए। वर्ष 1993 में  दिलीपसिंह गुर्जर पहली बार कांग्रेेस की टिकट पर विधायक बने। वर्ष 1998 में इस सीट को भाजपा ने कांग्रेस से छिन ली और भाजपा के राणावत विधायक चुने गए । इस बार कांग्रेस के बाबूलाल गुर्जर 4731 मतों से पराजित हुए। उधर, कांग्रेस खेमे की बात की जाए तो गुर्जर समाज के दिलीपसिंह गुर्जर चार बार क्रमशः 1993, 2003, 2008 एवं 2018 में विधायक बने । वर्ष 2003 में कांग्रेस से  टिकट कटने पर श्री गुर्जर ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और 14, 429 वोटों से विजयी हुए। उस दौरान कांग्रेस उम्मीदवार की जमानत जप्त हुई और भाजपा को पराजय का सामना करना पड़ा।</p>
<p><strong>जैन एवं ब्राह्मण उम्मीदवार जीते</strong></p>
<p>इस सीट पर भाजपा के अस्तित्व में आने के पहले गैर समाज के उम्मीदवार भी जीते हैं। पहला चुनाव  1952 में स्वाधीनता सैनानी स्व रामचंद्र नवाल ने कांग्रेस की टिकट पर जीता। उस समय महिदपुर का हिस्सा भी शामिल था।   1962 में जैन समाज के स्व भैरव भारतीय ने निर्दलीय बाजी मारी। 1977 में हलधर चिन्ह से जनता पार्टी की टिकट पर तथा 1980 में कमल फूल चिन्ह पर स्व पुरूषोत्म विपट ने जीत दर्ज की । वे बाहाण समाज के थे। उन्हें दो बार जीत नसीब हुई।</p>
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		<title>छतीसगढ राज्य शासन योग आयोग की सदस्य बोली- सकारात्मक सोच से खुशहाल होती है जिंदगी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[कैलाश सनोलिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 17 May 2023 09:25:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[समाज]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="1280" height="622" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230517-WA0007.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="छतीसगढ राज्य शासन योग आयोग की सदस्य बोली- सकारात्मक सोच से खुशहाल होती है जिंदगी" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230517-WA0007.jpg 1280w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230517-WA0007-300x146.jpg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230517-WA0007-1024x498.jpg 1024w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230517-WA0007-768x373.jpg 768w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230517-WA0007-696x338.jpg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230517-WA0007-1068x519.jpg 1068w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230517-WA0007-864x420.jpg 864w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230517-WA0007-313x152.jpg 313w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" title="छतीसगढ राज्य शासन योग आयोग की सदस्य बोली- सकारात्मक सोच से खुशहाल होती है जिंदगी 5">नागदा&#160; सकारात्मक सोच से जीवन में उर्जा का संचार होता है। आत्मविश्वास बढता और&#160; जिंदगी खुशहाली होती है। यह बात छतीसगढ&#160; राज्य शासन योग आयोग की सदस्य एवं&#160; मोटीवेटरी ब्रहाकुमारी मंजूदीदी ने कही। वे यंहां&#160; प्रजापिता ब्रहाकुमारी&#160; नागदा जिला उज्जैन (मप्र) के तत्वावधान&#160; में मंगलवार देर&#160; शाम को पांच दिवसीय योग, आसन एव तनावमुक्तजीवन विषय [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="1280" height="622" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230517-WA0007.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="छतीसगढ राज्य शासन योग आयोग की सदस्य बोली- सकारात्मक सोच से खुशहाल होती है जिंदगी" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230517-WA0007.jpg 1280w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230517-WA0007-300x146.jpg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230517-WA0007-1024x498.jpg 1024w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230517-WA0007-768x373.jpg 768w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230517-WA0007-696x338.jpg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230517-WA0007-1068x519.jpg 1068w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230517-WA0007-864x420.jpg 864w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230517-WA0007-313x152.jpg 313w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" title="छतीसगढ राज्य शासन योग आयोग की सदस्य बोली- सकारात्मक सोच से खुशहाल होती है जिंदगी 6">



<p>नागदा&nbsp; सकारात्मक सोच से जीवन में उर्जा का संचार होता है। आत्मविश्वास बढता और&nbsp; जिंदगी खुशहाली होती है। यह बात छतीसगढ&nbsp; राज्य शासन योग आयोग की सदस्य एवं&nbsp; मोटीवेटरी ब्रहाकुमारी मंजूदीदी ने कही। वे यंहां&nbsp; प्रजापिता ब्रहाकुमारी&nbsp; नागदा जिला उज्जैन (मप्र) के तत्वावधान&nbsp; में मंगलवार देर&nbsp; शाम को पांच दिवसीय योग, आसन एव तनावमुक्तजीवन विषय पर केद्रित शिविर के पहले दिन बोल रही थी। श्रीराम कॉलोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर उमा विधालय सभागृह में आयोजित शिविर में बडी संख्या में महिला और पुरूषों ने&nbsp; भाग लिया। कार्यक्रम में बतौर अतिथि नपा अध्यक्ष श्रीमती संतोष ओपी गेहलोत, जनसेवा चिकित्सालय के डॉ जितेंद्रपाल, लायंस क्लब अध्यक्ष झमक राठी, व्यापारी संघ के अध्यक्ष निलेश चौधरी एंव सरस्वती शिशुमंदिर के प्राचार्य प्रमोद ने शिरकत की।</p>



<p>योग आयोग सदस्य मंजूदीदी ने अपने जीवन के अनुभवों को सांझा करते हुए कहा योग एक ऐसी दवाई है जिसमें रोग को भगाने का सार्मथ्य है।</p>



<p>योग से शरीर में प्रतिरोघक क्षमता बढती है। इस मौके पर उन्होंने</p>



<p>तनाव रहित जीवन जीने की कला के कई नुस्कें भी बताए। आज के परिवेश में बुढे माता-पिता को वृद्धा आश्रम में रखने की बुराई पर प्रहार करते हुए उन्होंने&nbsp; एक सच्ची कहानी के उद्धरण से&nbsp; इस बुराई पर अंकुश लगाने&nbsp; का आव्हान किया।</p>



<p>का्रेध एवं गुस्सा पर नियंत्रण करने के टीप्स भी बताए। एक गीत की प्रस्तुति पर उन्होनें स्वयं किरदार निभाकर&nbsp; संगीत कीस्वर लहरियों पर&nbsp; आंनदित शिविरार्थियों को थिरकने के लिए मजबूर किया।&nbsp; कार्यक्रम में दीप प्रज्ववलन की रस्म के दौरान अतिथियों का स्वागत ब्रहाकुमारी नागदा क्रेंद प्रभारी पूनमदीदी ने किया। अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए।</p>



<p>केद्र प्रभारी&nbsp; पूनम ने अपने उद्रबोघन में शिविर की महत्ता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम को&nbsp; वरिष्ठ पत्रकार कैलाश सनोलिया ने भी संबोधित किया। शिविर में सांसद प्रतिनिधि ओपी गेहलोत , वरिष्ठ अभिभाषक माधुरी रघुवंशी, वरिष्ठ पत्रकार विजय रघुवंशी,कमल जैन सहारा, सारिका शुक्ला, ज्योति शर्मा, महेंद्र जाटवा समेत कई लोगों ने लाभ लिया। कार्यक्रम का संचालन ब्रहाकुमारी मधु (महिदपुर) ने किया।</p>
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		<title>जिला बनाने की मुराद को लेकर 250 किमी की पदयात्रा पर निकल पड़े 10 दीवानें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[कैलाश सनोलिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 30 Apr 2023 14:35:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चर्चा]]></category>
		<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[समाज]]></category>
		<category><![CDATA[आंदोलन]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="1080" height="810" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/IMG-20230430-WA0003.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="जिला बनाने की मुराद को लेकर 250 किमी की पदयात्रा पर निकल पड़े 10 दीवानें" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/IMG-20230430-WA0003.jpg 1080w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/IMG-20230430-WA0003-300x225.jpg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/IMG-20230430-WA0003-1024x768.jpg 1024w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/IMG-20230430-WA0003-768x576.jpg 768w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/IMG-20230430-WA0003-696x522.jpg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/IMG-20230430-WA0003-1068x801.jpg 1068w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/IMG-20230430-WA0003-560x420.jpg 560w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/IMG-20230430-WA0003-80x60.jpg 80w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/IMG-20230430-WA0003-265x198.jpg 265w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/IMG-20230430-WA0003-313x235.jpg 313w" sizes="auto, (max-width: 1080px) 100vw, 1080px" title="जिला बनाने की मुराद को लेकर 250 किमी की पदयात्रा पर निकल पड़े 10 दीवानें 7">नागदा। जन-जन की एक मांग मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में स्थित नागदा को जिला बनाने की मुराद को लेकर इतना जोश एवं जूनून सवार हुआ कि वे राजधानी भोपाल में जनता की बात की दस्तक देने के लिए 250 किमी का सफर पैदल तक तय करने के लिए निकल पड़े। रविवार को सैकड़ों&#160; लोग [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="1080" height="810" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/IMG-20230430-WA0003.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="जिला बनाने की मुराद को लेकर 250 किमी की पदयात्रा पर निकल पड़े 10 दीवानें" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/IMG-20230430-WA0003.jpg 1080w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/IMG-20230430-WA0003-300x225.jpg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/IMG-20230430-WA0003-1024x768.jpg 1024w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/IMG-20230430-WA0003-768x576.jpg 768w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/IMG-20230430-WA0003-696x522.jpg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/IMG-20230430-WA0003-1068x801.jpg 1068w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/IMG-20230430-WA0003-560x420.jpg 560w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/IMG-20230430-WA0003-80x60.jpg 80w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/IMG-20230430-WA0003-265x198.jpg 265w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/IMG-20230430-WA0003-313x235.jpg 313w" sizes="auto, (max-width: 1080px) 100vw, 1080px" title="जिला बनाने की मुराद को लेकर 250 किमी की पदयात्रा पर निकल पड़े 10 दीवानें 8">



<p>नागदा। जन-जन की एक मांग मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में स्थित नागदा को जिला बनाने की मुराद को लेकर इतना जोश एवं जूनून सवार हुआ कि वे राजधानी भोपाल में जनता की बात की दस्तक देने के लिए 250 किमी का सफर पैदल तक तय करने के लिए निकल पड़े। रविवार को सैकड़ों&nbsp; लोग उनकी दीवानगी के साक्षी बने और भोपाल के लिए विदाई दी। बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी भागीदारी की। इस कहानी के मुख्यपात्र एवं नई सोच के किरदार युवा कांग्रेस नेता बसंत मालपानी है। जिनके संग कुल 10 युवाओं की एक टीम सीएम हाउस तक जनता की मुराद के लिए रवाना हुई।&nbsp; ना घूप, ना भूख&nbsp; ना प्यास की परवाह ये लोग पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 13 दिनों के बाद भोपाल पहुंचेंगे .पदयात्रियो की बिदाई के पहले शहर के मुख्य मार्गो से संगीत की स्वर लहरियों के साथ जूलूस निकाला गया। हर जगह पर&nbsp; ने पुष्प बरसा कर&nbsp; दीवानगी का स्वागत किया। सुबह लगभग 11. 30 बजे किरण टाकिज चौराहे से काफिला शुरू हुूआ। जो जवाहर मार्ग कन्याशाला चौराहा, महात्मागांधी मार्ग , गुर्जर मोहल्ला, तिलक मार्ग से गुजरता हुआ बस स्टैड पर पहुंुचा।&nbsp; इंगारिया रोड स्थित ब्रिज से भीड़ ने इन्हे शुभकामनाओं के साथ बिदाई दी।</p>



<p>&nbsp;कांग्रेस विधायक समेत भाजपा के लोग</p>



<p>शहर के मुख्य मार्गो से निकले जलसे में कांग्रेस विधायक दिलीपसिंह गुर्जर ने किरण टाकिज चौराहे पर पहुुचकर मांग का समर्थन किया। वे भी शहर के मुख्य मार्गो से गुजरे। साथ ही पदयात्रियों की हौसला अफजाई की। कई काग्रेस पार्षदांे के अलावा वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व नपा उपाध्यक्ष बंशीलाल मालपानी एवं भाजपा के पदाघिकारी भी शामिल हुए।&nbsp; वरिष्ठ भाजपा नेता पूर्व नपा उपाध्यक्ष राजेश धाकड, पूर्व नपा अध्यक्ष राजेंद्र अवाना, भाजपा पार्षद बबीता रघुवंशी एवं नपा अध्यक्ष प्रतिनिधि ओपी गेहलोत आदि ने भी स्वागत किया। आप पार्टी के उज्जैन जिला ग्रामीण अध्यक्ष सुबोध स्वामी भी साक्षी बने। अभिभाषक संध अध्यक्ष विजय वर्मा,लायंस क्लब एवं प्रेस क्लब के पदाघिकारियों आदि समेत कई संस्थाओं के प्रमुखों एवं व्यापारियों ने भागीदारी की।</p>



<p>संभवत होंगे गिरफतार</p>



<p>अभी यह पुष्ट नही है लेकिन यह संभावना व्यक्त कि जा रही हैकि पदयात्री भोपाल में&nbsp; 11 मई को सीएम हाउस के सामने प्रदर्शन करेंगे। ऐसी स्थिति में इनकी गिरपतारी की संभावना से इंकार नहीं किया जा&nbsp; सकता है। कयास लगाए जा रहे हैकि भोपाल में आयोजित प्रदर्शन में उज्जैन जिले की अन्य विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक भी इस प्रर्दशन में शुमार हो सकते हैं। पदयात्रा में दिलीप फतरोड, चेतन नामदेव, जुम्मन खान, श्रवण सोलकी,अनिल भाट,, शशिकांत सौलंकी, आरिफ खान, आकाश शर्मा, एवं लाखन परमार आदि शामिल हुए हैं।</p>



<p>नवीन नागदा जिले की तस्वीर</p>



<p>कमलनाथ सरकार में नागदा को जिला बनाने का परीक्षण हुआ और 18 मार्च 2020 को मंत्रिमंडल में स्वीकृति मिली। आगेे की प्रक्रिया दावे आपत्यिों एवं अधिसूचना की कार्यवाही पूरी हांेने के पहले ही कांग्रेस की अंर्तकलह से कमलनाथ सरकार गिर गई। उसके बाद से यह अधूरी प्रकिया पेंिड्रग&nbsp; पड़ी है। नागदा को जो नवीन जिला बनाया जाने की प्रोजेक्ट जो कलेक्टर उज्जैन से वल्लभ भवन भोपाल को वर्ष 2019 में जो जानकारियां भेजी गई उसके अनुसार नवीन नागदा जिले में कुल 561 गांव एवं 301 पंचायते शामिल है। नागदा क्षेत्र के 114 गांव, खाचरौद के 110 महिदपुर 114त्र झारड़ा, 113 एवं रतलाम जिले की आलोट तहसील के 11ृ0गांवों का मुख्यालय नागदा होगा। उन्हेल कस्बा के 28 गांव भी इस नवीन जिले में प्र्रस्तावित है। इन कुल 28 गांवों&nbsp; की आबादी 42 हजार 18 आंकी गई है।</p>



<p>आबादी 7 लाख 77 हजार 201</p>



<p>प्रस्तावित नागदा जिले की आबादी जनगणना 2011 के अनुसार 7 लाख, 77 हजार 201 प्रस्तावित है। जिन तहसीलों को नवीन नागदा जिले में शामिल किया जा रहा है उसके अनुसार नागदा क्षेत्र की आबादी 2 लाख 37 हजार, 996, खाचरौद- 1 लाख, 61 हजार 270, महिदपुर- 1 लाख 51 हजार, 736 आलोट- 1 लाख 11 हजार 636 झारड़ा- 1 लाख 7 हजार 563 शामिल होगी।</p>
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		<title>मुख्यमंत्री महोदय, यह कैसी सरकार है जो सालों से जनता की मांग को अनसुना कर रही है?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[कैलाश सनोलिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Mar 2023 11:25:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[चर्चा]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="960" height="639" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230313-WA0002.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="मुख्यमंत्री महोदय, यह कैसी सरकार है जो सालों जनता की मांग को अनसुना कर रही है?" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230313-WA0002.jpg 960w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230313-WA0002-300x200.jpg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230313-WA0002-768x511.jpg 768w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230313-WA0002-696x463.jpg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230313-WA0002-631x420.jpg 631w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230313-WA0002-313x208.jpg 313w" sizes="auto, (max-width: 960px) 100vw, 960px" title="मुख्यमंत्री महोदय, यह कैसी सरकार है जो सालों से जनता की मांग को अनसुना कर रही है? 9">नागदा। कमलनाथ सरकार के मंत्रिमंडल में तीन नवीन जिले नागदा, चाचौड़ा एवं मैहर के सर्जन की स्वीकृति 18 मार्च 2020 को मिली। इस सरकार के गिरने के बाद नागदा को जिला बनाने की प्रक्रिया,  गजट नोटिफिकेशन एवं दावा /आपत्तियों को ग्रहण लगा है। तकरीबन ढाई बरसों से यह मामला पेड़ से गिरा खजूर पर अटका [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="960" height="639" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230313-WA0002.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="मुख्यमंत्री महोदय, यह कैसी सरकार है जो सालों जनता की मांग को अनसुना कर रही है?" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230313-WA0002.jpg 960w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230313-WA0002-300x200.jpg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230313-WA0002-768x511.jpg 768w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230313-WA0002-696x463.jpg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230313-WA0002-631x420.jpg 631w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230313-WA0002-313x208.jpg 313w" sizes="auto, (max-width: 960px) 100vw, 960px" title="मुख्यमंत्री महोदय, यह कैसी सरकार है जो सालों से जनता की मांग को अनसुना कर रही है? 10"><p>नागदा। कमलनाथ सरकार के मंत्रिमंडल में तीन नवीन जिले नागदा, चाचौड़ा एवं मैहर के सर्जन की स्वीकृति 18 मार्च 2020 को मिली। इस सरकार के गिरने के बाद नागदा को जिला बनाने की प्रक्रिया,  गजट नोटिफिकेशन एवं दावा /आपत्तियों को ग्रहण लगा है। तकरीबन ढाई बरसों से यह मामला पेड़ से गिरा खजूर पर अटका की कहावत को चरितार्थ कर रहा है। इन दिनों इस मसले को लेकर सियासती घमासान मचा है। शहर की तस्वीर &#8211; तकदीर  बदलने की इस मांग की लड़ाई अब एक चौराहे पर तो खडी, एक नई राह की तलाश में भी हैं। अब लगभग यह तस्वीर तो साफ हो गई हैकि जनता की इस ख्वहिश  की गैंद शिवराज सरकार के पाले में है।  कमलनाथ सरकार मंत्रिमंडल की स्वीकृति को बस अमली जामा पहनाना बाकी है। इस मामले में भाजपा विचारक एवं कांग्रेस के बीच में सियासत मची है। कांग्रेस सवाल खड़े कर रही है तो भाजपा बचाव की मुद्रा में हैं। इस सियासती  खेल ने अभी-अभी नई करवट ली है। अकस्मात दो दिनों के अंतराल में चार समीकरण  उभर कर सामने आए हैं । (1) जिले की दरकार को लेकर मुखिया शिवराज से कर्नाटक के राज्यपाल डॉ थावरचंद गेहलोत के संग एक प्रतिनिधि मंडल मिला(2) कांग्रेस विधायक दिलीपसिंह गुर्जर के नेतृत्व मे मांग को लेकर धरना  प्रदर्शन। (3)  मांग के पक्षधर मप्र शासन में कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त असंगठित कर्मकार  कल्याण मंडल के अध्यक्ष श्रीसुल्तानसिंह ने एक पत्र सीएम शिवराज को सौंपा। जिसमे  नागदा को जिला बनाने की सीएम की घोषणा की स्मृति को ताजा किया (4) प्रेस क्लब ने जनमत संग्रह एवं बुद्धिजीवियों से रायशुमारी पर केंद्रित  परिचर्चा का ऐलान किया।</p>
<p><strong>डॉक्टर जटिया एक ताकतवर राजनेता</strong><br />
उक्त चारों मसलों पर चर्चा के पहले बड़ा एक मसला प्रासंगिक है।  शिवराज से जो प्रतिनिधि मंडल मिला उसमे  उज्जैन जिले के एक वजनदार राजनेता डॉ सत्यनारायण जटिया को शामिल नहीं करना  एक बड़ी चूक है। डॉ जटिया अतीत में भारत सरकार में कैबिनेट मंत्री के ओहदे से नवाजे गए थे, इन दिनों आप भाजपा केंद्रीय संसदीय बोर्ड के सदस्य है। बोर्ड सदस्य के किरदार में यह चेहरा हिंदुस्तान की सियासत में टॅांप 10 हस्तियों में शुमार है। सीएम से मिले प्रतिनिधि मंडल की यह खासियत रही कि भाजपा संगठन को कोई वजनदार राजनेता शामिल नहीं था। यह बात सामने आ रही हैकि सीएम से इस मसले पर प्रतिनिधि मंडल में  डा जटिया की प्रतिभागिता वरदान साबित होती। प्रतिनिधि मंडल की मुलाकात  पहले तो यह सोशल मीडिया तक सीमित रही। कोई ठोस वजह समानें नहीं आई। तीन दिन बाद पूर्व विधायक दिलीपसिंह शेखावत ने मीडिया से चर्चा में इसको रंग -रोगन किया और खुलासा किया कि जिस प्रतिनिधि मंडल में वे स्वयं शामिल थे, उनके साथ महामहिम भी थे। वे बोले , नागदा को जिला बनाने केा लेकर सीएम से चर्चा हुई। शिवराज के मुढ को आपने पढा और यह भी भांप लिया कि  वे सकारात्मक नजर आए। लेकिन  नागदा जिले के सर्जन में शामिल होने वाली तहसील खाचरौद, आलोट एवं महिदपुर की आपत्तियों को लेकर निराशा एवं  हताशा भी इजाहर कर दी।</p>
<p><strong>बस्ती बसी नहीं शेर का भय</strong><br />
नवीन जिले के प्रार्दुभाव में  आपतियां भोगोलिक स्तर की ही वजनदार  होती है। किसी राजनेता का विरोध  वैधानिक  रूप से रोडा नहीं बनता।  इतिहास साक्षी हैकि आगर, अलिराजपूर, नीमच, सिंगरौली, और डिडौरी जितने भी नवीन जिलों का सर्जन  हुआ सब में दर्जनों आपतियां आई, लेकिन, खारिज हुई। उन आपतियों  पर मात्र  विचार होता जो जिले की भोगेलिक सीमा, प्राकृतिक आपदा मतलब नदी नाले की अड़चन आदि की बुनियाद पर टिकी होती है। उनका समाधान  भी तलाशा जाता। महज अखबारों मे विरोध या दल विशेष के नेता की  असहमति रोड़ा नही बनती।  यह तर्क अब हास्यास्पद हैकि नागदा को जिला बनाने में  आपतियों रोडा बनेगी।  जब सरकार ने आपतिया अभी आंमत्रित ही  नहीं की तो पहले से यह भय पैदा करना की यह कारण बाधक बन जाएगा। मतलब बस्ती बसी नहीं और शेर के आने का डरावना भय। यह नकारात्मक इच्छाशक्ति का परिचायक है। जहां तक महिदपुर की तत्कालीन कांग्रेस विधायक स्व कल्पना परूलेकर की आपति का हवाला दिया जा रहा है तो इस पत्रकार के पास वे प्रमाणिक दस्तावेज है जो  वर्ष 2012 में नागदा को जिला बनाने के  लिए आई आपत्तियों के प्रमाण है। तत्कालीन अवर सचिव  राजस्व विभाग  श्री अशोक गुप्ता हस्ताक्षार का वह दस्तावेज इस पत्रकार के पास सुरक्षित है।  इस अभिलेख में लिखा हैकि नागदा को जिला बनाने  के खिलाफ 3 अप्रैल 2012 को महिदपुर से कुल 7 आपतिया आई।  जिसमें महिदपुर के अभिभाषक एवं सामाजिक संगठनों के नाम शुमार है।  यह प्रमाणित  प्रोसडिंग 9 मई 2012 है। अवर सचिव के इस खुलासे में कल्पना के नाम का कोई दस्तावेज नही है। यह बात सत्य हैकि कल्पना की आपति समाचारों तक सीमित रही। इसी प्रकार से महिदपुर के वर्तमान विधायक श्री बहादुरसिंह चौहान ने भी उस समय में महिदपुर को जिला बनाने की मांग की थी। जब विरोध में कल्पना का नाम लिया जा रहा है तो महिदपूर भाजपा विधायक के नाम का तर्क  चतुराई से प्रकट नहीं किया। इनहोने भी समाचार पत्रों में महिदपुर को इस तथ्य के साथ जिला बनाने की मांग उठाई थीकि रियासत काल में महिदपुर जिला था। इसलिए इसी को जिला बनाया जाए।</p>
<p><strong>यह तो नैतिक जिम्मेदारी</strong><br />
अब यदि ये फिर विरोध करते है तो भाजपा की  नैतिक जिम्मेदारी  िक वे अपनी पार्टी के विधायक को राजी करें।  इसी प्रकार से नागदा जिले में आलोट तहसील को शामिल करने का विरोध वहां के कांग्रेस विधायक मनोज चावला करें तो नागदा के कांग्रेस विधायक श्री गुर्जर की नैतिक जिम्मेदारी हैकि उन्हे राजी करें।</p>
<p>यहा गौर करने लायक बात हैकि एक बार नागदा को जिला बनाने का प्रस्ताव आपतियों के आधार पर प्रस्ताव निरस्त नहीं हुआ था एक राजस्व विभाग के अवर सचिव ने  सोची समझी रणनीति के तहत यह कहकर प्रस्ताव निरस्त किया थाकि नागदा को जिला बनाने के तथ्य उभर कर सामने नहीं आ रहे हैं। यह प्रस्ताव 2 जून 2012 को निरस्त हुआ। पत्र क्रमांक डी- 853/1777/ 2008 के माध्यम से निरस्त प्रस्ताव की सूचना जारी की गई। (इस अभिलेख के प्रमाण सुरक्षित है।)</p>
<p><strong>विवाद के भंवरजाल में सीएम मुलाकात</strong><br />
प्रतिनिधि मंडल की सीएम से मुलाकात पर  कांग्रेस विधायक श्री गुर्जर ने सवाल खडे किए हैकि सीएम से जिले को लेकर महामहिम की जो चर्चा हुई  और मांग पत्र सौपा गया उसको सार्वजनिक किया जाए। गौरतलब हैकि प्रमाणिकता और सीएम के आश्वासन का प्रमाणिक  प्रसारण जब तक जनता के सामने ना आया तब तक तो प्रतिनिधि मंडल की बात जंगल में मौर नाचा किसने देखा की कहावत चरितार्थ है।</p>
<p>वैसे तो नागदा को जिला बनाने की मांग की अनुशंसा तत्कालीन  भाजपा राष्ट्रीय महासचिव श्री  थावरचंद गेहलोत ने 16 सितंबर 2010 को शिवराज के नागदा आगमन पर  की थी। यह मांगपत्र  भाजपा संगठन ने सौंपा था।( प्रमाण इस पत्रकार के पास सुरक्षित है। अब डॉ गेहलोत कर्नाटक के राज्यपाल के संवैघानिक एवं मर्यादित पद पर आसीन है। डॉ जटिया आज की स्थिति में भाजपा में एक वजनदार किरदार है। जिस भी राजनेता ने शिवराज से प्रतिनिधि मंडल का तानाबाना बूना वे संभवत बड़ी चूक कर गए कि डॉ जटिया को इस प्रतिनिधि मंडल में शामिल करने की भूल कर गए।</p>
<p><strong>सांसद एवं प्रभारी मंत्री को याद करते</strong><br />
बेहत्तर होता प्रतिनिधि मंडल में  सांसद श्री अनिल फिरोजिया प्रभारी मंत्री श्रीजगदीश देवडा और उज्जैन जिले कें निवासी उच्च शिक्षा मंत्री डा मोहन यादव भाजपा प्रदेश अध्यक्षश्री वीडी शर्मा  उज्जैन जिला भाजपा अध्यक्ष श्री बहादुरसिंह बोरमुंडला को भी शामिल किया जाता। ये सभी भाजपा के उर्जावान लोग हैं।</p>
<p><strong>कांग्रेस की गूंज अभी सीमित</strong><br />
कांग्रेस विधायक दिलीप सिंह गुर्जर ने जिला बनाने की मांग को लेकर घरना आंदोलन कर दिया।  वे बोल रहे हैकि-  नागदा कागजी दस्तावेजों में तो जिला  बन चुका है। कमलनाथ सरकार ने स्वीकृति प्रदान कर दी । बस अब दावे- आपतियों  पर सारा दारोमदार टिका है।  यहां पर यह कहावत भाजपा एवं कांग्रेस पर दोनों पर चरितार्थ हो गई कि कुलडी में गुड़ फोड़ लिया । कांग्रेस ने कोई बड़ा आंदोलन का मार्ग अख्तार नहीं किया।  जिसकी  गूंज भोपाल हाउस या वल्लभ्ठा भवन तक जाए।  इसी प्रकार से सीएम से मिले प्रतिनिधि मंडल पर भी यह कहावत  चरितार्थ होती है।</p>
<p><strong>मंत्री दर्जा राजनेता की पेशकश</strong><br />
अभी तक के हालातों में इस मसले पर भाजपा खेमे से  पूर्व विधायक दिलीपसिंह शेखावत मोर्चा संभाले हुए हैं। लेकिन मप्र शासन में कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त असंगभित कामगार बोर्ड के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ भाजपा नेता सुल्तानसिंह शेखावत ने सीएम के नाम पत्र भेजकर पूर्व विधायक श्री शेखावत की इस मसले पर जारी एकाधिकार की सियासत को ओवरटेक करने का प्रयास  किया है। उन्होंने मीडिया को बकायदा उस पत्र की प्रति जारी की है जोकि सीएम के नाम है जो  सकारात्मक  व जनहित की पक्षधर है। उन्होंने  पत्र में सीएम शिवराज को याद दिलाया  हैकि नागदा को जिला बनाने की स्वयं  ने 26 नवंबर 2018 को घोषणा की थी। उसको अब आगे बढाया जाए। हालांकि एक सप्ताह पहले विधान सभा में विधायक  श्री गुर्जर के सवाल पर  यह खुंलासा हुआ कि हैकि ऐसी कोई घोषणा सीएम नहीं की थी ।</p>
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		<title>नागदा को जिला बनाने के लिए प्रेस क्लब ने नागरिकों की परिचर्चा रखने का लिया निर्णय!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[कैलाश सनोलिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Mar 2023 14:10:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="1280" height="960" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230310-WA0003.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="नागदा को जिला बनाने के लिए प्रेस क्लब ने नागरिकों की परिचर्चा रखने का लिया निर्णय!" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230310-WA0003.jpg 1280w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230310-WA0003-300x225.jpg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230310-WA0003-1024x768.jpg 1024w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230310-WA0003-768x576.jpg 768w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230310-WA0003-696x522.jpg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230310-WA0003-1068x801.jpg 1068w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230310-WA0003-560x420.jpg 560w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230310-WA0003-80x60.jpg 80w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230310-WA0003-265x198.jpg 265w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230310-WA0003-313x235.jpg 313w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" title="नागदा को जिला बनाने के लिए प्रेस क्लब ने नागरिकों की परिचर्चा रखने का लिया निर्णय! 11">नागदा, 10 मार्च । मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में स्थित औद्योेगिक नगर नागदा को जिला बनाने की  लगातार उठ रही मांग में प्रेस क्लब नागदा ने भी भूमिका निभाने की घोषणा की है। नागरिकों में जन चेतना जागृत करने के लिए  क्लब के बैनर तले एक परिचर्चा का आयोजन करने का निर्णय लिया गया। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="1280" height="960" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230310-WA0003.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="नागदा को जिला बनाने के लिए प्रेस क्लब ने नागरिकों की परिचर्चा रखने का लिया निर्णय!" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230310-WA0003.jpg 1280w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230310-WA0003-300x225.jpg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230310-WA0003-1024x768.jpg 1024w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230310-WA0003-768x576.jpg 768w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230310-WA0003-696x522.jpg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230310-WA0003-1068x801.jpg 1068w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230310-WA0003-560x420.jpg 560w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230310-WA0003-80x60.jpg 80w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230310-WA0003-265x198.jpg 265w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230310-WA0003-313x235.jpg 313w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" title="नागदा को जिला बनाने के लिए प्रेस क्लब ने नागरिकों की परिचर्चा रखने का लिया निर्णय! 12"><p>नागदा, 10 मार्च । मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में स्थित औद्योेगिक नगर नागदा को जिला बनाने की  लगातार उठ रही मांग में प्रेस क्लब नागदा ने भी भूमिका निभाने की घोषणा की है। नागरिकों में जन चेतना जागृत करने के लिए  क्लब के बैनर तले एक परिचर्चा का आयोजन करने का निर्णय लिया गया। इस कार्यक्रम में बुद्धिजीवियों, सामाजिक संगठनों व्यापरियों समेत समाज के प्रत्येक वर्ग के लोगों को आंमत्रित कर उनके विचारों को साझा किया जाएगा। इसी प्रकार से रेल मंत्रालय द्धारा अधिमान्य पत्रकारों को यात्रा में मिलने वाली 50 प्रतिशत की रियायत को बंद करने  की सुविधा को पुनः शुरू करने की मांग का भी प्रस्ताव पारित किया गया। यह जिम्मेदारी प्रेस क्लब सचिव राजेश सकलेचा को सौपी गई है जिनको हाल में रेलवे विभाग में विशेष रूचि सदस्य मनोनीत किया गया है।</p>
<p>उक्त दोनो प्रस्ताव प्रेस क्लब की शुक्रवार को आयोजित बैठक में पारित किए गए। बैठक की अध्यक्षता प्रेस क्लब अध्यक्ष दीपक चौहान ने की। इस मौके पर क्लब संरक्षक कैलाश सनोलिया ने इन दोनों प्रस्तावों पर प्रेस क्लब को कार्य करने  का सुझाव रखा। उन्होंने  क्लब सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा,  नागदा को जिला बनाने के लिए मामला लगभग 15 वर्षो से अटका पडा है। इस मसले पर दोनो प्रमुख राजनैतिक दल भाजपा एवं कांग्रेस एक मत है, उसके बावजूद जनता की यह मूराद अधूरी है। इस मसले पर  प्रेेस क्लब की भी जिम्मेदारी हैकि अपनी भूमिका निभाए। इस मसले पर शहर के नागरिकों की एक परिचर्चा करने का निर्णय लिया गया। अध्यक्ष दीपक चौहान ने इस कार्ययोजना को शीध्र मूर्तरूप देने की घोषणा की। इस परिचर्चा की रूपरेखा तय करने के लिए निलेश रघुवंशी को अधिकृत किया गया। अब वे शीध्र एक कमेटी का गठन कर परिचर्चा को अंजाम देंगे।</p>
<p><strong>वाद- विवाद &#8211;  प्रतियोगिता</strong><br />
इस मौक पर वरिष्ठ पत्रकार बृजेश बोहरा ने नवीन नागदा जिला सर्जन के लिए छात्र-छात्राओं में सचेतना जागृत करने के मकसद से एक वाद-विवाद प्रतियोगिता रखने का सुझाव रखा जिसे  सर्वानुमति से स्वीकृत किया गया। समय की अनुकुूुलता के अनुसार इस प्रस्ताव को शीध गुण दोष के आधार पर क्रियान्वित करने के लिए प्रयास किया जाएगा।</p>
<p><strong>पत्रकारों का मामला उठाने की घोषणा</strong><br />
रेलवे विभाग के विशेष रूचि सदस्य एव प्रेस क्लब सचिव राजेश सकलेचा ने बैठक में इस बात की घोषणा की वे  डीआरएम के समक्ष होने वाली बैठक में यह मसला उठाएंगे कि रेलवे में अधिमान्य पत्रकारों को यात्रा के दौरान मिलने वाली 50 प्रतिशत की रियायत को पुनः शुरू किया जाए। अधिमान्य पत्रकारों के साथ मीडिया संस्थानों के अधिकृत सामान्य पत्रकारों को भी इस सुविधा का लाभ मिलने की मंांग उठाई जाएगी। रेलवे सदस्य श्री सकलेचा की इस घोषणा के पहले पत्रकार कैलाश सनोलिया ने बताया कि किसी समय में तत्कालीन रेलमंत्री ममता बैनर्जी के कार्यकाल में अधिमान्य पत्रकारों के लिए देशभर में यात्रा करने पर 50 प्रतिशत टिकट रियायत की सुविधा मिली थी। बरसो तक यह जारी रही, लेकिन कोरोना काल में इस सुविधा को बंद कर दिया गया। यह सुविधा बंद करने से देशभर के पत्रकार प्रभावित हुए है। अखिल भारतीय  स्तर की इस मांग को यदि प्रेस क्लब उठाएगा तो देश भर के हजारों पत्रकारों को लाभ मिलेगा।  रेलवे सदस्य सकलेचा ने इस सुविधा को चालुू करने के लिए हर डीआरएम बैठक में रखने का भरोसा दिलाया। बैठक में संरक्षक भेरूलाल टांक, वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत मेहता, पूर्व अध्यक्ष सलीम खान एवं मुकेश जैन ने भी विचार रखे।</p>
<p><strong>उपलब्धि पर सम्मान</strong><br />
बैठक में रेलवे में विशेष सदस्य मनोनीत होने पर राजेश सकलेचा का क्लब  सदस्यों ने सम्मान किया। इसी प्रकार  से भारतीय पत्रकार संघ का जिला सदस्य बनने पर निलेश रघुवंशी का भी अभिनंदन किया गया। दोनो पत्रकारों का स्वागत सुरेश रघुवंशी, रविंद्रसिंह रघुवंशी, कृष्णकांत गुप्ता, सुरेश जायसवाल, मुकेश जैन, अशोक दायमा, महेश कछावा, विभोर चौपड़ा, फिरेाज शेख आदि ने किया। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश पुरोहित के भ्राता के निधन पर दो मौन मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धाजलि दी गई।</p>
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		<title>नागदा जिला- स्वयंबर का धनुष तोड़ने में नकारा साबित हुए सत्ता के सूरमा।</title>
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		<dc:creator><![CDATA[कैलाश सनोलिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Mar 2023 16:43:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चर्चा]]></category>
		<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[आंदोलन]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="640" height="480" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/images282729.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="नागदा जिला- स्वयंबर का धनुष तोड़ने में नकारा साबित हुए सत्ता के सूरमा।" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/images282729.jpeg 640w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/images282729-300x225.jpeg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/images282729-560x420.jpeg 560w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/images282729-80x60.jpeg 80w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/images282729-265x198.jpeg 265w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/images282729-313x235.jpeg 313w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" title="नागदा जिला- स्वयंबर का धनुष तोड़ने में नकारा साबित हुए सत्ता के सूरमा। 13">नागदा।&#160; रामायण काल में जनकपूरी में एक स्वयंबर हुआ था। इस स्वयंबर&#160; का असली चिंतन&#160; तो यह थाकि सुरमा कौन है। शक्तिशाली कौन है। इस स्वयंबर&#160; का पैमाना यह थाकि&#160; रखा धनुष को जो भी सूरमा तोड़ देगा, वह&#160; उस मकसद का असली किरदार&#160; होगा। धनुष&#160; तोड़ने की जिसमें सामर्थ्य वहीं सूरमा होगा। फिर जनक [&#8230;]]]></description>
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<p>नागदा।&nbsp; रामायण काल में जनकपूरी में एक स्वयंबर हुआ था। इस स्वयंबर&nbsp; का असली चिंतन&nbsp; तो यह थाकि सुरमा कौन है। शक्तिशाली कौन है। इस स्वयंबर&nbsp; का पैमाना यह थाकि&nbsp; रखा धनुष को जो भी सूरमा तोड़ देगा, वह&nbsp; उस मकसद का असली किरदार&nbsp; होगा। धनुष&nbsp; तोड़ने की जिसमें सामर्थ्य वहीं सूरमा होगा। फिर जनक की बेटी का हाथ थामने की जो उनकी मुराद है वह पूरी होगी।&nbsp; वहां पहुचे कई सूरमाओं में से अधिकांश ने धनुष तोड़ने की प्रकिया के वक्त ऐसा आंडम्बर किया कि जैसा उनसे बलशाली&nbsp; और कोई नहीं है। धनुष उठाने के पहले ही स्वयंभू बने और अपने बल और पराक्रम का गुणगान ऐसे&nbsp; करते दिखे जैसे उनके बराबरी का कोई पराक्रमी नहीं है। उन आंडंबरियों का हश्र यह हुआ कि और कोई जो दूूर खड़ा था उसने अपनी ताकत का एहसास उन सारे आंडंबरी सूरमाओं को दिखा दिया। उस काल का यह प्रसंग हाल में नागदा की उपेक्षा कर रीवा जिले के एक मऊगंज को जिला बनाने की घोषणा से सामंजस्य कर गया। बाजी मऊगंज मार गया। नागदा के सत्ता के सूरमाआ शक्तिहीन और सामर्थ्यहीन साबित हुए। जनता सत्ता से ही उम्मीद करती है, लेकिन यहां तो सत्ता के सूरमा मुंह लटकाए खड़े&nbsp; और बाजी और कोई मार गया।</p>



<p>उधर, शिवराज ने मऊगंज जाकर&nbsp; जिला बनाने की घोषणा की।&nbsp; जनता को इतना भी आश्वासन दिया कि स्वाधीनता दिवस का तिरंगा अब नए जिले मऊगंज में ही लहराएगा। जबकि प्रदेश में नागदा समेत अन्य दो नवीन जिलों के सृजन का प्रस्ताव कमलनाथ&nbsp; मंत्रिपरिषद&nbsp; में 18 मार्च 2020 को मप्र शासन&nbsp; तत्कालीन मुख्य सचिव एम गोपाल रेड्डी के हस्ताक्षर से अस्तित्व में है। नागदा, मैहर एवं चाचौड़ा को नवीन जिला सृजन की स्वीकृति मिली थी।</p>



<p>सरकार बदलते लटकाने की नीति</p>



<p>हाल में श्री अभय चौपड़ा के सूचना अधिकार में जो&nbsp; जानकारी मिली (जो इस पत्रकार के पास भी सुरक्षित है) । उसके अनुसार नागदा को जिला बनाने के लिए पुनः नए सिरें से प्रक्रिया करने का&nbsp; दाव कमलनाथ सरकार गिरने के बाद भाजपा सरकार ने खेला । ऐसा सरकार ने क्यों किया यह जनता को समझना होगा।</p>



<p>नागदा में विकास यात्रा आई तो सत्ता के किसी भी सूरमा ने इस मामले पर कोई बात नहीं की। यह हास्सास्पद बात हुई कि नागदा को 53 वां जिला बनाने के लिए पोस्टकार्ड अभियान चलाया जाएगा। यह बात विपक्षी कांग्रेस करती तो जनता&nbsp; के गले भी उतरती। इस बात का यह हश्र हुआ कि 53 वां जिला बनाने के लिए यहां आंडबर हो रहा था और यह क्रम तो रीवा जिले के मऊगंज को नसीब हो गया। नागदा&nbsp; के स्थानीय सत्ता के सूरमाओं की ताकत और सामर्थ्य का असली चेहरा सामने आ गया। बेहत्तर होता नागदा के स्थानीय सूरमा यह दलील पेश करते कि नवीन मऊगंज&nbsp; का सर्जन करने के पहले जिन तीन जिलों की मंजूरी वल्लभ भवन मे पड़ी है उस पर पहले अमल में लाए। जाहिर हैकि या तो स्थानीय सत्ता के सूरमाओं को इस मसले पर शिवराज ने तव्वजों नहीं दी। या स्वयं की इच्छा शक्ति नहीं है।</p>



<p>जिला बनाने के नाम पर वोट मांगे</p>



<p>लेकिन जनता को वह बात भी तो याद हैकि भाजपा उम्मीदवार श्री दिलीपसिंह शेखावत ने वर्ष 2013 का विधानसभा चुनाव नागदा को जिला बनाने की पहली प्राथमिकता के साथ लड़ा था। जीत भी मिली लेकिन जनता की मुराद पूरी नहीं हुई।&nbsp; तीसरा कारण यह भी संभव हैकि फिर जैसा विपक्ष बार-बार आरोप लगा रहा हैकि ग्रेसिम इस मामले में अवरोघक बना हुआ है। शायद इसी बात को लेकर जनता की मुराद पर कुठाराघात हो रहा है।</p>



<p>आंदोलन का धर्म कांग्रेस&nbsp; निभाए</p>



<p>इस मांग को पहले कांग्रेस विधायक दिलीपसिंह गुर्जर ने 2008 में उठाया था। पहले तो भाजपा इस मांग पर मुंह मोड़ती रही फिर अनमने मन से साथ में हुई। स्थानीय भाजपा संभव इसलिए मूंह मोड़ रही थीकि कांग्रेस विधायक की यह मांग है। श्री गुर्जर को कही श्रेय ना मिल जाए इसलिए कन्नी काटी। अभी भी भाजपा सहमी और डरी हुई कि यदि जिला बनाए जाने की अधूरी प्रकिया को पूरी कर दिया जाएगा तो दिलीपसिंह गुर्जर को श्रेय मिलेगा। कारण कि कमलनाथ सरकार ने महज 15 महिनों में घोषणा कर दी तो भाजपा की सरकार 15 बरसों में नहीं कर पाई।&nbsp; &nbsp; बेहत्तर होगा विपक्ष कांग्रेस अब विधानसभा में प्रश्न एवं याचिका के अलावा सीधे&nbsp; आक्रामक जनआंदोलन के लिए आगे आए। शहर बंद भोपाल में घेराव कार्यकताओं की गिरफतारी जैेसे कदम उठाए और अपने विपक्ष&nbsp; के धर्म को निभाए। अन्यथा जनता के साथ नाइंसाफी होगी .l</p>



<p>आप पार्टी के लिए सुनहरा मौका</p>



<p>अब इस मसले को आप पार्टी को लपकना होगा। स्थानीय स्तर पर इस पार्टी का नेतृत्व अब सुबोध स्वामी के हाथों में है। ये कांग्रेस का जिला कार्यवाहक अध्यक्ष&nbsp; पद छोडकर आप पार्टी में आए हैं। सुबोध को जन आंदोलन खड़ा कर देना चाहिए। आंदोलन भी ऐसा कि उसकी गंूज राजधानी में गूंजना चाहिए। जबकि कांग्रेेस में कुबत हैकि इस प्रकार का आंदालन करें यदि आप पार्टी ऐसा करेंगी तो कांग्रेस&nbsp; भी मजबूर हो जाएगी।&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p>



<p>ये सुलगत सवाल :&nbsp;</p>



<p>&nbsp;(1)&nbsp; विधायक श्री दिलीप सिंह गुर्जर के विधानसभा के एक&nbsp; सवाल पर सबसे पहले नागदा को जिला बनाने का जो परीक्षण&nbsp; हुआ था उसे भाजपा सरकार में जून 2112 में यह कह कर खारिज कर दिया कि नागदा को जिला बनाने के तथ्य उभर सामने नहीं आए। यह प्रस्ताव जब अधिकारियों ने खारिज किया तब सत्ता&nbsp; सूरमा क्यां कर रहे थे। जनता सत्ता पक्ष से ही उम्मीद करती है।</p>



<p>(2) जिस प्रस्ताव को भाजपा शासन काल में 2012 में निरस्त किया गया वहीं प्रस्ताव कमलनाथ के 15 माह के शासन काल में मान्य हो गया।</p>



<p>(3) भाजपा उम्मीदवार श्री दिलीपसिंह शेखावत ने वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में पहली प्राथमिकता नागदा को जिला बनाने के लिए&nbsp; जनता से वोट मांगे और जीत भी मिली। वे बैंरग घर लौट आए। नागदा जिला नहीं बना। प्रदेश में भाजपा की ही सरकार थी।</p>



<p>(4)&nbsp; कमलनाथ सरकार में 18 मार्च 2020 को नागदा को जिला बनाने की मंजूरी मिली बाद में सरकार गिर गई।&nbsp; इस मंजूरी को आगे बढाने के बजाय इस मसले&nbsp; को लटकाने के लिए भाजपा सरकार के 4 मंत्रियों की समिति ने पुनःपरीक्षण की मांग रख दी। यहा बात गौर करने लायक हैकि ऐसा क्यों किया गया। लेकिन समझदार अधिकारी ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।</p>



<p>(5) कमलनाथ सरकार का प्रस्ताव आज भी अब वैधानिक रूप से अस्तित्व में है। सत्ता के सूरमा उसके प्रति खामौश क्यों है। यह प्रस्ताव तीन वर्ष से इंतजार कर रहा है।</p>



<p>(6) नागदा को जिला बनाने के लिए वजनदार राजनेता श्री थावरचंद गेहलोत ने कवरिंग पत्र के साथ मांग पत्र सीएम&nbsp; शिवराज को नागदा आगमन पर दिया था। यह मांग पत्र 16 सितंबर 2010 कौ सौंपा गया।इस मांग पत्र पर श्री लालसिंह राणावत, श्री दिलीपसिंह शेखावत, डॉ तेजबहादुरसिंह चौहान और घर्मेंश जायसवाल के हस्ताक्षर थे। इन बडे़ राजनेताओं की मांग को अनदेखा किया गया। यह&nbsp; ज्ञापन 12 वर्ष पहले दिया था। इसके पहले मऊगंज जिला बन गया।</p>



<p>(7 )भाजपा बहुमत की नपा परिषद&nbsp; नागदा ने 30 अप्रैल 2010 को इस शहर को जिला बनाने का प्रस्ताव सवानुमति से पारित किया। कांग्रेस पार्षदों ने भी सहमति जताई। अपनी ही सरकार में यह प्रस्ताव 13 वर्षो के बाद मूर्तरूप नहीं ले पाया। मजेदार बात नपा का यह प्रस्ताव वल्लभ भवन भी नहीं पहॅुुचा।</p>



<p>&nbsp;( 8) मुख्यमंत्री ने नागदा में जिला बनाने कीघोषणा आर्शीवाद यात्रा में की जिसको भाजपा ने बहुत प्रचारित भी किया लेकिन हाल में विधायक गुर्जर के एक सवाल पर विधानसभा में सरकार ने इस घोषणा को भी नकार दिया।</p>



<p>( 9) नागदा से कब आबादी वाला शहर आगर, अलिराजपूर एवं मउगंज जिला बन गया और यहां के वाशिदों देखते रह गए। यह तो बड़े- बडे राजनेताओं का शहर है।</p>



<p>(10) कमलनाथ सरकार का प्रस्ताव अक्टूबर 2020 सें अस्तित्व में है। लगभग ढाई बरस बीत गए इसकी सूंध लेने की जिम्म्मेदारी किसकी थी। जनता सत्ता से ही तो उम्मीद रखती है।</p>
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		<title>कांग्रेस के दो धुरंधर राजनेताओं की 20 वर्ष पुरानी तकरार, अब विधानसभा में इजहार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[कैलाश सनोलिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Mar 2023 13:36:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[चर्चा]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="1092" height="1092" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/Dilip-Singh-Gurjar.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="कांग्रेस के दो धूरंधर राजनेताओं की 20 वर्ष पुरानी तकरार, अब विधानसभा में इजहार." style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/Dilip-Singh-Gurjar.jpg 1092w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/Dilip-Singh-Gurjar-300x300.jpg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/Dilip-Singh-Gurjar-1024x1024.jpg 1024w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/Dilip-Singh-Gurjar-150x150.jpg 150w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/Dilip-Singh-Gurjar-768x768.jpg 768w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/Dilip-Singh-Gurjar-696x696.jpg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/Dilip-Singh-Gurjar-1068x1068.jpg 1068w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/Dilip-Singh-Gurjar-420x420.jpg 420w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/Dilip-Singh-Gurjar-328x328.jpg 328w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/Dilip-Singh-Gurjar-313x313.jpg 313w" sizes="auto, (max-width: 1092px) 100vw, 1092px" title="कांग्रेस के दो धुरंधर राजनेताओं की 20 वर्ष पुरानी तकरार, अब विधानसभा में इजहार 16">नागदा । मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के नागदा-खाचरौद विधानसभा के दो धूरंधर कांग्रेस राजनेताओं की पुरानी सियासती तकरार अब लगभग 20 बरस बाद  मप्र के चालु विधानसभा सत्र में उभर कर सामने आई। क्षेत्र के विधायक एवं आल इंडिया कांग्रेस के सदस्य दिलीपसिंह गुर्जर के एक तारांकित प्रश्न ने अतीत की एक सियासत की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="1092" height="1092" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/Dilip-Singh-Gurjar.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="कांग्रेस के दो धूरंधर राजनेताओं की 20 वर्ष पुरानी तकरार, अब विधानसभा में इजहार." style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/Dilip-Singh-Gurjar.jpg 1092w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/Dilip-Singh-Gurjar-300x300.jpg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/Dilip-Singh-Gurjar-1024x1024.jpg 1024w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/Dilip-Singh-Gurjar-150x150.jpg 150w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/Dilip-Singh-Gurjar-768x768.jpg 768w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/Dilip-Singh-Gurjar-696x696.jpg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/Dilip-Singh-Gurjar-1068x1068.jpg 1068w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/Dilip-Singh-Gurjar-420x420.jpg 420w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/Dilip-Singh-Gurjar-328x328.jpg 328w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/Dilip-Singh-Gurjar-313x313.jpg 313w" sizes="auto, (max-width: 1092px) 100vw, 1092px" title="कांग्रेस के दो धुरंधर राजनेताओं की 20 वर्ष पुरानी तकरार, अब विधानसभा में इजहार 18"><p>नागदा । मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के नागदा-खाचरौद विधानसभा के दो धूरंधर कांग्रेस राजनेताओं की पुरानी सियासती तकरार अब लगभग 20 बरस बाद  मप्र के चालु विधानसभा सत्र में उभर कर सामने आई। क्षेत्र के विधायक एवं आल इंडिया कांग्रेस के सदस्य दिलीपसिंह गुर्जर के एक तारांकित प्रश्न ने अतीत की एक सियासत की प्रतिद्धद्धता की याद को ताजा कर दिया। कांग्रेस एमएलए श्री गुर्जर ने दूसरे कांग्रेस राजनेता के परिजनों के करोड़ों के टर्न ओवर के एक कारोबार की खामियों को लेकर विधानसभा में सवाल कर लिया।</p>
<p>यह मामला अब सुर्खियों में आ गया। मामला यह थाकि वर्ष 2003 में तत्कालीन पूर्व कांग्रेस विधायक दिलीपसिंह गुर्जर को मात देकर पूर्व विधायक रणछोडलाल आंजना कांग्रेस का टिकट लाने में कामयाब हुए थे। इस चुनाव  में श्री आंजना को हार मिली और पराजय के  बाद वे सक्रिय राजनीति से दूर हुए। गांव पचलासी में कृषि और कारोबार में जुट गए। इनके परिजनों के कारोबार को लेकर विधानसभा में कांग्रेस विधायक श्री गुर्जर ने तीखे सवाल कर लिए।  यह कारोबार श्री आंजना के बेटे करण आंजना के नाम से संचालित है ।</p>
<p><strong>खाद कारोबार जिंक सल्फेट प्रोजेक्ट पर सवाल</strong><br />
कांग्रेस के इन दोनों राजनेताओं की अतीत की सियासती तकरार मंगलवार को  तारांकित प्रश्न के  माध्यम से विधानसभा में देखने को मिली। कांग्रेस विधायक दिलीपसिंह गुर्जर ने विधानसभा में एक ऐसा प्रश्न पूछ लिया जो संभवत कांग्रेस नेता रणछोडलाल आंजना को नागवार गूजरा होगा। विधायक श्री गुर्जर ने गांव उमरना में एक लघु उधोग से संबधित  यूनिट की स्थापना को लेकर कुछ कड़वे सवाल पूछ लिए। यहां तक यूनिट में प्रदूषण विभाग के मापदंडों के पैमाना एवं उन पर परिपालन से संबधित सवाल थे। ये सवाल किसान कल्याण मंत्री से किया गया। यह भी सवाल थाकि निर्माण इकाई में 1 जनवरी 2019 से 6 फरवरी 2023 तक कितना उर्वरक का उत्पादन किया गया। यूनिट का आय-व्यय तक पूछ लिया। आॅडिट को लेकर भी प्रश्न थे। प्रदूषण विभाग से एनओसी तथा सहकारिता विभाग से जुड़े नियम एवं  शर्तो के सवाल भी थे। उत्पादन खाद की मप्र राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित भोपाल द्धारा निर्धारित दर के निर्धारण पर भी सवाल था। यह खाद 1 जनवरी 2019 से 6 फरवरी 2023  तक कहा-कहां और किन किन सहकारी संस्थाओं  को कितनी दर पर विक्रय किया गया। खाद की किस लेबारेटरी में कब- कब जांच करवाई गई।</p>
<p>इन सवालों के जवाब किसान कल्याण मंत्री के हवाले से आए। बडा जवाब यह आया कि इस यूनिट के संचालक करण आंजना है। गौरतलब हैकि करण करण पूर्व कांग्रेस विधायक रणछोड़लाल आंजना के छोटे बेटें हैं। मंत्री ने बताया कि यह यूनिट मेसर्स कल्याण जिंक सल्फेट के नाम से संचालित है। बडा जवाब यह भी आया कि यह यूनिट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मापदंड पर खरा है। खाद की विश्लेषण रिपोर्ट मानक स्तर की बताई गई है।</p>
<p><strong>दोनों की सियासत का इतिहास</strong><br />
किसी जमाने में भाजपा के अस्तित्व में आने के पहले यह नागदा-खाचरौद क्षेत्र भारतीय जनंसंघ का गढ था। जनता हलघर चुनाव  चिन्ह  के बाद जब भाजपा अस्तित्व में आई तो वर्ष 1985 में इस इस विधानसभा से कांग्रेस की टिकट पर रणछोड़लाल आंजना विजय हुए और विधानसभा में पहुुंच  गए। उन्होंने भाजपा के लालसिंह राणावत को 3828 मतों से शिकस्त दी।  विधायक काल के बाद दूसरी बार आपका वर्ष 1990 में टिकट कट गया और बालेश्वर दयाल जायसवाल को टिकट मिला। इस चुनाव में भाजपा के लालसिंह राणावत 10 हजार 355 मतांतर से  एमएलए बन गए। इस दौरान युवक कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय  दिलीप सिंह गुर्जर को पहली बार  वर्ष 1993  मे सारे समीकरणों को गडबडाते हुए कांग्रेस का टिकट मिला।  उस समय श्री गुर्जर बमुश्किल 26 वर्ष के थे। । उन्होंने भाजपा के लालसिंह  राणावत को 5644 मतों से पराजित किया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-5427" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230302-WA0001-1.jpg" alt="कांग्रेस के दो धूरंधर राजनेताओं की 20 वर्ष पुरानी तकरार, अब विधानसभा में इजहार." width="390" height="437" title="कांग्रेस के दो धुरंधर राजनेताओं की 20 वर्ष पुरानी तकरार, अब विधानसभा में इजहार 17" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230302-WA0001-1.jpg 390w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230302-WA0001-1-268x300.jpg 268w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230302-WA0001-1-375x420.jpg 375w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/03/IMG-20230302-WA0001-1-313x351.jpg 313w" sizes="auto, (max-width: 390px) 100vw, 390px" /></p>
<p>इस दौरान लंबे समय तक कांग्रेस के पूर्व विधायक श्री आंजना ने सियासत से थोड़ी दूरी बना  ली। लेकिन जब 2003 का चुनाव आया तो श्री आंजना एक लंबे समय के बाद लगभग 13 बरसों के बाद टिकट की दौड में आ गए और दिलीपसिंह गुर्जर की राह में रोड़ा बन गए। इस बार दिलीप सिंह गुर्जर को श्री आंजना के कारण टिकट से हाथ धोना पड़ा।</p>
<p>इस बार यहां पर दिलीपसिंह गुर्जर की सियासत को धक्का लगा।  उन्होंने  कांग्रेस एवं भाजपा के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। दिलीपसिंह की तकदीर ने ऐसा साथ दिया कि वे निर्दलीय रेल के इंजिन  चुनाव चिन्ह पर सवार होकर विधान सभा में पहुँच गए। टक्कर भाजपा एवं निर्दलीय श्री गुर्जर के बीच में ही रही। कांग्रेस यहां पर हाशिए पर चली गई। दिलीपसिंह गुर्जर भाजपा के लालसिंह राणावत को पटकनी देकर 14429 मतों जीत गए। उसके बाद से इस क्षेत्र की कांग्रेस राजनीति में दिलीपसिंह गुर्जर का दबदबा बरकरार  है। श्री आंजना इस पराजय के बाद सक्रिय राजनीति से दूर चले गए। कारोबार और कृषि में  मन लगाया। श्री आंजना की राजनीति के तार पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुनसिंह से जुड़े थे, बाद में  पूर्व प्रतिपक्ष नेता अजयसिंह के साथ आपके संबंध आज भी प्रगाढ है। वर्ष 2003 का टिकट श्री आंजना को अर्जुन सिंह के कोटे से ही मिला था।</p>
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		<title>मौत का मुहाना &#8211; राख के ढेर मामले में जनसुनवाई के फरमान का ग्रेसिम ने उड़ाया मखौल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[कैलाश सनोलिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Feb 2023 14:44:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[चर्चा]]></category>
		<category><![CDATA[समाज]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="1500" height="900" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/right-to-information.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="मौत का मुहाना - राख के ढेर मामले में जनसुनवाई के फरमान का ग्रेसिम ने उड़ाया मखौल" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/right-to-information.jpg 1500w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/right-to-information-300x180.jpg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/right-to-information-1024x614.jpg 1024w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/right-to-information-768x461.jpg 768w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/right-to-information-696x418.jpg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/right-to-information-1068x641.jpg 1068w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/right-to-information-700x420.jpg 700w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/right-to-information-313x188.jpg 313w" sizes="auto, (max-width: 1500px) 100vw, 1500px" title="मौत का मुहाना - राख के ढेर मामले में जनसुनवाई के फरमान का ग्रेसिम ने उड़ाया मखौल 19">नागदा। शिवराज सरकार प्रदेश में भले अच्छा कार्य करें ,लेकिन धरातल पर जनसुनवाई जैसी योजना का क्या हश्र हो रहा है, उससे सरकार की छवि पर क्या प्रभाव पड़ सकता है, उस सच का आईना एक सूचना अधिकार में सामने आया है।जाहिर हैकि समूचे प्रदेश में शासन की एक योजना के तहत प्रत्येक मंगलवार जन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="1500" height="900" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/right-to-information.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="मौत का मुहाना - राख के ढेर मामले में जनसुनवाई के फरमान का ग्रेसिम ने उड़ाया मखौल" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/right-to-information.jpg 1500w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/right-to-information-300x180.jpg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/right-to-information-1024x614.jpg 1024w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/right-to-information-768x461.jpg 768w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/right-to-information-696x418.jpg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/right-to-information-1068x641.jpg 1068w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/right-to-information-700x420.jpg 700w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/right-to-information-313x188.jpg 313w" sizes="auto, (max-width: 1500px) 100vw, 1500px" title="मौत का मुहाना - राख के ढेर मामले में जनसुनवाई के फरमान का ग्रेसिम ने उड़ाया मखौल 20"><p>नागदा। शिवराज सरकार प्रदेश में भले अच्छा कार्य करें ,लेकिन धरातल पर जनसुनवाई जैसी योजना का क्या हश्र हो रहा है, उससे सरकार की छवि पर क्या प्रभाव पड़ सकता है, उस सच का आईना एक सूचना अधिकार में सामने आया है।जाहिर हैकि समूचे प्रदेश में शासन की एक योजना के तहत प्रत्येक मंगलवार जन सुनवाई होती है, जनता अपनी फरियाद लेकर आती और उनकी मुराद को त्वरित निपटाने का प्रशासन दावा भी भरता है। लेकिन नागदा जैसे शहर में जनसुनवाई कार्यक्रम में लगभग आधा दर्जन आवेदन की मांग पर प्रशासन की कार्रवाई तो दूर कार्यवाही के लिए प्रशासन के फरमान को रसूखदार हवा भी कर देते हैं । प्रशासन बेबस हो जाता।  लोगों की जान का दुश्मन बनी एक जोखिम के प्रति प्रशासन कितना सजग है, उसकी प्रमाणिक पोल महज 24 घंटे में सूचना अधिकार के एक आवेदन ने उजागर की है।</p>
<p><strong>मामला-लील गई थी जिदंगी</strong><br />
औधोगिक नगर नागदा जिला उज्जैन में मुक्तेश्वर महादेव मंदिर के पास ग्रेसिम के अपशिष्ट पदार्थ राख की पहाड़नुमा आकृति के धंसने से गत 23 जनवरी को एक मजदूर अजय चंद्रवंशी पिता भारत उम्र 22 वर्ष निवासी गांव गिंदवानियां दब कर मौत का शिकार हुआ। घटना के बाद शहर के कई जागरूक लोगों ने एसडीओ राजस्व की जनसुनवाई में प्रकरण उठाया। जिसमे ग्रेसिम प्रबंधन के खिलाफ अपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग शामिल थी। साथ ही राख का ढेर ग्रेसिम प्रबंधन ने किसकी अनुमति से संचय किया था, आदि प्रमुख बाते थी । सरकारी भूमि पर राख एकत्रित कर अतिक्रमण का मसला भी था। एसडीओं के निर्देश पर मौजा पटवारी ने जो जांच रिपोर्ट सौंपी उसने प्रशासन के सारे तंत्र और जनप्रतिनिधियों का चिढा कर रख दिया। यह रिपोर्ट 14 फरवरी को एसडीओ राजस्व के हाथों में पहुंचीै।</p>
<p>इस रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि राख का यह ढेर ग्रेसिम का है। जिस पर जोखिम अभी मंडरा रही है। भविष्य में और भी दुर्घटना का खतरा है। पटवारी की इस रिपोर्ट के बाद शिकायतों का संदर्भ देकर, एसडीओं ने ग्रेसिम प्रबंधन के नाम एक पत्र भेजकर ग्रेसिम प्रबंधन से तीन दिनों ंमें राख के ढेर को लेकर क्या कार्य योजना थी, जानकारी मांगी तो ग्रेसिम प्रबंधन ने उसका मखौल उड़ा दिया। एसडीओ राजस्व आशुतोष गोस्वामी ने अपने हस्ताक्षर से 10 फरवरी 2023 को ग्रेसिम प्रबंधन के नाम पत्र जारी किया। इसमें तीन दिन की समय अवधि में जानकारी प्रस्तुत करने की हिदायत थी। एसडीओ (राजस्व) के इस निर्देशित पत्र का यह हश्र हुआ कि तीन दिन के बजाय 13 दिन गुजर गए उसके बाद भी ग्रेसिम प्रबंधन ने डिप्टी कलेक्टर जैसे पद पर आसीन अधिकारी के निर्देश को हवा में उड़ा दिया। उसके बाद अब प्रशासन बेबस हैै। ग्रेसिम प्रबंधन ने 23 जनवरी 2023 की शाम तक निर्देश का पालन तक नहीं किया वह भी एक संवेदनशील मामले में। मजेदार बात यह हैकि जोखिम से लबरेज यह राख का ढेर आज भी सीना ताने खड़ा है। प्रशासन ने इस जोखिम को हटाने के लिए आज तक कोई कार्यवाही नहीं की है। संभव और किसी अप्रिय घटना का इंतजार है। प्रशासन इतना बेबस हैकि इस मामले में ग्रेसिम को इस ढेर को हटाने के लिए नोटिस तक नहीं भेजा है। जबकि पटवारी ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा कर दिया हैकि यह ग्रेसिम की राख का ढेर है। और अब भी दुर्घटना की संभावना है। जनसुनवाई में आए आवेदनों में भी इसी प्रकार की मांग उठी थी। इसे हटाने की कोई कार्यवाही तो दूर नोटिस तक नहीं दिया गया। जबकि यह राख का ढेर शासकीय भूमि पर है।</p>
<p>यह पूरा मामला इन पंक्तियों के लेखक के एक विशेष सूचना अधिकार में उजागर हुआ। जो भी तथ्य लिखे जा रहे उसके प्रमाणित प्रमाण सुरक्षित है। यह एक ऐसा सूचना अधिकार आवेदन था, जिसमें किसी के जीवन एवं स्वतंत्रता से जुड़ी जानकारियों को अधिनियम की धारा 7(1) में मात्र 48 घंटे में प्रदान करने का प्रावधान है। पटवारी की उस जांच रिपोर्ट को संलग्न कर सूचना अधिकार आवेदन में यह बताया थाकि इस रिपोर्ट में राख का यह ढेर अभी भी जनता की जान का खतरा बना हुआ है। इस पर कार्यवाही की जानकारियां 4 बिंदु में मांगी गई थी।</p>
<p><strong>40 मिनट में जानकारी पर हस्ताक्षर</strong><br />
पटवारी रिपोर्ट को आधार बना कर 22 फरवरी 2023 को सूचना अधिकार आवेदन एसडीओ राजस्व कार्यालय में एक बजकर 20 मिनट पर आवेदन प्रस्तुत किया गया। इस सूचना अधिकार की इतनी ताकत थीकि जो ग्रेसिम प्रबंधन 3 दिन के एवज में 13 दिनों बाद भी प्रशासन के एक उच्च अधिकारी के निर्देश को तव्वजो नहीं दे रहा था,  लेकिन इस आवेदन के मिलते ही महज 40 मिनट में बतौर लोकसूचना अधिकारी ठीक 2 बजे जानकारियां के दस्तावेजों पर जानकारियों पर हस्ताक्षर कर दिए। जिस पर बकायदा अधिकारी आशुतोष गोस्वामी ने हस्ताक्षर का समय भी 2 बजे दिनांक 23 फरवरी को अंकित किया। इस जानकारी को दूसरे दिन एक विशेष मेंसेजर की माध्यम से आवेदक को घर बैठे दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।</p>
<p><strong>प्रदूषण विभाग ने भी नहीं दी तवज्जो</strong><br />
विडंबना हैकि एक और जहां ग्रेसिम प्रबंधन की इस संवदेनशील प्रकरण में कोई जूं तक नही रेंगी, उधर प्रदूषण विभाग ने भी एक माह के बाद भी प्रतिवेदन नही सौंपा। जबकि 25 जनवरी को पत्र जारी कर इस घटना से संबधित कार्यवाही जांच प्रतिवेदन एसडीओं ने मांगा था।यह हास्यास्पद बात हैकि किसी की जान को जोखिम में डालने वाले राख के ढेर के मालिक पर सीघे कार्यवाही करने का अधिकार प्रशासन को है लेकिन यहा पर प्रदूषण विभाग के पाले में गेद डालकर प्रकरण को लंबित करने का प्रयास किया गया। जबकि जनसुनवाई में त्वरित एवं एक समय सीमा में शिकायतों का निराकरण करने का प्रावधान है।</p>
<p><strong>इनकी फरियाद के प्रमाण</strong><br />
इस सूचना अधिकार में यह बात भी सामने आई कि जो मौत की घटना हुई थी उसको लेकर एसडीओं राजस्व की जनसुनवाई में आप पार्टी के नेता सुबोध स्वामी, नागरिक अधिकार मंच के अभय चोपड़ा  अखिल भारतीय श्री बलाई महासंघ के अध्यक्ष ओमप्रकाश परमार, भीम आर्मी पार्टी आजाद समाज पार्टी की और से मामला उठाया गया था। जिसका संदर्भ सूचना अधिकार के मिले इन दस्तावेजों में सामने आया है।</p>
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		<title>आरटीआई में खुली पोल- बिड़ला उद्योग में श्रमायुक्त की अनुमति आदेश के 15 दिन पहले मजदूरों को ले- आफ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[कैलाश सनोलिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Feb 2023 16:32:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चर्चा]]></category>
		<category><![CDATA[भारत]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="548" height="314" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/12/Bidla-nagda.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="हास्यास्पद - भाजपा नहीं करेगी ले- ऑफ बर्दाश्त पर मजदूरों के गले नहीं उतरी रही यह नौटंकी! पढिए नागदा से कैलाश सनोलिया की खास रिपोर्ट।" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/12/Bidla-nagda.jpg 548w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/12/Bidla-nagda-300x172.jpg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/12/Bidla-nagda-313x179.jpg 313w" sizes="auto, (max-width: 548px) 100vw, 548px" title="आरटीआई में खुली पोल- बिड़ला उद्योग में श्रमायुक्त की अनुमति आदेश के 15 दिन पहले मजदूरों को ले- आफ 21">नागदा 1 फरवरी। मप्र के उज्जैन जिलें में स्थित बिड़ला घराना के ग्रेसिम उद्योग में श्रमायुक्त के अनुमति आदेश के 15 दिनों पहले मजदूरों को ले-आॅफ देने का मामला सामने आया है। श्रमायुक्त डाॅ वीरेंद्रसिंह रावत ने 15 दिसंबर 2022 को ग्रेसिम में ले-आॅफ का आदेश दिया जबकि प्रबंधन ने 1 दिसंबर 2022 से ही [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="548" height="314" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/12/Bidla-nagda.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="हास्यास्पद - भाजपा नहीं करेगी ले- ऑफ बर्दाश्त पर मजदूरों के गले नहीं उतरी रही यह नौटंकी! पढिए नागदा से कैलाश सनोलिया की खास रिपोर्ट।" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/12/Bidla-nagda.jpg 548w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/12/Bidla-nagda-300x172.jpg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/12/Bidla-nagda-313x179.jpg 313w" sizes="auto, (max-width: 548px) 100vw, 548px" title="आरटीआई में खुली पोल- बिड़ला उद्योग में श्रमायुक्त की अनुमति आदेश के 15 दिन पहले मजदूरों को ले- आफ 22">



<p>नागदा 1 फरवरी। मप्र के उज्जैन जिलें में स्थित बिड़ला घराना के ग्रेसिम उद्योग में श्रमायुक्त के अनुमति आदेश के 15 दिनों पहले मजदूरों को ले-आॅफ देने का मामला सामने आया है। श्रमायुक्त डाॅ वीरेंद्रसिंह रावत ने 15 दिसंबर 2022 को ग्रेसिम में ले-आॅफ का आदेश दिया जबकि प्रबंधन ने 1 दिसंबर 2022 से ही ले आॅफ देना शुरू कर दिया। यह भी बडी बात&nbsp; सामने आई कि जहां भाजपा एवं कांग्रेस संगठन इस ले आॅफ का जहां विरोध करते&nbsp; नजर आए, लेकिन मजेदार बात यह हैकि इन दोनों संगठनों की विचारधारा के श्रम संगठन बीएएमएस एवं इंटक समेत अन्य श्रम संगठनों ने 29 नवंबर 2022 को ही ग्रेसिम प्रबंधन से इस मामले में एक गुपचुप समझौता कर लिया था। उक्त दोनों तथ्यों का राज एक सूचना अधिकार में सामने आया है। आरटीआई कार्यकर्ता मोहम्मद रंगरेज निवासी नागदा के सूचना के अधिकार पर यह पूरा प्रकरण उजागर हुआ है।</p>



<p>सूचना अधिकार में श्रमायुक्त इंदौर के आदेश की प्रमाणित प्रतिलिपि सामने आई है। यह आदेश 15 दिसंबर  2022 को दिया है। श्रमायुक्त के आदेश की प्रति हिंदुस्थान समाचार संवाददाता के पास सुरक्षित है। उधर, ये प्रमाण भी सुरक्षित हैकि ग्रेसिम प्रबंधन ने इस निर्णय के पहल 1 दिसंबर 2022 सें मजदूरों को ले आॅफ दे दिया गया। जोकि 28 जनवरी 2023 को समाप्त किया गया।</p>



<p>श्रमायुक्त के आदेश निर्णय में यह स्पष्ट  लिखा हैकि दोनों  पक्ष (ग्रेसिम प्रबंधन एवं श्रम संगठन) से सुनवाई के बाद ग्रेसिम उद्योग में प्रतिदिन रोटेशन के आधार पर 1426 श्रमिकों में से 260 मजदूरों को ले-आॅफ की अनुमति दी जाती है।  हालांकि ग्रेसिम प्रबंधन ने यह ले आॅफ हाल में 28 जनवरी 2023 से एक नोटिस चस्पा कर समाप्त भी कर दिया है। कुल लगभग 58 दिनों तक यह ले आफ चला। लेकिन बडा मामला यह हैकि श्रमायुक्त के निर्णय के 15 दिन पहले ही मजदूरों को ले आॅफ दे दिया गया।</p>



<p>क्या बोले मजदूर नेता एंव अधिवक्ता</p>



<p>जाने-माने मजदूर नेता एवं वरिष्ठ सुप्रीम कोर्ट अभिभाषक सत्यनारायण पुरोहित से संपर्क करने पर उन्होंने दूरभाष पर हिंदुस्थान समाचार संवाददाता से बातचीत में बताया श्रमायुक्त के आदेश के 15 दिन पहले ग्रेसिम के मजदूरों को ले आॅफ देना अवैधानक है। प्रबंधन का निर्णय विधि सम्मत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा प्रबंधन का यह निर्णय जन्म से ही अवैध है। मजदूरों को ले आॅफ दिया गया उनको&nbsp; पैसा प्राप्त करने का अधिकार है।</p>



<p>प्रबंधन ने 30 नवंबर 2022 को आवेदन पेश किया श्रमायुक्त के निर्णय में उल्लेख हैकि ग्रेसिम इंडस्टीज लिमिटेड स्टेपल फाईबर डिवीजन बिड़ला ग्राम नागदा द्धारा औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 25-एम सहपठित मप्र औघेगिक विवाद अधिनियम नियम 1957 के नियम 75-बी के अ्रर्तगत कारखाना में नियोजित 1456 श्रमिकों में से अधिकतम  260 श्रमिकों को रोटेशन के आधार पर ले आफ के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया। यह आवेदन 30 नवंबर 2022 को श्रमायुक्त कार्यालय इंदौर में प्रस्तुत करने का उल्लेख है। इस आवेदन के साथ में उद्योग में कार्यरत श्रमसंगठनों से 29 नंवबर 2022 को सहमति लेने लेने की प्रति भी इसी कार्यालय में प्रस्तुत की गई।</p>



<p>श्रमायुक्त की सूचना के पहले ले आॅफ श्रमायुक्त ने अपने निर्णय में यह भी लिखा हैकि ले- आॅफ मामले में सूनवाई के लिए सूचना पत्र 8 दिसंबर 2022 को जारी किया गया। गौरतलब है कि यह सूचना पत्र दोनों पक्षों को सुनने के लिए जारी किया गया। यहां पर यह गौर करने लायक बात हैकि श्रमायुक्त पक्ष सुनने के लिए सूचना पत्र जारी कर रहे है औेर यहां तो 1 दिसंबर 2022 से ही मजदूरों को घर बैठाना शुरू कर दिया गया। मजेदार बात यह है कि श्रमायुक्त कार्यालय से यह सूचना प़त्र संबधितों को सूनने के लिए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत व औधोगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा एम( 4)के अनुसार प्रभावित होने वाले श्रमिकों व श्रम प्रतिनिधियों को सुनवाई का अवसर देने के लिए जारी करने का उल्लेख है।</p>



<p>श्रमायुक्त कार्यालय में सुनवाई यहां पर गौर करने लायक बात हैकि इधर मजदूर ले आफ की चपेट में 1 दिसंबर से थें और उद्यर 14 दिसंबर 2022 को सुनवाई श्रमायुक्त के समक्ष हुई। जैसा कि निर्णय में लिखा हैकि प्रभावित मजदूरों, श्रमसंगठनां एवं प्रबंधन को सुनना आवश्यक है। इस सुनवाई में प्रभावित मजदूर की और से कोई नहीं पहुँचा। जबकि निर्णय में तीन किरदार प्रबंधन,  श्रमसंगठन एवं मजदूरों का उल्लेख है। श्रमायुक्त के जारी दिनांक 8 दिसंबर 2022 के सूचना प़त्र पर 14 दिसंबर को सुनवाई हुई।</p>



<p>महावीर जैन समेत प्रबंधन के अधिकारी श्रमायुक्त के समक्ष  जो 14 दिसंबर 2022 को सुनवाई हुई इसमें ग्रेसिम के सीनियर वाईस प्रेसीडेंट (कामर्शियल एवं फायनेंस ) महावीर जैन, वाइस प्रेसीडेंट( एचआरएम) एसके सिंह एवं अस्टिेंड वाइस प्रेसीडेंट (आय आर) विनोद कुमार मिश्रा की उपस्थिति का जिक्र आदेश में है। इसी प्रकार से श्रम संगठनों की और भारतीय मजदूर संघ के नेता अशोक गुर्जर, जोधसिंह राठौड़, तथा अन्य श्रमसंगठनों की और से जागेश्वर शर्मा, सुजानसिंह ठाकुर, जगमालसिंह राठौर ,राजेंद्र अवाना, मठिकंठन नायर, एवं मदन जाट की उपस्थिति का उल्लेख है।</p>



<p>23 करोड का घाटा प्रतिमाह</p>



<p>श्रमायुक्त के निर्णय में यह भी लिखा हैकि  प्रबंधन ने अपने आवेदन में यह लिखा हैकि वैश्विक मंदी के कारण ग्रेसिम के उत्पादन विस्कोंस फाइबर का विक्रय नहीं हो पा रहा है। इय कारण ग्रेसिम को प्रतिमाह 23 करोड़ का घाटा हो रहा है। इस मंदी से निपटने के लिए प्रबंधन ने पहले श्रमसंगठनों से परस्पर चर्चा की। इस चर्चा में जोघसिंह राठौर, अशोक गुर्जर समेत अन्य श्रमसंगठनों ने उद्योग की इस प्रकार की स्थिति से उबारने के लिए समाधान तलाशने का प्रयास किया। यह भी लिखा है कि श्रम संगठनों ने उद्योग की इस प्रकार की स्थिति से उभरने के लिए सामुहिक प्रयास की बात की। जिसके तहत 29 नवंबर 2022 को एक समझौता श्रम संगठनों नंे किया। जिसमें इस बात पर सहमति जताई कि  1426 श्रमिकों में से 260 मजदूरों को प्रतिदिन ले आफॅ दिया जाए।</p>
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