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	<title>भ्रष्टाचार &#8211; The Harishchandra &#8211; Hindi</title>
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		<title>काले धन को ठिकाने लगाने का इससे बेहतर विकल्प क्या हो सकता है?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[सी एम जैन]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 06 Jun 2023 10:49:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[भ्रष्टाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="1024" height="660" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/06/Arham-Industrial-Park-Valsad.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="काले धन को ठिकाने लगाने का इससे बेहतर विकल्प क्या हो सकता है?" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/06/Arham-Industrial-Park-Valsad.jpg 1024w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/06/Arham-Industrial-Park-Valsad-300x193.jpg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/06/Arham-Industrial-Park-Valsad-768x495.jpg 768w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/06/Arham-Industrial-Park-Valsad-696x449.jpg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/06/Arham-Industrial-Park-Valsad-652x420.jpg 652w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/06/Arham-Industrial-Park-Valsad-313x202.jpg 313w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" title="काले धन को ठिकाने लगाने का इससे बेहतर विकल्प क्या हो सकता है? 1">भारत में रियल एस्टेट का कारोबार एक ऐसा कारोबार बनता जा रहा है जहां आसानी से कोई भी सरकार को चुना लगाकर अपना काला धन ठिकाने लगा सकता है। रियल एस्टेट कारोबार में जिस तरह की अनियमितताएँ, काले-धन कि लेनदेन और टैक्स चोरी देखने को मिल रही है उसे देखकर तो यही लगता है की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="1024" height="660" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/06/Arham-Industrial-Park-Valsad.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="काले धन को ठिकाने लगाने का इससे बेहतर विकल्प क्या हो सकता है?" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/06/Arham-Industrial-Park-Valsad.jpg 1024w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/06/Arham-Industrial-Park-Valsad-300x193.jpg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/06/Arham-Industrial-Park-Valsad-768x495.jpg 768w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/06/Arham-Industrial-Park-Valsad-696x449.jpg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/06/Arham-Industrial-Park-Valsad-652x420.jpg 652w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/06/Arham-Industrial-Park-Valsad-313x202.jpg 313w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" title="काले धन को ठिकाने लगाने का इससे बेहतर विकल्प क्या हो सकता है? 2">


<p>भारत में रियल एस्टेट का कारोबार एक ऐसा कारोबार बनता जा रहा है जहां आसानी से कोई भी सरकार को चुना लगाकर अपना काला धन ठिकाने लगा सकता है। रियल एस्टेट कारोबार में जिस तरह की अनियमितताएँ, काले-धन कि लेनदेन और टैक्स चोरी देखने को मिल रही है उसे देखकर तो यही लगता है की प्रशासनिक अधिकारी अपना काम ठीक तरह से नहीं कर रहे है।</p>
<p>गुजरात के वलसाड जिले में निर्माणाधीन प्रोजेक्ट <a href="https://drive.google.com/file/d/1m58eDXajJJfShLrfglxZwlNs6kTMEeDr/view" rel="nofollow noopener" target="_blank">Arham Industrial Park</a> के बिल्डर द्वारा, मात्र एक दुकान कि बिक्री कीमत से संबन्धित दी गई जानकारी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि रियल एस्टेट कारोबार किस तरह काला धन हजम करने का हाजमोला बनता जा रहा है। बिल्डर एक दुकान कि बिक्री कीमत 30 लाख बता रहा है और कह रहा है कि 30 लाख कि दुकान खरीदने के लिए 17 लाख का काला धन देना पड़ेगा, यानि मात्र 13 लाख का पंजीकरण दिखाया जाएगा और 13 लाख पर ही स्टेम्प ड्यूटी और जीएसटी चुकाया जाएगा।</p>
<p>प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त प्रोजेक्ट में कई दुकाने और उधोगिक गाले है, रेरा रजिस्ट्रेशन संख्या PR/GJ/VALSAD/PARDI/Others/CAA05677/090719 के अनुसार उक्त एक प्रोजेक्ट में कुल 344 यूनिट है। अब एक यूनिट का हिसाब सबके सामने है तो 344 यूनिट का हिसाब लगाना आयकर विभाग के लिए मुश्किल नहीं होगा, बशर्ते वह ईमानदार हो। ऐसा इस लिए कहां जा रहा है क्यों कि इससे पहले गुजरात के वलसाड जिले में निर्माणाधीन रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में काले धन के निवेश को लेकर बड़े खुलासे हो चुके है जिन पर अब तक कोई कार्यवाही देखने को नहीं मिली।</p>
<p><strong>दिनांक : <a href="https://theharishchandra.com/hindi/there-is-also-a-shop-in-the-market-of-india-it-is-in-gujarat-and-the-hard-earned-money-of-the-people-is-being-belched/">30 जनवरी 2023</a></strong> &#8211; Sunrise Avenue – 2, उक्त प्रोजेक्ट में एक दुकान जिसका क्षेत्रफल 871/- स्क्वेयर फिट है, उसे प्रति स्क्वेयर फिट 11500/- रुपये के हिसाब से बिल्डर बेच रहा है जिस हिसाब से एक दुकान कि कीमत हुई 10016500/- रुपये। परंतु बिल्डर उक्त दुकान का पंजीकरण, दस्तावेज़, केवल और केवल 3100 रुपये प्रति स्क्वेयर फिट के हिसाब से ही करेगा, केवल इतनी रकम ही सरकार को बताई जाएगी यानि कि मात्र 2700100/- रुपये, यानि सरकार को बताई गई रकम से तीन गुना से भी ज्यादा काला धन, 7316400/- एक दुकान में।</p>
<p><strong>पूरी खबर पढ़ने के लिए <a href="https://theharishchandra.com/hindi/there-is-also-a-shop-in-the-market-of-india-it-is-in-gujarat-and-the-hard-earned-money-of-the-people-is-being-belched/">Link</a> पर क्लिक करें। </strong></p>
<p><strong>दिनांक : <a href="https://theharishchandra.com/hindi/exclusive-black-money-is-here-but-where-are-the-honest-officers-of-the-income-tax-department-mr-mr-mrs/">18 फरवरी 2023</a> &#8211;</strong> INFINITY INDUSTRIAL PARK में बिल्डर 13500 रुपये प्रति स्क्वायर फीट के हिसाब से प्रॉपर्टी बेच रहा है जबकि प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन मात्र 4500 रुपये प्रति स्क्वायर फीट करने को कह रहा है यानि सीधे सीधे 9000 रुपये प्रति स्क्वायर फीट ब्लेक मनी लेकर, 9000 हजार रुपये प्रति स्क्वायर फीट पर 6 फीसदी स्टाम्प और 12 फीसदी जीएसटी चोरी के साथ साथ आयकर को भी करोड़ो का चुना लगा रहा है।</p>
<p><strong>पूरी खबर पढ़ने के लिए <a href="https://theharishchandra.com/hindi/exclusive-black-money-is-here-but-where-are-the-honest-officers-of-the-income-tax-department-mr-mr-mrs/">Link</a> पर क्लिक करें।</strong></p>
<p>दिनांक 30 जनवरी 2023 तथा दिनांक 18 फरवरी 2023 को प्रकाशित दोनों खबरों कि जानकारी आयकर विभाग के अधिकारियों को ई-मेल के माध्यम से 1 मार्च 2023 को दी गई थी, जिस पर आज तक किसी प्रकार कि कोई कार्यवाही देखने को नहीं मिली। फिलवक्त अब जो नई जानकारी सामने आई है उसे देखने के बाद भी यदि आयकर विभाग हरकत में नहीं आती तो इसका मतलब वही निकलेगा जो जनता रोज़मर्रा कि भाषा में कहती है कि सब मिले हुए है।</p>
<p><a href="https://drive.google.com/file/d/1JjxmoW2kfhYUzQ2x4Tmb50BH993xTXyJ/view" target="_blank" rel="nofollow noopener"><strong>(कुल </strong><strong>222 </strong><strong>प्रोजेक्टों की लिस्ट देखना चाहे तो यहां</strong><strong> क्लिक कर लिस्ट देख सकते है)</strong></a></p>
<p>आपको याद होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 76वें स्वतंत्रता दिवस पर भ्रष्टाचार खिलाफ निर्णायक लड़ाई छेड़ने का आह्वान किया था। पीएम ने कहा, “हमें पूरी ताकत से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ना है। जब तक भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारी के प्रति नफरत का भाव पैदा नहीं होता या सामाजिक रूप से उसे नीचा देखने के लिए मजबूर नहीं किया जाता, तब तक यह मानसिकता खत्म नहीं होने वाली है।“ समय रहते आयकर विभाग के अधिकारियों को एक बार इस भाषण के साथ साथ-साथ पीएम मोदी द्वारा विज्ञान भवन में केंद्रीय जांच ब्यूरो के हीरक जयंती समारोह में दिए गए भाषण को भी अच्छी तरह सुनना चाहिए, हो सकता है कि यह दोनों भाषण सुनकर ही अधिकारियों का जमीर जाग जाए। बाकी जनता देख रही है, समझ भी रही है, पर हर बार सिर्फ से वोट से अपना फ़ैसला सुनना नाकाफी है, खासकर ऐसे दौर में जहां पत्रकार कम और चाटुकार अधिक हो, जनता कि आवाज कम और नेताओं कि आवाज अधिक हो सबसे तेज और विश्वसनीय बनने के दावों में जनहित अंतिम पायदान पर धकेला जा रहा हो।</p>
<p>कुल मिलकर यह कह सकते है की रियल एस्टेट क्षेत्र में अनियमितताओं, काले धन की लेन-देन, और टैक्स चोरी जैसी समस्याएं एक गंभीर मुद्दा है और इसे संभावित रूप से नियंत्रित करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को सख्ती से काम करना होगा। जब तक कानूनी प्रक्रिया और नियमों का पालन नहीं होगा और उच्चतम ईमानदारी के मानकों की पालना नहीं होगी, तब तक इस समस्या का समाधान होना फिलवक्त काफी मुश्किल दिखाई देता है।</p>
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		<title>राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया, सभी आरोप निराधार : हरीश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[राजकुमार सिंह परिहार]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 May 2023 06:15:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[भ्रष्टाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="1600" height="720" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230506-WA0000.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया, सभी आरोप निराधार : हरीश" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230506-WA0000.jpg 1600w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230506-WA0000-300x135.jpg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230506-WA0000-1024x461.jpg 1024w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230506-WA0000-768x346.jpg 768w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230506-WA0000-1536x691.jpg 1536w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230506-WA0000-696x313.jpg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230506-WA0000-1068x481.jpg 1068w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230506-WA0000-933x420.jpg 933w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230506-WA0000-313x141.jpg 313w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" title="राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया, सभी आरोप निराधार : हरीश 3">पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष व निष्काषित सदस्य हरीश ऐठानी ने कहा कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया है। अगर वित्तीय अनियमितता थी तो मुक़दमा क्यूँ नहीं दर्ज किया गया। क्यूँकि वित्तीय मामले को इस आदेश में खोला नही गया है। उन पर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। कुमंविनि पर्यटन आवास गृह में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="1600" height="720" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230506-WA0000.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया, सभी आरोप निराधार : हरीश" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230506-WA0000.jpg 1600w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230506-WA0000-300x135.jpg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230506-WA0000-1024x461.jpg 1024w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230506-WA0000-768x346.jpg 768w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230506-WA0000-1536x691.jpg 1536w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230506-WA0000-696x313.jpg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230506-WA0000-1068x481.jpg 1068w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230506-WA0000-933x420.jpg 933w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/05/IMG-20230506-WA0000-313x141.jpg 313w" sizes="auto, (max-width: 1600px) 100vw, 1600px" title="राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया, सभी आरोप निराधार : हरीश 4">


<p>पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष व निष्काषित सदस्य हरीश ऐठानी ने कहा कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया है। अगर वित्तीय अनियमितता थी तो मुक़दमा क्यूँ नहीं दर्ज किया गया। क्यूँकि वित्तीय मामले को इस आदेश में खोला नही गया है। उन पर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं।</p>
<p>कुमंविनि पर्यटन आवास गृह में शुक्रवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में हरीश ऐठानी ने कहा कि जिन बिंदुओं पर आरोप लगाए गए उन सभी कार्यों में अभियंता, अपर मुख्य अधिकारी व वित्त नियंत्रक की अनुमति से भुगतान हुआ है। उन्होंने बताया कि इस सम्बंध में आज सुबह 9:13 मिनट पर मुझे मेरे आवास पर यह आदेश पत्र प्राप्त हुआ। पहले तो शिकायतों की लिस्ट दो दर्जन से अधिक आरोपों के साथ थी, परन्तु वर्तमान समय में महज़ पांच-छै बिंदुओं पर आकर सिमट गयी है। उन्होंने कहा कि विशेष निविदा समिति में तय होने के बाद जिपं अध्यक्ष की संस्तुति होती है, जबकि जिपं के होटल में सुधार के लिए सबकी सहमति से आवंटन हुआ। अब यदि एक ही ठेकेदार को इस पर ठेका मिलता है तो यह क्या अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी है, यदि उस ठेकेदार को निर्धारित मूल्य से अधिक का भुगतान हुआ है तो बताए। जिला पंचायत में मेरे कार्यकाल की जांच करने की शिकायत करने वाले कथित राजनीतिक व्यक्ति शेर सिंह गढि़या शायद यह नही जानते होंगे की जिला पंचायत में दर्ज ठेकेदार ही यहां की निविदाओं में प्रतिभाग कर सकता है अन्य नही। वैसे भी यह मामला जिला पंचायत प्रशासन की प्रशासनिक इकाई से सम्बंधित है। क्यूँकि इन सबके लिए यहां अलग से निर्माण व भुगतान समितियों का प्रावधान है।</p>
<p>रातिरकेटी में शिक्षक नियुक्ति में भी लगाए गए आरोप निराधार हैं। शिक्षकों की कमी दूर करना अभिवावकों की मंशा अनरूप शिक्षण व्यवस्था में सुधार हुआ। यह कार्य भी वित्तीय परामर्श की सहमति के बाद सम्पन्न हुआ। इस पर यदि कोई शंका है तो क्षेत्र में घर-घर जाकर उस विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों के अभिभावकों से निवेदन कर चंदा एकत्र कर इसकी भरपाई करने को तैयार हूँ। उन्होंने कहा कि खड़िया और अन्य मालवाहक ट्रकों के वजन तोलने के लिए खुले धर्मकांटे से जिपं की आय में बढ़ोत्तरी हुई, हालांकि अब उसे बंद कर दिया गया है। भूमि चयन अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र का मामला नही है यह सब अपर मुख्य अधिकारी की निगरानी में किया जाता है। बताया कि उनके खिलाफ सिर्फ राजनैतिक द्वेष भावना से जांच की गई है। जबकि वह कहते हैं कि इस पत्र में शिकायतकर्ता द्वारा की गई शिकायत को ही गलत तरीक़े से किया गया है यह सम्बंधित विभाग मानता है, फिर भी बिना धन की हानि के वित्तीय अनियमितता का दण्ड आपके सामने है। अपने उपर लगे आरोपों को निराधार बताने हुए उन्होंने कहा कि सरकार के फैसले के खिलाफ व न्यायालय में जाएंगे। जनता ने उन्हें जिताया है। उनकी छवि खराब करने वालों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी। संवैधानिक तरीके से आगे की लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि धारा109 की उपखंड की धाराओं में मेरी आख्या को नहीं सुना जाना इसका प्रमाण है कि उन्हें साजिश के तहत फसाया गया है।</p>
<p>पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा ने इस पूरे मामले को राजनीति से प्रेरित बताया। पहले चमोली जिपं की वित्तीय शक्ति रोकने उसके बाद न्यायालय से जीत मिलने पर सरकार को मुँह की खानी पड़ी यह मामला भी ठीक वैसा ही है। पूर्व जिपं अध्यक्ष द्वारा जनहित के लिए गए निर्णय से आम जनता को लाभ हुआ है। कांग्रेस व्यक्ति विशेष आधार पर इसे विपक्ष के तौर पर मुद्दा बनाएगी, लोकतंत्र की हत्या करने वाली सरकार के विरुद्ध प्रदेश स्तर पर इसके खिलाफ सड़क से सदन तक आंदोलन चलाया जाएगा।</p>
<p>पूर्व विधायक ललित फ़र्स्वाण ने इस पूरे प्रकरण की निंदा करते हुए सरकार का विरोध जताया है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक शक्तियों का उल्लंघन बताते हुए राजनीतिक हत्या करार दिया है। सरकार के प्रतिनिधि अपनी शाख़ को बचाने के लिए इस तरह का आदेश निंदनीय है।</p>
<p>वहीं पूर्व जिला पंचायत के सदस्य व वर्तमान में कांग्रेस जिला अध्यक्ष भगवत डसीला बताते हैं कि यह पंचायतों में कांग्रेस को कमजोर करने की एक साज़िश है जिसे जनता किसी भी सुरत में इन्हें माफ़ नही करेगी। उन्होंने कहा कि मैं उस समय उसी सदन का सदस्य था मेरे द्वारा ही यह प्रस्ताव सदन में रखा गया था कि जिला पंचायत अपनी आय बढ़ाने के लिए एक धरमकाँटा लगाया जाए क्यूँकि तब मैं उस सदन की निर्माण समिति का भी सदस्य था। हमारे जनपद से उपखनिज जाता है एक दिन में लगभग 250 से 300 गाड़ियाँ। परन्तु इस मामले को प्रशासनिक स्तर के अधिकारियों ने कोई सहयोग न करने के चलते एक आदेश पारित किया गया कि ट्रकों की माप हल्द्वानी जाकर की जाए, यह कहां तक न्यायसंगत है। यह पूरा घटनाक्रम बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। जो जनप्रतिनिधि बनकर आता है उसका काम क्या है? क्या वह ज़िम्मेदार है कि धरातल पर काम हुआ है या नही? तो प्रशासनिक ढाँचे की आवश्यकता क्या है? उसे बंद कर देना चाहिए। ऐसा क्यों कि केवल कांग्रेस समर्पित जिला पंचायतों में ही आरोप लग रहे हैं? बेहद चिंताजनक विषय है। देश में जिस तरह राहुल गांधी की सदस्यता रद्द की गयी वैसे ही प्रदेश में हमारे पूर्व अध्यक्ष की  सदस्यता रद्द हुई है। इससे कहीं न कहीं आपकी राजनीतिक प्रतिष्ठा बड़ी है। यह अपने आप में बहुत बड़ा संदेश है।</p>
<p>वहीं जिला पंचायत सदस्य गोपा धपोला कहती हैं कि यह एक राजनीतिक षड्यंत्र के तहत की गई कार्यवाही है। हमने 74 दिन का आंदोलन वर्तमान अध्यक्ष के कार्यकाल में किया है इसका तो इस सरकार से कोई जवाब देता अभी तक नही बन रहा है। हमारे क्षेत्र के विकास को आवंटित बजट की बंदरबाँट इस सरकार को दिखती नही है। कहते हैं कि जब सरकार अध्यक्ष को इस पूरे प्रकरण में दोषी मान रही है तो उस वक्त के अधिकारियों को कैसे दोषी नही माना जा रहा है, यह अपने आप में एक गम्भीर सवाल है। यहीं इस जांच रिपोर्ट में सबसे बड़ी गड़बड़झाला बयान करती है।</p>
<p>वहीं पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष लोकमणी पाठक कहते हैं कि यह केवल ऐठानी का अपमान नही उस निर्वाचित क्षेत्र की जनता का अपमान है, जिन्होंने उन्हें वोट दिया है। यह प्रत्येक कांग्रेस कार्यकर्ता का अपमान है। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर इस कार्यवाही का विरोध जताया।</p>
<p>इस दौरान कपकोट नगर पंचायत अध्यक्ष गोविंद बिष्ट, जिपं सदस्य वंदना ऐठानी, पूजा आर्या, रेखा, इंद्रा परिहार, सुरेश खेतवाल, रंजीत दास, राजेन्द्र टँगड़िया, राजेन्द्र राठौर, कवि जोशी, गोकुल परिहार, प्रकाश, पपू जोशी आदि मौजूद रहे।</p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला:</strong></p>
<p>आपको बताते चलें, कि कपकोट विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के पूर्व विधायक गढि़या की ओर से 29 सितंबर 2017 को 2014-15 में जिला पंचायत में हुई अनियमितताओं की जांच के लिए शासन को पत्र लिखा गया था। पत्र में निर्माण कार्य योजनाओं के लिए निविदा की सामग्री (सीमेंट, सरिया, ईट, जीआई पाइप) की आपूर्ति बिना जिला पंचायत सदन में प्रस्ताव पारित कराए, राज्य वित्त/जिला निधि/पर्यटन विभाग से बिना नियम और निविदा प्रक्रिया किए एक ठेकेदार को कार्य दिए जाने, बिना तकनीकी परीक्षण कराए पुलों/पैदल मार्गों का निर्माण, पीटीए अध्यापकों की नियुक्ति, पिंडारी रोड आरे में धर्मकांटा स्थापित किए जाने, मुख्यमंत्री राहत कोष से विद्यालयों के मरम्मत आदि कार्यों में अनियमितता बरते जाने की शिकायत की गई थी।</p>
<p><strong>डीएम और मंडलायुक्त स्तर पर हुई जांच :</strong></p>
<p>बागेश्वर। पंचायतीराज विभाग के सचिव नितेश कुमार झा की ओर से जारी आदेश पत्र में बताया गया है कि पूर्व विधायक गढि़या के शिकायती पत्र के आधार पर बागेश्वर के तत्कालीन डीएम को मामले की प्रारंभिक जांच सौंपी गई थी। डीएम ने जांच की आख्या कुमाऊं मंडलायुक्त को सौंपी। डीएम की प्रारंभिक जांच और मंडलायुक्त की विस्तृत जांच आख्या में अनियमिताओं की पुष्टि होने पर ऐठानी को कारण बताओ नोटिस दिया गया। ऐठानी ने अपने खिलाफ लग रहे आरोपों के संबंध में कार्यालय जिला पंचायत, अपर मुख्य अधिकारी और अन्य कार्मिकों को उत्तरादायी बताया था। प्रकरण में कुमाऊं आयुक्त की अंतिम जांच आख्या में तत्कालीन जिपं अध्यक्ष/वर्तमान जिपं सदस्य पंचायतीराज अधिनियम की धारा 109 के तहत अपने कर्तव्यों का सम्यक रूप से निर्वहन करते नहीं पाए गए। इसके आधार पर पंचायतीराज सचिव नितेश कुमार झा ने राज्यपाल के निर्देश पर ऐठानी की सदस्यता समाप्त करने का आदेश जारी किया।</p>
<p><strong>अनुराधा पाल, डीएम, बागेश्वर। </strong></p>
<p>राज्यपाल की आज्ञा और पंचायतीराज विभाग के सचिव की ओर से 28 अप्रैल को आदेश पत्र प्राप्त हुआ है। पत्र में जिला पंचायत सदस्य हरीश ऐठानी की सदस्यता को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का आदेश है। आदेश का पालन कराना हमारा काम है और हम इसका पालन करेंगे।</p>
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		<title>धन-बल और बाहुबल का बढता प्रभाव और बौद्धिक वर्ग की संकुचित होती राजनीतिक भूमिका!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[मनोज कुमार सिंह]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 19 Apr 2023 13:33:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[चर्चा]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[समाज]]></category>
		<category><![CDATA[भ्रष्टाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="710" height="432" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/11/images283429.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="सत्य का क्षरण: राजनीतिक समाचारों से जुड़ा कलंक और पत्रकारिता पर इसका प्रभाव" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/11/images283429.jpeg 710w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/11/images283429-300x183.jpeg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/11/images283429-696x423.jpeg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/11/images283429-690x420.jpeg 690w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/11/images283429-313x190.jpeg 313w" sizes="auto, (max-width: 710px) 100vw, 710px" title="धन-बल और बाहुबल का बढता प्रभाव और बौद्धिक वर्ग की संकुचित होती राजनीतिक भूमिका! 5">विश्व में होने वाली विविध क्रांतिओं और समय-समय पर होने वाले सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन और सामाजिक सुधारों की सफलता में उस समाज के बौद्धिक वर्ग की अग्रणी भूमिका रही है। दुनिया में समय-समय पर होने वाले इन समस्त सामाजिक परिवर्तनों,सामाजिक सुधारों और सुप्रसिद्ध क्रांतिओ का कुशलता पूर्वक मार्गदर्शन बौद्धिक वर्ग (चिंतक, विचारक, दार्शनिक, साहित्यकार [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="710" height="432" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/11/images283429.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="सत्य का क्षरण: राजनीतिक समाचारों से जुड़ा कलंक और पत्रकारिता पर इसका प्रभाव" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/11/images283429.jpeg 710w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/11/images283429-300x183.jpeg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/11/images283429-696x423.jpeg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/11/images283429-690x420.jpeg 690w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/11/images283429-313x190.jpeg 313w" sizes="auto, (max-width: 710px) 100vw, 710px" title="धन-बल और बाहुबल का बढता प्रभाव और बौद्धिक वर्ग की संकुचित होती राजनीतिक भूमिका! 6">


<p>विश्व में होने वाली विविध क्रांतिओं और समय-समय पर होने वाले सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन और सामाजिक सुधारों की सफलता में उस समाज के बौद्धिक वर्ग की अग्रणी भूमिका रही है। दुनिया में समय-समय पर होने वाले इन समस्त सामाजिक परिवर्तनों,सामाजिक सुधारों और सुप्रसिद्ध क्रांतिओ का कुशलता पूर्वक मार्गदर्शन बौद्धिक वर्ग (चिंतक, विचारक, दार्शनिक, साहित्यकार इत्यादि) द्वारा ही किया गया और बौद्धिक समुदाय द्वारा ही इन क्रातियों और विविध परिवर्तनो के लिए आवश्यक आधार-भूमि,पृष्ठभूमि और भावभूमि तैयार की गई और बौद्धिक समुदाय के विचारों के फलस्वरूप ही क्रांतिओ और परिवर्तनों के लिए अनुकूल परिस्थितियां निर्मित हुई।</p>
<p>इसके साथ ही साथ इन समस्त सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तनो,सामाजिक सुधारों और क्रांतिओ को मानसिक, मनोवैज्ञानिक और बौद्धिक प्रेरणा भी बौद्धिक वर्ग के महान विचारों और संघर्षों से मिली। स्वतंत्रता समानता और बंधुत्व के नारे के साथ लडी गयी फ्रांसीसी क्रांति के वैचारिक बौद्धिक और दार्शनिक प्रणेता जीन जैक्स रूसो,मांटेस्क्यू और वाल्टेयर थे,अमेरिकन क्रांति के प्रणेता टामस जेफरसन,डिडेरो और फ्रेंकलिन थे,तथा सोवियत संघ में सम्पन्न होने वाली समाजवादी क्रांति को वैज्ञानिक समाजवाद के जन्मदाता कार्ल मार्क्स के क्रांतिकारी विचारों से प्रेरणा मिली थी।</p>
<p>सातवीं शताब्दी से लेकर पन्द्रहवीं शताब्दी तक पूरी तरह अंधकार में डूबे यूरोपीय महाद्वीप में पुनर्जागरण और जनमानस में आधुनिक तार्किक वैज्ञानिक मानवतावादी चेतना का जन्म कोपरनिकस कैपलर गैलीलियो जैसे अनगिनत दूरदर्शी साहसी चिंतको और विचारकों के महान विचारों और संघर्षों के फलस्वरूप हुआ। इन दूरदर्शी विचारकों के आधुनिक विचारों ने सातवीं शताब्दी से लेकर पन्द्रहवीं शताब्दी तक अंधकार में डूबे यूरोपीय महाद्वीप को आधुनिक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक समाज बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कोपरनिकस कैपलर गैलीलियो के अतिरिक्त जिन अन्य महान विचारकों ने यूरोपीय महाद्वीप को बहुआयामी रूप से तरक्की की बुलंदी तक पहुँचाया उनमें जान लाॅक ,जरमी बेंथम,जान स्टुअर्ट मिल और कार्ल मार्क्स जैसे चिंतको विचारकों और दार्शनिकों के विचारों और संघर्षों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सुकरात अरस्तू प्लेटो पाइथागोरस इरेटास्थनीज जैसे अनगिनत दार्शनिकों विद्वानों और विचारकों की बहुलता के कारण ही प्राचीन यूनान को ज्ञान-बिज्ञान का पालना कहा गया।</p>
<p>इसी परम्परा में गुरु वशिष्ठ गुरु विश्वामित्र गुरु चाणक्य गुरु संदीपनी जैसे अपने श्रेष्ठ और महान गुरुओं और उनकी महान शिक्षाओ के कारण भारत वैश्विक स्तर पर विश्व गुरू के रूप में विख्यात रहा। गुरु विश्वामित्र गुरु संदीपनी जैसे श्रेष्ठ और महान गुरुओं के कुशल मार्गदर्शन में मर्यादा पुरुषोत्तम राम और योगीराज श्री कृष्ण जैसे युगों के महानायक अवतरित हुए और गुरु चाणक्य की महान शिक्षाओ ने चन्द्रगुप्त मौर्य जैसे महान चक्रवर्ती सम्राट को पैदा किया। इसी कडी में भारतीय स्वाधीनता संग्राम का महासंग्राम तत्कालीन भारतीय बौद्धिक वर्ग (शिक्षक वकील पत्रकार और प्रखर समाज सेवियों ) के मार्गदर्शन और नेतृत्व में लडा गया।</p>
<p>स्वाधीनता संग्राम के दौरान शिक्षकों वकीलों और पत्रकारो द्वारा ही भारतीय जनमानस को स्वतंत्रता का अर्थ और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करना समझाया गया तथा स्वतंत्रता की महत्ता और स्वतंत्रता का मूल्य बोध भी शिक्षकों वकीलों और पत्रकारो द्वारा ही निराश हताश भारतीय जनमानस को कराया गया। भारतीय संविधान के निर्माण से लेकर स्वाधीन भारत के पुनर्निर्माण और विकास के लिए सर्वाधिक प्रयास और प्रयत्न भी भारत के बौद्धिक वर्ग द्वारा ही किया गया। स्वाधीनता उपरांत भारतीय जनमानस की आशाओं आकांक्षाओं और सपनों को होमी जहाँगीर भाभा विक्रम साराभाई महान कृषि वैज्ञानिक स्वामीनाथन और वर्गीस कुरियन जैसे मेधावियों द्वारा अंतिम निष्कर्ष तक पहुँचाने और व्यवहारिक परिणति तक लाने के लिए ईमानदार प्रयास किए गए। स्वाधीनता उपरांत भारतीय शासन सत्ता के सर्वोच्च पदों को उस दौर के उच्चकोटि के प्रतिभाशाली व्यक्तित्वो ने सुशोभित किया।</p>
<p>डॉ राजेंद्र प्रसाद सर्वपल्ली राधा कृष्णन पंडित जवाहरलाल नेहरू कृष्णा मेनन डॉ भीम राव अंबेडकर इत्यादि सभी उच्चकोटि के प्रतिभाशाली थे। स्वाधीनता उपरांत भारतीय संसदीय राजनीति में योग्यता प्रतिभा सचरित्रता ईमानदारी और बचनबद्धता अनिवार्य और अपरिहार्य परिपाटी और परम्परा के रूप में स्थापित रही। गैर कांग्रेसी राजनीतिक पुरोधाओं डॉ राम मनोहर लोहिया आचार्य नरेन्द्र देव बलराज मधोक के अन्दर वैश्विक राजनीति की उच्चकोटि समझदारी और उत्कट मेधा शक्ति थी। प्रकारान्तर से योग्यता प्रतिभा मेधा हमारी राजनीतिक संस्कृति का अपरिहार्य तत्व थे।</p>
<p>परन्तु जैसे जैसे सम्पन्न्नता बढी वैसे-वैसे प्रतिभाशाली बौद्धिक समुदाय जैसे शिक्षक वकील पत्रकार और अन्य प्रखर पेशेवर बुद्धिजीवी भारतीय राजनीति में केन्द्रीय भूमिका से बाहर होते गए वर्तमान दौर में अपराधियों माफियाओ भ्रष्टाचारियो और धन्नासेठो ने इन्हें ढकेल कर परिधि पर खड़ा कर दिया हैं। 1952 के प्रथम निर्वाचित संसद से लेकर वर्तमान संसद की डेमोग्रेफी का अध्ययन किया जाय स्थितियाँ बिल्कुल भयावह नजर आती हैं। 1952 की पहली लोक सभा में चुनकर जाने वाले सदस्यों में सबसे ज्यादा संख्या शिक्षकों वकीलों और पत्रकारो की थी परन्तु उत्तरोत्तर इनकी संख्या घटती गयी। वर्तमान समय में संसद और राज्यों की विधानसभाओं में शिक्षको वकीलों पत्रकारो और अन्य बौद्धिक वर्ग की संख्या लगभग नगण्य है।</p>
<p>आज उनकी जगह धीरे-धीरे समाज के अपराधी माफिया बाहुबली भ्रष्टाचारी धन्नासेठ और घोर जातिवादी और साम्प्रदायिक लम्पट नेता संसद और विधानसभा के गलियारों में नजर आने लगे। यह सिलसिला निरंतर आगे ही बढता रहा और अपराध और जरायम पेशे के लोगों के उत्तरोत्तर बढते हौसले और जनता के बीच उनके प्रति बढते आकर्षण ने चम्बल के बीहड़ो में दहशत और आतंक का पर्याय बन चुके चम्बल के डकैतो को भी चुनाव में किस्मत आजमाने का हौसला दे दिया।</p>
<p>सदियों से भारतीय बसुन्धरा सम्पूर्ण विश्व में अपने ज्ञान,मेधा,चिंतन दर्शन और उत्कृष्ट शिक्षा और उच्चकोटि के दार्शनिकों तथा सर्वश्रेष्ठ गुरूओं के कारण ज्ञान-विज्ञान और दर्शन की भूमि के रूप में जानी जाती रही हैं। महात्मा बुद्ध महावीर जैसे दार्शनिकों न केवल भारत भूमि को अपितु अपने दार्शनिक एवम आध्यात्मिक विचारों से पूरी दुनिया को प्रभावित किया। इतिहास साक्षी है कि-भारतीय बसुन्धरा पर वही विभूतियाँ महिमामंडित होती रही हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा पराक्रम परिश्रम कुशलता कुशाग्रता हुनर और हौसले से सामाजिक राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तन लाया।</p>
<p>गुरु वशिष्ठ गुरू विश्वामित्र गुरू द्रोणाचार्य और आचार्य चाणक्य की वंश परंपरा के सच्चे ध्वजवाहक वर्त्तमान दौर के शिक्षकों, इंसाफ के मन्दिर में इंसाफ, इंसानियत और इंसानी हक हूकूक की खातिर काली कोट पहनकर बहस करने वाले वकीलों, लोकतंत्र के चौथे खम्भे के स्तम्भ माने जाने वाले पत्रकारों और देश के सच्चे सचेत जागरूक बुद्धिजीवियों को आज अपनी घटती गिरती उत्तरोत्तर राजनीतिक सामाजिक हैसियत पर गहराई से आत्म-चिंतन आत्म-विश्लेषण और आत्म-मंथन करने की आवश्यकता है।</p>
<p>लगभग दो सौ वर्षों तक पराधीनता के दौरान इस देश के जनमानस के पराधीन मन मस्तिष्क को स्वाधीनता का अर्थ और स्वाधीनता के लिए संघर्ष करना शिक्षकों वकीलों पत्रकारों और उस दौर के सचेत बुद्धिजीवियों ने ही बताया और समझाया।आजादी के दौरान होने वाले हर तरह के आन्दोलन का नेतृत्व शिक्षकों वकीलों पत्रकारों और बुद्धिजीवियों ने ही किया था। इसलिए स्वाधीनता उपरांत इस देश के जनमानस ने सबसे ज्यादा भरोसा विश्वास इन्हीं शिक्षकों वकीलों पत्रकारों और बुद्धिजीवियों पर जताया और इसीलिए सत्तर के दशक तक इस देश की संसद और राज्यों की विधानसभाओ में जनता ने अपने प्रतिनिधि के रूप में चुनकर अवसर दिया। परन्तु जैसे जैसे आजादी के जश्न की ढोल नगाड़ो की थाप मद्धम पडती गई वैसे वैसे शिक्षक वकील पत्रकार और बुद्धिजीवी राजनीतिक शक्ति सत्ता और प्रभाव की मुख्य धुरी या केन्द्रीय स्थिति से परिधि पर या हासिए पर धकेल दिए गए ।नब्बे के दशक तक आते-आते कास्ट क्राइम और कैश का जादू सिर चढकर बोलने लगा।</p>
<p>जाति धर्म की बुनियाद पर सामाजिक अभियांत्रिकी (सोशल इंजीनियरिंग)चुनाव जीतने का सबसे आसान और अचूक फार्मूला बन गया। इसी दौरान हर जातियाँ अपनी जाति के रॉबिनहुड स्टाइल के बाहुबलियों मे अपना नायक ढूँढने खोजने लगी और देखते ही देखते बाहुबली अपनी-अपनी जातियों के रहनुमा और मसीहा बन गए। जनमानस में वर्तमान दौर के राजनेताओं की घटती लोकप्रियता विश्वसनीयता और आकर्षण ने राजनीतिक दलों को अपनी राजनीतिक रैलियां सफल बनाने के लिए रूपहले पर्दे के सितारों और सिने तारिकाओं की सहायता लेने के लिए मजबूर कर दिया।आज ग्लैमरस चेहरे राजनीतिक रैलियों के अनिवार्य अंग हो गए और अपने मजबूत राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को परास्त करने के लिए भी राजनीतिक दलो ने रूपहले पर्दे के चमकते दमकते चेहरों को बतौर उम्मीदवार चुनाव में उतारना आरम्भ कर दिया। इन बहुविवीध कारणों से भारतीय राजनीति संसदीय राजनीति की स्वस्थ्य परम्पराओं से दूर होती गई और और इक्सवी सदी के आरम्भ से ही देश की संसद और राज्यों की विधानसभाओ में सोच विचार शिष्टाचार और विषयवस्तु की दृष्टि से बहस का स्तर उत्तरोत्तर गिरता गया ।</p>
<p>यह सर्वविदित है कि संसद और विधान सभाओं में सुयोग्य सचरित्र ईमानदार के साथ साथ प्रतिभाशाली जब जनप्रतिनिधि बनकर संसद और विधानसभाओं में पहुँचेगे तभी देश की वास्तविक समस्याओं और जनता के बुनियादी मुद्दों पर धारदार बहस होगी और जब धारदार बहस होती है तभी जनता के पक्ष मे शानदार नीतियां बनती हैं और जनता के पक्ष में शानदार फैसले होते है। इसलिए आज शिक्षकों वकीलों पत्रकारों सहित सम्पूर्ण बौद्धिक तबके को अपनी घटती सामाजिक हैसियत और राजनीति भूमिका तथा जनमानस में उत्तरोत्तर बढती अस्वीकार्यता पर आत्म-मंथन करते हुए नये दौर की चुनौतियों के लिहाज से अपने को तैयार करना होगा ।प्रकारांतर से बौद्धिक समुदाय का सक्रिय हस्तक्षेप स्वस्थ्य लोकतंत्र के लिए आवश्यक है।</p>
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		<title>राजस्थान में आखिर किसके  हाथ से फिसल रही रेत?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[वर्षा मिर्ज़ा]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 14 Apr 2023 07:54:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[चर्चा]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[भ्रष्टाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="977" height="550" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/ashok-gehlot-sachin-pilot-vasundhara-raje.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="राजस्थान में आखिर किसके हाथ से फिसल रही रेत?" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/ashok-gehlot-sachin-pilot-vasundhara-raje.jpg 977w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/ashok-gehlot-sachin-pilot-vasundhara-raje-300x169.jpg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/ashok-gehlot-sachin-pilot-vasundhara-raje-768x432.jpg 768w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/ashok-gehlot-sachin-pilot-vasundhara-raje-696x392.jpg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/ashok-gehlot-sachin-pilot-vasundhara-raje-746x420.jpg 746w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/ashok-gehlot-sachin-pilot-vasundhara-raje-313x176.jpg 313w" sizes="auto, (max-width: 977px) 100vw, 977px" title="राजस्थान में आखिर किसके हाथ से फिसल रही रेत? 7">राजस्थान की धरती अब तपने लगी है। इस मरुप्रदेश को ‘धरती धोरा री’ भी कहा जाता है यानी रेतीले टीलों की धरती। रेगिस्तान मे दूर-दूर तक फैली रेत को जब मुट्ठियां भींच कर थामने की कोशिश की जाती है तो वह और भी तेज़ी से फिसलने लगती है। सचिन पायलट के हाथ से भी यह [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="977" height="550" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/ashok-gehlot-sachin-pilot-vasundhara-raje.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="राजस्थान में आखिर किसके हाथ से फिसल रही रेत?" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/ashok-gehlot-sachin-pilot-vasundhara-raje.jpg 977w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/ashok-gehlot-sachin-pilot-vasundhara-raje-300x169.jpg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/ashok-gehlot-sachin-pilot-vasundhara-raje-768x432.jpg 768w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/ashok-gehlot-sachin-pilot-vasundhara-raje-696x392.jpg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/ashok-gehlot-sachin-pilot-vasundhara-raje-746x420.jpg 746w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/04/ashok-gehlot-sachin-pilot-vasundhara-raje-313x176.jpg 313w" sizes="auto, (max-width: 977px) 100vw, 977px" title="राजस्थान में आखिर किसके हाथ से फिसल रही रेत? 8">


<p>राजस्थान की धरती अब तपने लगी है। इस मरुप्रदेश को ‘धरती धोरा री’ भी कहा जाता है यानी रेतीले टीलों की धरती। रेगिस्तान मे दूर-दूर तक फैली रेत को जब मुट्ठियां भींच कर थामने की कोशिश की जाती है तो वह और भी तेज़ी से फिसलने लगती है। सचिन पायलट के हाथ से भी यह रेत यूं ही फिसल रही है। एक नौजवान और सक्रिय नेता के हाथ से रेत का फिसलना कोई नई बात नहीं होती है लेकिन हालिया फिसलन से उनकी छवि ऐसी बनी है जैसे उनका पंजा किसी और के हाथों में खेल रहा हो। पायलट ने जो तीर अभी चलाया है वह अशोक गहलोत सरकार की दिशा में तो तना हुआ है ही, पूर्व मुखमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया को भी निशाने पर लेता हुआ दिखाई दे रहा है। पायलट कह रहे हैं कि हमें चुनाव में जाने से पहले वह वादा पूरा करना चाहिए जिसमें हमने वसुंधरा सरकार पर भ्रष्टाचार के इल्ज़ाम लगाए थे और जांच की बात की थी। ध्यान देने वाली बात यह है कि पायलट वसुंधरा का नाम ले रहे हैं, भाजपा सरकार का नहीं। इस बढ़िया चाल के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वंदे भारत ट्रेन के साथ-साथ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भी हरी झंडी दिखा देते हैं जिसकी बराबरी फिर गहलोत ने एक ट्वीट से की। दरअसल जयपुर से दिल्ली की ओर चलने वाली वंदे भारत ट्रेन को प्रधानमंत्री वर्चुअली हरी झंडी दिखा रहे थे जिसमें गहलोत ने भी शिरकत की थी ।</p>
<p>वसुंधरा राजे सिंधिया के भ्रष्टाचार की जांच की मांग करते हुए पायलट मंगलवार को अनशन पर बैठ जाते हैं, वहीं बुधवार को पीएम गहलोत की तारीफ़ के पुल बांध देते हैं और देश की पुरानी सरकारों पर तंज़ भी कसते हैं । यहां तक कि वे उन्हें &#8216;अच्छा दोस्त&#8217; कहने से भी नहीं चूकते। यह भी कह जाते हैं कि राजनीतिक संकट के बीच भी वे कार्यक्रम में शामिल हुए। प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का नाम लेकर कहा कि &#8220;जो काम आज़ादी के तुरंत बाद होने चाहिए थे, वे भी आपने मुझे कहे, यही हमारी मित्रता की ताक़त है।&#8221; संभव है कि इन तीनों की पिच अलग-अलग हो लेकिन पीएम इस पिच पर भी जब सरलता से चौके-छक्के जड़ जाएं तो पटकथा लेखक कौन हैं, यह जानने की चेष्टा स्वाभाविक है।अगर इस पटकथा के लेखक स्वयं राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ही हैं तो वे कोई अच्छे लेखक नहीं मालूम हो रहे। उनकी कोशिश आलाकमान को फिर से झिंझोड़ने की है कि &#8220;मैं अब भी इंतजार में हूं।&#8221; ये अंतिम मौका है कि उन्हें पूरा राजपाट न सही, कुछ गांव तो दिए ही जाएं। वे नहीं चाहते कि कोई उन्हें नजरंदाज करने की भूल करे। महात्मा गांधी और ज्योतिबा फुले की तस्वीरों के साथ हुए इस अनशन में कोई विधायक या मंत्री नहीं बुलाए गए थे। कोई पार्टी चिन्ह भी नहीं था।</p>
<p>गहलोत ने मोदी की बात का क्या जवाब दिया, यह बतलाने के पहले यह बताना भी ज़रूरी है कि पायलट के अनशन के तमाम सवालों को वे टाल गए और कहा कि &#8220;मेरा लेफ़्ट-राइट कहीं ध्यान नहीं है, सिर्फ महंगाई दूर करने के लक्ष्य पर है। इसलिए राहत कैंप लगा रहे हैं।&#8221; पिछली बार की गलती को उन्होंने नहीं दोहराया जब उन्होंने एक पत्रकार के उकसाने पर पायलट को &#8216;गद्दार&#8217; कह दिया था। अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच अनबन उस समय बेपर्दा हुई थी जब साढ़े चार साल पहले आए चुनावी नतीजों के बाद अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बनाया गया था। पायलट और उनके समर्थकों को उम्मीद थी कि यह पद उन्हें मिलेगा। यह पहली टीस थी। सचिन पायलट ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी थे लेकिन उन्हें उप मुख्यमंत्री पद से संतोष करना पड़ा जो वे शायद कभी बर्दाश्त कर ही नहीं पाए। पायलट की यह शिकायत लगातार बनी रही कि उन्हें सरकार के फ़ैसलों में शामिल नहीं किया जाता। बीच-बीच में दिल्ली से आलाकमान आते और कभी दोनों नेताओं को मोटर बाइक पर साथ बैठाते तो कभी मुस्कुराते हुए एक फ्रेम में लाते लेकिन चिंगारी सुलगती रही। पायलट रूठ कर मानेसर चले गए। उनके साथ इकाई और दहाई के बीच में गिने जा सकने वाले विधायक भी। वे क्या गए कि गहलोत सरकार ही हिल गई। एक महीने से भी ज़्यादा समय तक बाड़े में बंद होकर उन्होंने अपनी सरकार बचाई। फिर रूठे पायलट को आलाकमान ने मना लिया लेकिन उनका पद और रुतबा जाता रहा। उनसे उनके दोनों पद- उप मुख्यमंत्री और पीसीसी अध्यक्ष के छिन गए। फिर भी वे पार्टी में बने रहे। उनसे कहा गया कि सही मौके का इंतज़ार करें। यह सही मौका आ ही रहा था कि सीएम गहलोत कई विधायक विद्रोही हो गए। उन्हें लग रहा था कि अबकी बार पार्टी आलाकमान उन्हीं बागी को मुख्यमंत्री बनाने जा रहा है। सीएम, विधायक, सरकार सब संदेह में घिर जाते हैं। रहा सवाल जनता का तो उसे सचिन पायलट से भी अपेक्षा है कि वह खुलकर मानेसर जाने की बात साफ़ करेंगे।</p>
<p>राजस्थान के साथ आलाकमान से जुड़ा अजीब संकट यह भी है कि कभी वह गहलोत को बड़ी राष्ट्रीय ज़िम्मेदारी सौंपना चाहता है तो कभी पायलट को, लेकिन ऐसा कभी हो नहीं पाता और दोनों प्रदेश की राजनीति में ही रोजड़े (नील गाय) की तरह सींग लड़ाए रहते हैं। आज भले ही मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस के अध्यक्ष चुन लिए गए हों लेकिन पहली पसंद अशोक गहलोत थे। उन्हें शायद यह पद कांटों का ताज लग रहा था जो एक राज्य की सत्ता के एवज में उन्हें दिया जा रहा था। गहलोत को शायद यह आशा थी कि जीतने के बाद राजस्थान की सत्ता उनके ही किसी विश्वासपात्र को सौंप दी जाएगी लेकिन समर्थक विधायकों ने बग़ावत कर दी क्योंकि उन्हें ऐसे संकेत मिले कि दिल्ली से अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे की जो टीम आई है वह उनका मत जानने नहीं बल्कि सचिन पायलट का नाम लेकर आई है। गहलोत समर्थक इन नेताओं की बैठक में शामिल न होकर संसदीय मामलों के मंत्री शांति धारीवाल के घर जुट गए। इसे कांग्रेस आलाकमान के नेतृत्व को चुनौती माना गया। कुछ का यह भी मानना था कि गहलोत भले ही आलाकमान के नुमाइंदों के साथ विधायकों का इंतज़ार कर रहे थे लेकिन उनकी विधायकों को शह थी। फिर पर्यवेक्षक अजय माकन ने भी बग़ावत को अनुशासनहीनता मानते हुए राजस्थान प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के पद से इस्तीफा दे दिया था। राजस्थान सरकार को देख यही लगता है कि उसे विपक्ष से कम पक्ष से ज़्यादा खतरा है।</p>
<p>अब नए प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा हैं। वे सफ़ाई दे रहे हैं कि राजस्थान को पंजाब नहीं बनने देंगे। भ्रष्टाचार पर पायलट का मुद्दा भले ही सही हो लेकिन मुद्दा उठाने का तरीका गलत है। पायलट को लेकर पहले ही अनुशासनहीनता की कार्रवाई होनी चाहिए थी, जो उस वक्त नहीं हुई। अब होगी। विश्लेषक राजस्थान के हालात की व्याख्या कर रहे हैं कि सचिन पायलट किसी बड़े फ़ैसले पर जाने से पहले अंतिम कोशिश कर रहे हैं। यह चुनावी साल है और कहा जा रहा है कि पायलट जहाज से उतर गए तो अच्छे संदेश नहीं जाएंगे। पायलट के अनशन स्थल पर भी &#8220;संदेशे आते हैं, हमें तड़पाते हैं..&#8221; यही गीत बज रहा था। क्या वाक़ई यदि पायलट को पांच गांव भी नहीं दिए गए तो राजस्थान की राजनीति में कुरुक्षेत्र का संग्राम होगा? कौरवों से पांडवों ने पांच गांव ही तो मांगे थे । दरअसल इस कहानी में पायलट के प्रति हमदर्दी हो सकती थी जो प्रारंभ में देखी भी गई, लेकिन अन्याय के अध्याय इतने दर्द भरे नहीं हैं कि बहुत ज़्यादा विधायक या मंत्री उनके साथ खड़े हों। अंततः लोकतंत्र जनशक्ति से जुड़ा है। अशोक गहलोत इस व्यवस्था के माहिर खिलाड़ी हैं। इस बार वे सचिन पायलट के मामले में भी चुप हैं लेकिन प्रधानमंत्री को प्रत्युत्तर दिया है कि मुझे दुःख है कि आपका मेरी मौजूदगी में तमाम रेल मंत्रियों के कार्यकाल के फैसलों को भ्रष्टाचार और राजनीति से प्रेरित बोलना दुर्भाग्यपूर्ण है। रेलवे का महत्व तो आपने अपने कार्यकाल में रेलवे बजट को समाप्त कर घटाया है। आज अधुनिक ट्रेन चल पा रही है क्योंकि डॉ मनमोहन सिंह जी ने 1991 में आर्थिक उदारीकरण की नीति को लागू किया था।</p>
<p>चुनावी साल में अशोक गहलोत ने मोदी की ही तरह राजस्थान के निवासियों को मिशन 2030 का लक्ष्य दे दिया है। चिरंजीवी बीमा योजना, पुरानी पेंशन योजना को लागू करने जैसे फैसलों ने उन्हें चर्चित सीएम तो बना दिया है और तमाम अड़चनों के बाद बेहद ज़रूरी विधेयक कि हर राजस्थानी को स्वास्थ्य का अधिकार मिले, राष्ट्रपति के पास मंज़ूरी के लिए जा चुका है। यह उन राज्यों के लिए भी सबक है जो चुनाव से चंद महीने पहले बहनों को लाड़ली बता कर उनके खातों में एक-एक हज़ार रूपए डाल रहे हैं। चुनाव जीतते ही ऐसा करने की बजाय नए चुनाव जीतने के ठीक पहले ऐसी रेवड़ीनुमा नीतियों और असल लोकतान्त्रिक नीतियों में यही फर्क होता है। लोकतंत्र आख़िरी व्यक्ति तक सरकार के पहुँचने की प्रक्रिया है न कि तत्काल लाभ देकर चुनाव जीत लेने का नुस्खा। देश चुनावी प्रजातंत्र की बजाय उदार और जन कल्याणकारी लोकतंत्र से किनारा न कर ले, यह देखना भी संवैधानिक संस्थाओं का काम है- यही पहला कर्तत्व भी। नेता तो लड़ते आए हैं, लड़ते रहेंगे।</p>
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		<title>एक नजर, भारत की सबसे विवादित खबरें पर!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[द हरिश्चंद्र स्टाफ]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Feb 2023 12:27:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[चर्चा]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[भ्रष्टाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="1200" height="600" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/10/no-hate.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="बंद होना चाहिए नफ़रती बहसों का ज़हरीला कारोबार" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/10/no-hate.jpg 1200w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/10/no-hate-300x150.jpg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/10/no-hate-1024x512.jpg 1024w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/10/no-hate-768x384.jpg 768w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/10/no-hate-696x348.jpg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/10/no-hate-1068x534.jpg 1068w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/10/no-hate-840x420.jpg 840w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/10/no-hate-313x157.jpg 313w" sizes="auto, (max-width: 1200px) 100vw, 1200px" title="एक नजर, भारत की सबसे विवादित खबरें पर! 9">भारत में किसी एक सबसे विवादास्पद समाचार को इंगित करना मुश्किल है क्योंकि ऐसी कई घटनाएं हुई हैं जिन्होंने देश में महत्वपूर्ण विवाद और बहस को जन्म दिया है। कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं: नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए): 2019 में इस कानून के पारित होने से पूरे देश में व्यापक विरोध हुआ। कानून के आलोचकों का [&#8230;]]]></description>
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<p>भारत में किसी एक सबसे विवादास्पद समाचार को इंगित करना मुश्किल है क्योंकि ऐसी कई घटनाएं हुई हैं जिन्होंने देश में महत्वपूर्ण विवाद और बहस को जन्म दिया है। कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं:</p>
<p><strong>नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए):</strong> 2019 में इस कानून के पारित होने से पूरे देश में व्यापक विरोध हुआ। कानून के आलोचकों का तर्क है कि यह मुसलमानों के खिलाफ भेदभावपूर्ण है और भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों के खिलाफ है।</p>
<p><strong>बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद:</strong> यह अयोध्या शहर में एक धार्मिक स्थल को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद है। विवाद एक मस्जिद से उपजा है जो 16 वीं शताब्दी में साइट पर बनाया गया था और 1992 में हिंदू राष्ट्रवादियों द्वारा नष्ट कर दिया गया था। यह मुद्दा दशकों से भारत में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच तनाव का स्रोत रहा है।</p>
<p><strong>दिल्ली दंगे:</strong> फरवरी 2020 में, दिल्ली के पूर्वोत्तर जिले में हिंसा भड़क उठी, जिसके परिणामस्वरूप 50 से अधिक लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए। सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के कारण दंगे भड़क उठे थे और उनकी सांप्रदायिक प्रकृति के लिए व्यापक रूप से आलोचना की गई थी।</p>
<p><strong>निर्भया कांड:</strong> 2012 में, दिल्ली में एक बस में एक युवती के साथ सामूहिक बलात्कार और क्रूरता से हमला किया गया था। इस घटना ने देश भर में व्यापक आक्रोश और विरोध को जन्म दिया, जिससे यौन उत्पीड़न को नियंत्रित करने वाले कानूनों में बदलाव आया।</p>
<p><strong>राफेल सौदा विवाद:</strong> 2018 में, भारत सरकार ने राफेल लड़ाकू जेट खरीदने के लिए फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह सौदा भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोपों के कारण विवादास्पद था।</p>
<p><strong>कश्मीर संघर्ष:</strong> कश्मीर का विवादित क्षेत्र दशकों से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का स्रोत रहा है। 2019 में क्षेत्र की विशेष स्थिति को रद्द करने और उसके बाद के लॉकडाउन और संचार ब्लैकआउट के भारत सरकार के फैसले की व्यापक रूप से आलोचना की गई है।</p>
<p><strong>दिल्ली विरोधी सीएए विरोध और उसके बाद के दंगे:</strong> दिसंबर 2019 में, नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ दिल्ली में विरोध प्रदर्शन हुए, जिसके कारण प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं। फरवरी 2020 में हुए दंगे शहर के इतिहास के सबसे घातक दंगों में से एक थे।</p>
<p><strong>हाथरस गैंगरेप मामला:</strong> सितंबर 2020 में, उत्तर प्रदेश में एक 19 वर्षीय दलित महिला के साथ कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार किया गया और उसके साथ क्रूरता की गई। पुलिस और सरकार द्वारा मामले को संभालने से देश भर में व्यापक आक्रोश और विरोध प्रदर्शन हुआ।</p>
<p><strong>उच्च मूल्य के करेंसी नोटों का विमुद्रीकरण:</strong> 2016 में, भारत सरकार ने सभी 500 और 1,000 रुपये के नोटों के विमुद्रीकरण की घोषणा की, जो उस समय प्रचलन में देश की मुद्रा का लगभग 86% था। यह कदम विवादास्पद था और इससे अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण व्यवधान पैदा हुए।</p>
<p><strong>2जी स्पेक्ट्रम घोटाला:</strong> 2012 में, भारत सरकार 2जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस के आवंटन से जुड़े एक भ्रष्टाचार घोटाले में फंस गई थी। घोटाले ने कई हाई-प्रोफाइल राजनेताओं और व्यापारिक नेताओं को फंसाया।</p>
<p><strong>पेगासस स्पाइवेयर विवाद:</strong> 2021 में, यह पता चला कि भारत सरकार ने विपक्षी नेताओं, पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के लिए कथित तौर पर इजरायली स्पाईवेयर का इस्तेमाल किया था। रहस्योद्घाटन ने गोपनीयता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर व्यापक आक्रोश और चिंताओं को जन्म दिया।</p>
<p><strong>कृषि कानूनों का विवाद:</strong> 2020 में, भारत सरकार ने तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को पारित किया, जिसके कारण देश भर के किसानों ने व्यापक विरोध किया। किसान विरोधी होने और बड़े निगमों का पक्ष लेने के लिए कानूनों की आलोचना की गई।</p>
<p><strong>व्यापमं घोटाला:</strong> 2013 में, मध्य प्रदेश राज्य में सरकार द्वारा संचालित शैक्षणिक संस्थानों में बड़े पैमाने पर प्रवेश और भर्ती घोटाले का पर्दाफाश किया गया था। घोटाले ने कई हाई-प्रोफाइल राजनेताओं और अधिकारियों को फंसाया।</p>
<p><strong>रोहित वेमुला आत्महत्या मामला:</strong> 2016 में, हैदराबाद विश्वविद्यालय में एक दलित छात्र ने आत्महत्या कर ली, जिससे भारत में जातिगत भेदभाव पर व्यापक विरोध और बहस छिड़ गई।</p>
<p><strong>नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) और असम नागरिकता का मुद्दा:</strong> NRC भारतीय नागरिकों का एक रजिस्टर है जिसे पूर्वोत्तर राज्य असम में अपडेट किया गया है। रजिस्टर को अपडेट करने की प्रक्रिया विवादास्पद रही है और कई लोग इससे बाहर हो गए हैं. यह मुद्दा असम और भारत सरकार के बीच तनाव का एक स्रोत रहा है।</p>
<p><strong>सुशांत सिंह राजपूत मौत का मामला:</strong> 2020 में, बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत ने मीडिया में उन्माद पैदा कर दिया और फिल्म उद्योग में भाई-भतीजावाद और पक्षपात पर देशव्यापी बहस छिड़ गई। यह मामला जांच और इसके मीडिया कवरेज को लेकर भी विवादों में घिर गया था।</p>
<p>ये भारत में विवादास्पद समाचारों के कुछ और उदाहरण हैं। देश का एक समृद्ध और विविध इतिहास रहा है, और ऐसे कई अन्य मुद्दे हैं जिन्होंने वर्षों से विवाद और बहस उत्पन्न की है। लेकिन इनमे से ऐसे भी कई मामले में है जो पूरी तरह खत्म हो गए है पर कुछ मामले ऐसे भी है जिन पर लम्बे समय से कोई अपडेट नहीं।</p>
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		<title>बेहतर मतदाता ही बेहतर नेता का चुनाव कर सकता हैं</title>
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		<dc:creator><![CDATA[मनोज कुमार सिंह]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Feb 2023 18:41:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चर्चा]]></category>
		<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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		<category><![CDATA[भ्रष्टाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="739" height="415" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/images28229.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="बेहतर मतदाता ही बेहतर नेता का चुनाव कर सकता हैं" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/images28229.jpeg 739w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/images28229-300x168.jpeg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/images28229-696x391.jpeg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/images28229-313x176.jpeg 313w" sizes="auto, (max-width: 739px) 100vw, 739px" title="बेहतर मतदाता ही बेहतर नेता का चुनाव कर सकता हैं 11">लोकतंत्र एक गतिशील अवधारणा हैं। बेहतर लोक तंत्र बनाने के लिए सबसे पहले बेहतर जनमानस बेहतर समाज और बेहतर जनप्रतिनिधि चुनने वाला बेहतर मतदाता बनाना होगा। इसलिए सामाजिक, आर्थिक सांस्कृतिक और अन्य परिवर्तनों के अनुरूप लोकतंत्र का स्वरूप बनता-बिगडता रहा है। पाश्चात्य जगत में ज्ञान-विज्ञान के पालना के साथ-साथ लोकतंत्र की जन्मभूमि के रूप में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="739" height="415" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/images28229.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="बेहतर मतदाता ही बेहतर नेता का चुनाव कर सकता हैं" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/images28229.jpeg 739w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/images28229-300x168.jpeg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/images28229-696x391.jpeg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/images28229-313x176.jpeg 313w" sizes="auto, (max-width: 739px) 100vw, 739px" title="बेहतर मतदाता ही बेहतर नेता का चुनाव कर सकता हैं 12">



<p>लोकतंत्र एक गतिशील अवधारणा हैं। बेहतर लोक तंत्र बनाने के लिए सबसे पहले बेहतर जनमानस बेहतर समाज और बेहतर जनप्रतिनिधि चुनने वाला बेहतर मतदाता बनाना होगा। इसलिए सामाजिक, आर्थिक सांस्कृतिक और अन्य परिवर्तनों के अनुरूप लोकतंत्र का स्वरूप बनता-बिगडता रहा है। पाश्चात्य जगत में ज्ञान-विज्ञान के पालना के साथ-साथ लोकतंत्र की जन्मभूमि के रूप में विख्यात यूनान के एथेंस में दास प्रथा खुलेआम प्रचलित थी। इसको अनुचित गैर प्रजातांत्रिक नहीं माना जाता था। परन्तु आज वर्तमान लोकतंत्र में दास प्रथा, छूआ-छूत और अन्य सामाजिक भेदभाव की कुव्यवस्थाओं को लोकतंत्र के मस्तक पर कलंक माना जाता है। इतिहास में अनगिनत संघर्षों के उपरांत आज आधुनिक लोकतंत्र का जो सर्वमान्य और सर्वव्यापी स्वरूप उभर कर आया है वह कुछ बुनियादी स्तम्भों पर टिका होता हैं । वह बुनियादी स्तम्भ है सत्ता का विकेन्द्रीकरण, जनता में अंतिम रूप से सम्प्रभुता का निवास अर्थात लोक सम्प्रभुता, तार्किक और बौद्धिक बहस तथा अभिव्यक्ति की पर्याप्त आजादी, धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद तथा सूचना- संचार के साधनों को पूरी स्वतंत्रता । लोकतंत्र की सकारात्मक गतिशीलता स्वस्थ , तार्किक और बौद्धिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुरूप जनमत निर्माण की परम्परा और प्रक्रिया निर्भर करती है।&nbsp;</p>



<p>लोकतंत्र, जनतंत्र और प्रजातंत्र, इन तीनों शब्दों का निहितार्थ हैं जनता का राज। लोकतंत्र में आम जनमानस स्वतन्त्रता और समानता का एहसास करते हुए अपनी इच्छा के अनुरूप एक निश्चित अवधि के लिए अपना शासक चुनता है। देश के जनमानस की इच्छा, अभिव्यक्ति और अभिमत को ही राजनीति विज्ञान की भाषा में जनमत कहा जाता हैं। जनतंत्र की गुणवत्ता का आकलन जनमत से ही किया जाता&nbsp; है। एक स्वस्थ लोकतंत्रिक देश में जनमत का निर्माण उस देश के नेताओं , समाचार पत्रों, पत्रिकाओं सहित सम्पूर्ण प्रिंट मीडिया , इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सहित सूचना संचार के साधनों , लोकतंत्र में आस्था रखने वाले बौद्धिक समुदाय द्वारा सम्पन्न गोष्ठियों ,न्यायिक निर्णयों और न्यायविदों की टिप्पणियों , राजनीतिक दलों के विभिन्न कार्यक्रमों तथा सम्मेलनों और जनमानस के बीच होने वाली चर्चा परिचर्चा और विचार- विमर्श द्वारा होता हैं । सचरित्र, ईमानदार, बचनबद्ध ,सच्ची जनसेवा की भावना रखने वाले&nbsp; और पढें-लिखें नेता अपने भाषण और विचार द्वारा&nbsp; तार्किक, बौद्धिक, विवेकसम्पन्न , जागरूक , वैज्ञानिक दृष्टिकोण से परिपूर्ण और सक्रिय जनमत का निर्माण करते हैं। इसके विपरीत चुनावी मौसम भाॅपकर गिरगिटों की तरह रंग बदलने वाले, बेईमान, धूर्त, आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे, घोर जातिवादी और साम्प्रदायिक मानसिकता से ग्रसित नेता कुंठित, संकीर्ण, उन्मादी , नकारात्मक और निष्क्रिय जनमत का निर्माण करते हैं। इसी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्भीक सूचना संचार के औजार स्वस्थ, सहिष्णु, सचेत और बौद्धिक&nbsp; जनमत का निर्माण करते हैं। जबकि दिन-रात सत्ता की चौखटो का चालीसा गाने वाले तथा चाट-भारण परम्परा के सूचना संचार के औजार कूपमंडूक , अंधभक्ति से परिपूर्ण और भेंड चाल वाले जनमत का निर्माण करते हैं। देश के बौद्धिक समुदाय द्वारा भी जनमत का निर्माण किया जाता हैं। जब बौद्धिक समुदाय ईमानदारी, निष्पक्षता और निःस्वार्थ भावना से देश की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक समस्याओं पर अपना विचार प्रस्तुत करता है तो बौद्धिक, तार्किक और विवेक पूर्ण जनमत का निर्माण करते हैं। इसके विपरीत सत्ता सुख की चाहत रखने वाले तथा चाॅदी के सिक्कों पर बिकने वाले बुद्धिजीवी संकीर्ण, सतही और संकुचित सोच वाला जनमत तैयार करते हैं। जबतक स्वस्थ, स्वतंत्र, निर्भीक, बौद्धिक, जागरूक और सक्रिय जनमत नही होगा तब तक जनमानस को सुयोग्य, सचरित्र, ईमानदार और उर्जावान नेतृत्व नहीं मिल पाएगा।</p>



<p>स्वतंत्रता और समानता लोकतंत्र की प्राणशक्ति है। स्वतंत्रता का निहितार्थ हैं मनुष्य अपनी इच्छा और विवेक के अनुसार अपने जीवन का निर्धारण कर सकें। राजनीतिक दृष्टि से समानता का तात्पर्य है कि-प्रत्येक&nbsp; व्यक्ति को बारी-बारी से शासन संचालन का अवसर मिलना चाहिए। प्रकारांतर से प्रजातंत्र में जनता को स्वयं अपने राजनीतिक भाग्य को निर्धारित और संचालित करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। जिस समाज में अंधविश्वास और भय मुक्त वातावरण में तर्क , वितर्क, चिंतन मनन करने की स्वतंत्रता रहती हैं निश्चित रूप से वहाँ स्वस्थ जनमत का निर्माण होता हैं।&nbsp;</p>



<p>जनमत और नेतृत्व में गहरा संबंध पाया जाता हैं। कुशल, दूरदर्शी, प्रगतिशील और सर्वसमावेशी नेतृत्व द्वारा निर्भीक, निष्पक्ष और जागरूक जनमत का निर्माण किया जाता हैं। स्वाधीनता संग्राम के दौरान राजाराम मोहन राय, ईश्वर चन्द्र विद्यासागर, केशव चन्द्र सेन, महर्षि दयानंद सरस्वती, स्वामी विवेकानंद, बाल गंगाधर तिलक तथा महात्मा गांधी ने निर्भीक, साहसी, अनुशासित और संघर्षशील जनमत का निर्माण किया। इन समस्त विभूतियों ने यथाशक्ति चिरपोषित असंगत धारणाओं , परस्पर व्याप्त दुराग्रहों, प्रचलित मिथकों और मताग्रहों, विभिन्न प्रकार की संकीर्णताओं, अंधविश्वासों, पाखंडो और बुद्धिहीनता का भण्डाफोड किया। इसके स्थान पर इन विभूतियों ने एक सभ्य लोकतंत्रिक समाज के लिए आवश्यक तार्किक, बौद्धिक और जागरूक जनमत तथा जन समुदाय का निर्माण किया । लोकतंत्र में लोकमत राजनीतिक मत की अपेक्षा व्यापक अवधारणा हैं। क्योंकि लोकमत में राजनीतिक मत के साथ- साथ सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और सांस्कृतिक अभिमत भी समाहित रहता हैं। सार्वजनिक रूप से अभिवृत्तियों की स्पष्ट और औपचारिक अभिव्यक्ति को &#8220;मत &#8221; अथवा अभिमत कहा जाता हैं। समाजशास्त्रियों का मानना है कि- मनुष्य के मन मस्तिष्क में संचरित&nbsp; अभिवृत्तियों, प्रवृत्तियों, भावनाओं और विचारों का निरूपण सामाजिक और ऐतिहासिक वातावरण में होता हैं। इसलिए किसी देश में लोकमत के निर्धारण में लोक आस्थाओं, लोक मान्यताओं, लोक परंपराओं और रीति- रिवाजों की महत्वपूर्ण भूमिका होती हैं।&nbsp;</p>



<p>जनमत एक गतिशील अवधारणा हैं। जो समय, नेतृत्व, सामाजिक परिवर्तन और सांस्कृतिक परिवर्तन के लिहाज़ से बदलती रहती है। कभी-कभी सत्य की साधना में साधनारत दूरदर्शी व्यक्तियों द्वारा उद्घाटित विचारों से भी जनमत का निर्माण होता हैं। सुकरात, गैलीलियो, कोपरनिकस और दयानंद सरस्वती इस तरह के दूरदर्शी व्यक्तियों के रूप&nbsp; में लोकमानास में स्वीकार किए जाते हैं। हालांकि जन समुदाय इन महापुरुषों के विचारों को तात्कालिक रूप से स्वीकार नहीं करता है। परन्तु जैसे-जैसे जन मानस की सामूहिक समझदारी बढती जाती हैं वैसे-वैसे इन सत्य के साधकों के विचार जन मानस में प्रचलित और प्रवाहमान होने लगते हैं। एक स्वस्थ लोकतंत्र में लोकमत नमनीय तथा परिवर्तनशील होता हैं। लोकहित में प्रकट किए गए नवीनतम&nbsp; विचारों, संकल्पनाओ , अवधारणाओं और सिद्धांतों के अनुरूप लोकमत धीरे-धीरे परिवर्तित होता रहता हैं। एक सफल राजनेता वही होता हैं जो जनसमुदाय को नकारात्मक, विध्वंसक प्रवृत्तियों, निस्सारता तथा निराशा से बाहर निकाल कर उसमें&nbsp; आशा और कर्मठ्ता का संचार करें। इसलिए संकीर्ण राजनीतिक&nbsp; स्वार्थों की पूर्ति के लिए नेताओं को नकारात्मक, विध्वंसक और उन्मादी जनमत के निर्माण से परहेज करना चाहिए। प्रगतिशील तथा विकासोन्मुखी जनमत ही देश को शक्तिशाली और सामर्थ्यवान नेतृत्व प्रदान कर सकता हैं। जब देश की नेतृत्वकारी शक्तियां लोकतंत्र को महज एक शासन प्रणाली के रूप न स्वीकार कर लोकतंत्र को जीवन दर्शन कर लेती तो जनमत का निर्माण समझदारी, बुद्धिमत्ता पूर्ण और दूरदर्शिता पूर्ण तरीके से करना पड़ता हैं। जिससे लोकतंत्र महज राजनीतिक जीवन की चहारदीवारी से बाहर निकल कर हमारे नागरिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में स्थापित होने लगता है।&nbsp;</p>



<p>बुनियादी मुद्दों और बुनियादी समस्याओं पर होने सच्चे, ईमानदार, अनुशासित और अहिंसक जन आन्दोलनो से भी जनमत का निर्माण होता हैं तथा जन समुदाय का शिक्षण- प्रशिक्षण होता हैं। पराधीनता काल में 1857 से लेकर 1947 तक होने वाले विभिन्न आन्दोलनों ने भारतीय जनमानस को राजनीतिक रूप से शिक्षित-प्रशिक्षित किया। इन आन्दोलनों के कारण ही देश की जनता अंग्रेजों के विरुद्ध तन कर खडी हूई और अंततः अंग्रेजों को देश छोड़कर पलायन करना पडा। आजादी के बाद भी बहुत से आन्दोलन भारत में हुए। 1977 मे श्रीमती इन्दिरा गाँधी द्वारा देश में आपातकाल लगाए जाने के विरुद्ध लोक नायक जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में देश भर एक सशक्त आन्दोलन हुआ। इस आन्दोलन के फलस्वरूप एक ऐसा जनमत तैयार हुआ जिसनें आजादी के बाद लगभग तीस वर्ष से लगातार&nbsp; शासन करने वाली कांग्रेस पार्टी को सत्ता से बाहर कर दिया। दक्षिण अफ्रीका में डाक्टर नेल्सन मंडेला के नेतृत्व मे गांधीवादी तरीके से रंग भेद नीति के खिलाफ एक लम्बा आंदोलन किया गया। जिससे स्वस्थ जनमत का निर्माण हुआ । 1990 से दक्षिण अफ्रीका में&nbsp; लगातार रंग भेद रहित लोकतंत्रिक व्यवस्था चल रही हैं। हमारे पडोसी देश नेपाल में नब्बे के दशक से राजतंत्र के विरुद्ध लगातार आंदोलन चलता रहा। जिसके फलस्वरूप नेपाल में धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्रीक संविधान का निर्माण हुआ है और राजतंत्र का पूरी तरह खात्मा हो गया है। अभी भारत में हाल में लगभग तेरह महीने तक लम्बा ऐतिहासिक किसान आंदोलन चला। जिसके फलस्वरूप ऐसा जनमत तैयार हुआ जिसके समक्ष पूर्ण बहुमत की सरकार को झुकना पड़ा।&nbsp;</p>



<p>निष्कर्षतः लोकतंत्र में जनमत की महत्वपूर्ण भूमिका होती हैं। भारत सहित तिसरी दुनिया के देशों में धार्मिक और सामाजिक समस्याओं में जनमत की अभिव्यक्ति तीव्रता से होती हैं जबकि राजनीतिक, आर्थिक और बुनियादी समस्याओं पर जनमत की अभिव्यक्ति कमजोर होती हैं। इधर मंडल और कंमडल के बाद भारतीय राजनीति में जातिवादी और साम्प्रदायिक नेताओं की लम्बी कतार उभर आई हैं।&nbsp; समाज में धार्मिक परम्पराएं और भावनाएं बहुत ही क्रियाशील सामाजिक शक्ति हुआ करती हैं। इसलिए धार्मिक और जातिवादी भावनाओं को भड़काने वाले नेताओं का प्रभाव जनमानस देखा जा रहा हैं। यह स्वस्थ जनमत निर्माण और स्वस्थ लोकतंत्र की दृष्टि खतरनाक प्रवृत्ति हैं। राजनीतिक, आर्थिक और बुनियादी समस्याओं पर जनमत का निर्माण करने की आवश्यकता है। जनमत मतदान आचरण और व्यवहार को भी प्रभावित करता है। स्वस्थ जनमत द्वारा हम स्वस्थ मतदान आचरण और व्यवहार अपना कर ईमानदार और जनता के पक्ष में काम करने वाली सरकार चुन सकते हैं। तभी भारतीय लोकतंत्र को महज मस्तक गणना करने वाला नहीं बल्कि जागरूक और जिन्दा मस्तिष्क वाला लोकतंत्र बना सकते हैं।&nbsp;</p>
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		<title>मंहगाई, भ्रष्टाचार और आर्थिक शोषण पर नियंत्रण और उपयुक्त आर्थिक नीतियों द्वारा दूर हो सकती हैं गरीबी!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[मनोज कुमार सिंह]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Feb 2023 15:44:54 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[भारत]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="960" height="637" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/FB_IMG_1675266137495.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="मंहगाई, भ्रष्टाचार और आर्थिक शोषण पर नियंत्रण और उपयुक्त आर्थिक नीतियों द्वारा दूर हो सकती हैं गरीबी!" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/FB_IMG_1675266137495.jpg 960w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/FB_IMG_1675266137495-300x199.jpg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/FB_IMG_1675266137495-768x510.jpg 768w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/FB_IMG_1675266137495-696x462.jpg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/FB_IMG_1675266137495-633x420.jpg 633w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/FB_IMG_1675266137495-313x208.jpg 313w" sizes="auto, (max-width: 960px) 100vw, 960px" title="मंहगाई, भ्रष्टाचार और आर्थिक शोषण पर नियंत्रण और उपयुक्त आर्थिक नीतियों द्वारा दूर हो सकती हैं गरीबी! 13">स्वाधीनता उपरांत गरीबी भारत में एक प्रमुख चुनौती रही हैं जो कमोबेश आज भी एक प्रमुख चुनौती बनी हुई है। इसलिए आमजनता को चट्टी चौराहों पर चुनावी चर्चा के दौरान जातिवादी समीकरणों की जोड़-तोड करने के बजाय गरीबी भूखमरी और कुपोषण जैसी चुनौतीपूर्ण समस्याओं के कारण और निवारण पर बहस करना चाहिए। स्वाधीनता उपरांत केन्द्र [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="960" height="637" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/FB_IMG_1675266137495.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="मंहगाई, भ्रष्टाचार और आर्थिक शोषण पर नियंत्रण और उपयुक्त आर्थिक नीतियों द्वारा दूर हो सकती हैं गरीबी!" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/FB_IMG_1675266137495.jpg 960w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/FB_IMG_1675266137495-300x199.jpg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/FB_IMG_1675266137495-768x510.jpg 768w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/FB_IMG_1675266137495-696x462.jpg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/FB_IMG_1675266137495-633x420.jpg 633w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/02/FB_IMG_1675266137495-313x208.jpg 313w" sizes="auto, (max-width: 960px) 100vw, 960px" title="मंहगाई, भ्रष्टाचार और आर्थिक शोषण पर नियंत्रण और उपयुक्त आर्थिक नीतियों द्वारा दूर हो सकती हैं गरीबी! 14">



<p>स्वाधीनता उपरांत गरीबी भारत में एक प्रमुख चुनौती रही हैं जो कमोबेश आज भी एक प्रमुख चुनौती बनी हुई है। इसलिए आमजनता को चट्टी चौराहों पर चुनावी चर्चा के दौरान जातिवादी समीकरणों की जोड़-तोड करने के बजाय गरीबी भूखमरी और कुपोषण जैसी चुनौतीपूर्ण समस्याओं के कारण और निवारण पर बहस करना चाहिए। स्वाधीनता उपरांत केन्द्र सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों ने गरीबी जैसी समस्या से निजात पाने के लिए तमाम नीतियां बनाई परन्तु आज भी गरीबी भूखमरी और कुपोषण जैसी समस्याएं&nbsp; हमारे नीति निर्माताओं के समक्ष एक गम्भीर चुनौती बनी हुई है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी सच्चे सनातनी और सच्चे वेदांती थे तथा विशुद्ध आध्यात्मिक प्रवृत्ति के राजनेता थें। परन्तु उन्होंने वैज्ञानिक और तार्किक दृष्टिकोण अपनाते हुए स्वीकार किया था कि-&#8220;गरीबी अभिशाप नहीं बल्कि मानव निर्मित षड्यंत्र है&#8221;। यह विचार प्रकट करते हुए महात्मा गांधी कल्याणकारी अर्थशास्त्रियों की परम्परा के प्रखर अर्थशास्त्री नजर आते हैं तथा एक जिम्मेदार और समाज के प्रति संवेदनशील राजनेता का परिचय देते हैं। भारत में गरीबी और दरिद्रता को दूर करने के लिए महात्मा गाँधी ने&nbsp; अंत्योदय का सिद्धांत प्रस्तुत किया था। समाज के प्रति संवेदनशील जिम्मेदार और ईमानदार बुद्धिजीवी, राजनेता और शासक कभी भी गरीबी को अभिशाप या आसमानी प्रकोप नहीं मान सकते हैं। गरीबी को अभिशाप मानना बुद्धिजीवी राजनेता और शासक-प्रशासक के लिए अपनी बौद्धिक, राजनैतिक , सामाजिक और शासकीय जिम्मेदारियों से मुंह मोडना हैं। विश्व के अधिकांश विकसित देशों ने दूरगामी और दूरदर्शितापूर्ण आर्थिक&nbsp; नीतियों के माध्यम से आम जनमानस को गरीबी और गुरूबत से बाहर निकालने का सफलतापूर्वक प्रयास किया है। ज्ञान विज्ञान के चमत्कार और आम जनमानस में उद्यमिता की चेतना विकसित कर आधुनिक काल में अधिकांश पश्चिमी दुनिया के देशों ने लोगों का जीवन स्तर उपर उठाने का प्रयास किया। विश्व के प्राचीन, अर्वाचीन और आधुनिक समाज के आर्थिक विकास- क्रम का ऐतिहासिक विश्लेषण किया जाए तो स्पष्टतः परिलक्षित होता हैं कि-शासक वर्ग द्वारा उत्पादकों और श्रमजीवियों का शोषण गरीबी का अनिवार्य कारण रहा हैं। राजतंत्रीय शासन व्यवस्थाओं में कुलीन वर्ग और पुरोहित वर्ग जन साधारण का मनमाना शोषण करते रहे हैं। इन राजतंत्रीय शासन व्यवस्थाओं में शासक अपने भोग-विलास शौक तथा शान-ओ-शौकत के लिए जनता पर मनमाना कर थोपते रहते थे। इसके साथ पुरोहित भी भोली-भाली जनता को अशुभ और अमंगल से भयाक्रांत कर तथा स्वर्ग-नरक का खेल दिखाकर भरपूर शोषण करते रहे हैं ।</p>



<p>स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के नारों के साथ लडी गई फ्रांसीसी क्रान्ति में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता हैं कि-फ्रांस में आम जनमानस ने कुलीनो और पादरियों के शोषण से तंग आकर तीव्रता से संघर्ष किया। फ्रांसीसी क्रान्ति की तरह आम जनमानस का शोषण करने वाले शासकों से आजिज आकर रूस सहित अन्य देशो के जन साधारण वर्ग द्वारा सफल संघर्ष किया गया। इस तरह विश्व की अधिकांश शासन व्यवस्थाओं में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से व्याप्त शोषण गरीबी के लिए स्पषट रूप से उत्तरदायी कारक रहा है। इसलिये प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से अर्थव्यवस्था में सक्रिय शोषण के समस्त औजारों को भोथरा करके आम जनमानस को गरीबी से मुक्ति दिलाई जा सकती हैं। आज विश्व की अधिकांश अर्थव्यवस्थाएं सामंतवादी अर्थव्यवस्था से पूंजीवादी अर्थव्यवस्था&nbsp; में परिवर्तित हो चुकी हैं तथा शोषण के औजार भी बदलते दौर के लिहाज़ से बदल चुके हैं। बदलते दौर के लिहाज़ से शोषण के नये औजारों को चिन्हित करना और उन्हें समाप्त करना जनतांत्रिक सरकारों की अनिवार्य जिम्मेदारी है। कुछ विश्लेषको के अनुसार भारतीय सामाजिक तथा आर्थिक व्यवस्था अर्द्ध सामंती तथा अर्द्ध पूंजीवादी प्रवृत्ति की हैं। इसलिए भारत में गरीबी से&nbsp; निजात पाने के लिए सांमती और पूंजीवादी दोंनो व्यवस्थाओं की शोषणकारी प्रवृत्तियों पर प्रहार करना होगा।&nbsp;</p>



<p>ज्ञान विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में जब अगणित आविष्कार होने लगे तो उद्योग धंधों का विकास होने लगा। उद्योग-धंधों के विकास के फलस्वरूप बाजारवादी अर्थत्ंत्र अस्तित्व में आया। बाजारवादी अर्थत्ंत्र में कालाबाजारी मुनाफाखोरी और जमाखोरी जैसे नये तरह के शोषण के&nbsp; औजारों का विकास हुआ तथा नये तरह के शोषकों का अभ्युदय हुआ। सरकार जब बाजार में अहस्तक्षेप की नीति का पालन करने लगती हैं तथा बाजार पर&nbsp; सरकार का&nbsp; नियंत्रण कमजोर हो जाता हैं तो जमाखोरी मुनाफाखोरी कालाबाजारी और मिलावटखोरी की प्रवृत्ति पूरी निर्लज्जता के साथ अपनी पराकाष्ठा पर होती हैं। जिसका स्वाभाविक परिणाम यह होता हैं कि-आवश्यक वस्तुएँ आम जनमानस की पहुँच से दूर होने लगती हैं तथा लोग गरीबी के दलदल में फंसते चले जाते हैं। अधिकांश विकासशील देश इन्हीं समस्याओं के कारण निर्धनता के दुष्चक्र से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। मुंशी प्रेमचंद ने अपने विभिन्न नाटकों और कहानियों में ग्रामीण जन-जीवन में व्याप्त&nbsp; मुख्यतः तीन प्रकार के शोषण का उल्लेख किया है।&nbsp;</p>



<p>मुंशी प्रेमचंद के अनुसार सामंतवाद, पुरोहितवाद और महाजनी व्यवस्था आम जनमानस के शोषण के सबसे सशक्त माध्यम थे। वर्तमान आधुनिक लोकतंत्र में भी चुने हुए जनप्रतिनिधियों में सामंतवादी चेतना गहरे रूप से व्याप्त है। जनता के उत्थान के लिए संचालित योजनाओं में लूट-खसोट करके निर्वाचित जनप्रतिनिधि बेशुमार दौलत के मालिक होते जा रहे हैं। इसी तरह तरह धर्म के आधुनिक ठेकेदार आस्था निष्ठा और श्रद्धा का बाजार खडा करके खूब काली कमाई कर रहे हैं। इसी तरह महाजनी व्यवस्था की प्रवृत्तियाँ आज भी बाजारवादी अर्थत्ंत्र में अपनी पराकाष्ठा पर हैं। भूमंडलीकरण उदारीकरण और निजीकरण के नारों के साथ 1991 में जिस नई अर्थव्यवस्था का आगाज किया गया वह विशुद्ध प्रतियोगिता और प्रतिस्पर्धा पर आधारित है। जिसमें अधिकतम मुनाफा प्राप्त करने के लिए मिलावट खोरी जमाखोरी को औजार बनाया गया। जमाखोरी बाजार की शक्तियों का एक ऐसा&nbsp; घिनौना षड्यंत्र है जिसके द्वारा बाजार में आवश्यक वस्तुओं के अभाव का शोर मचाया जाता हैं। इस कृत्रिम अभाव के शोर से आवश्यक वस्तुओं के दाम आसमान छूने लगते हैं। स्वाभाविक रूप से आवश्यक वस्तुओं के क्षेत्र में बेतहाशा बढती मंहगाई निर्धन लोगों की संख्या में बढोतरी करने में सहायक है।</p>



<p>भारत में स्वाधीनता उपरांत कल्याणकारी अर्थव्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए मिश्रित को अपनाया गया। कल्याणकारी अर्थव्यवस्था में आर्थिक संसाधनों का वितरण इस तरह से किया जाता हैं कि-अधिकतम लोगों की अधिकतम भलाई सुनिश्चित हो सके तथा सरकार आम जनमानस के पक्ष में बाजार को समय-समय पर निर्देशित और नियंत्रित करती रहे। स्वाधीनता उपरांत भारत में निर्धनता को दूर करने के लिए सुनियोजित तरीके से कोशिश की गई। भारतीय अर्थव्यवस्था का गम्भीरता से अवलोकन किया जाए तो ज्ञात होता है कि- भारत में&nbsp; निर्धनो की सर्वाधिक संख्या भूमिहीन श्रमिको के रूप मे पाई जाती है। भूमिहीन श्रमिको को गरीबी रेखा से बाहर निकालने के लिए भूमि सुधार कार्यक्रम चलाया गया। स्वाधीनता उपरांत बनने वाली भारत की प्रथम केन्द्रीय सरकार ने एक झटके में जमींदारी रैयतवारी और महालवाडी जैसी व्यवस्थाओं को समाप्त कर दिया गया। पश्चिम बंगाल और केरल में भूमि सुधार के कार्यक्रमो द्वारा निर्धनता की समस्या को काफी हद तक दूर करने का प्रयास किया गया। इसके अतिरिक्त प्रख्यात गांधीवादी संत विनोबा भावे ने भूदान आंदोलन के माध्यम से भूमिहीन मजदूरों को गरीबी रेखा से उपर उठाने का सार्थक प्रयास किया। इसके अतिरिक्त मानव संसाधन का समुचित विकास कर भी लोगों को गरीबी रेखा से उपर उठाया जा सकता है। केरल की सरकार ने मानव संसाधन के विकास के लिए शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में भरपूर निवेश किया। इस के प्रतिफल स्वरूप केरल विकसित राज्यो की श्रेणी में आ गया। भारत में गरीबी का एक महत्वपूर्ण कारण पराधीनता के समय ब्रिट्रिश साम्राज्य द्वारा अपनाई जानें वाली औपनिवेशिक नीतियाँ थी। इन औपनिवेशिक नीतियों के तहत अंग्रेजी सरकार ने परम्परागत भारतीय कृषि व्यवस्था और हस्तकला को बुरी तरह चौपट कर दिया था। इसलिए सत्तर के दशक में भारतीय कृषि में गतिशीलता लाने के लिए हरित क्रांति लाई गई। हरित क्रान्ति के फलस्वरूप पंजाब हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के जीवन में सम्पन्नता आई । प्रकारांतर से हरित क्रांति ने पंजाब हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लोगों को गरीबी रेखा से उपर उठाया।</p>



<p>हरित क्रान्ति की तरह श्वेत क्रांति और नीली क्रान्ति के माध्यम से पशुपालकों और मत्स्य पालको के जीवन में सम्पन्नता आई। महाराष्ट्र में सत्तर के दशक में सुनिश्चित रोजगार कार्यक्रमों द्वारा आम जनमानस को&nbsp; गरीबी रेखा से उपर उठाने का प्रयास किया गया। कालांतर में सुनिश्चित रोजगार कार्यक्रम सम्पूर्ण देश में चलाए गए । जो देश की अधिकांश आबादी को गरीबी रेखा से उपर उठाने मे सहायक सिद्ध हूए। इन कार्यक्रमों के अतिरिक्त आवश्यक खाद्य पदार्थों के क्षेत्र में सार्वजनिक वितरण प्रणाली लागू कर लोगों को गरीबी रेखा से उपर उठाने का प्रयास किया गया। जो तमिलनाडु जैसे राज्य में पर्याप्त रूप से सफल रहा।&nbsp;</p>



<p>आज हम चाॅद पर कदम रख चुके हैं परन्तु आज भी हर संवेदनशील व्यक्ति के मन मस्तिष्क  को मर्मान्तक पीड़ा पहुंचाने वाला तथ्य हैं कि- भारत में उन्नीस करोड़ लोग भूखे पेट सोते हैं तथा लगभग पैत्तीस करोड लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। उस दौर में जब भारत अंतराष्ट्रीय रंगमंच पर स्वयं को वैश्विक आर्थिक महाशक्ति के रूप में प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहा है यह आंकड़ा अत्यंत भयावह और भारत की एक बदरंग तस्वीर पेश कर रहा है। भारत में लगभग हर चौथा व्यक्ति गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहा है। विश्व के अधिकांश देशों की उतनी आबादी नहीं है जितनी भारत में     गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर करने वालों की आबादी हैं। कौशल विकास कार्यक्रमों द्वारा भारतीय युवाओं में उद्यमिता की चेतना जाग्रत कर , कालाबाजारी, जमाखोरी, मिलावटखोरी और मुनाफाखोरी जैसी प्रवृत्तियों पर लगाम लगाकर तथा कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण स्थापित कर आम जनमानस को गरीबी के दलदल में फंसने से बचाया जा सकता हैं । तकनीकी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा स्वास्थ में पर्याप्त निवेश द्वारा सुदक्ष और सक्षम मानव संसाधन का विकास करना गरीबी रेखा से उपर उठाने के लिये आवश्यक है। फलतः देश के नीति नियंताओं को दूरदर्शी तथा दूरगामी आर्थिक नीतियां बनाकर गरीबी के दुष्चक्र से भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहर निकालना होगा । इसके साथ मंहगाई और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण, कृषि आधारित लघु कुटीर उद्योगो को बढावा देकर, भूमि सुधार कानून को ईमानदारी से लागू कर और शिक्षा और स्वास्थ्य के माध्यम से मानव संसाधन में निवेश कर अधिकांश लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाया जा सकता है। </p>
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		<title>युवाओं को अपनी विरासत पर गर्व करने के लिए पढ़ना होगा इतिहास &#8211; कुलपति डॉ. पांडे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[कैलाश सनोलिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 21 Jan 2023 13:08:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[चर्चा]]></category>
		<category><![CDATA[समाज]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="960" height="554" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230121-WA0006.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="युवाओं को अपनी विरासत पर गर्व करने के लिए पढ़ना होगा इतिहास - कुलपति डॉ. पांडे" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230121-WA0006.jpg 960w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230121-WA0006-300x173.jpg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230121-WA0006-768x443.jpg 768w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230121-WA0006-696x402.jpg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230121-WA0006-728x420.jpg 728w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230121-WA0006-313x181.jpg 313w" sizes="auto, (max-width: 960px) 100vw, 960px" title="युवाओं को अपनी विरासत पर गर्व करने के लिए पढ़ना होगा इतिहास - कुलपति डॉ. पांडे 15">नागदा। अखिल भारतीय विधार्थी परिषद का उज्जैन जिला ग्रामीण सम्मेलन शनिवार को नरेंद्रमोदी खेल परिसर नागदा में हुआ। अभाविप  की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने पर समूचे देश भर में हुए सम्मेलन का यह आयोजन हिस्सा बना। जिले भर के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने समारोह में भाग लिया। समारोह की अध्यक्षता अभाविप राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="960" height="554" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230121-WA0006.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="युवाओं को अपनी विरासत पर गर्व करने के लिए पढ़ना होगा इतिहास - कुलपति डॉ. पांडे" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230121-WA0006.jpg 960w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230121-WA0006-300x173.jpg 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230121-WA0006-768x443.jpg 768w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230121-WA0006-696x402.jpg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230121-WA0006-728x420.jpg 728w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230121-WA0006-313x181.jpg 313w" sizes="auto, (max-width: 960px) 100vw, 960px" title="युवाओं को अपनी विरासत पर गर्व करने के लिए पढ़ना होगा इतिहास - कुलपति डॉ. पांडे 16"><p>नागदा। अखिल भारतीय विधार्थी परिषद का उज्जैन जिला ग्रामीण सम्मेलन शनिवार को नरेंद्रमोदी खेल परिसर नागदा में हुआ। अभाविप  की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने पर समूचे देश भर में हुए सम्मेलन का यह आयोजन हिस्सा बना। जिले भर के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने समारोह में भाग लिया। समारोह की अध्यक्षता अभाविप राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य योगेश रघुवंशी ने की। बतौर मुख्य अतिथि विक्रम विश्व विद्यालय उज्जैन कें कुलपति डॉ. अखिलेश पांडे ने शिरकत की। विशेष अतिथि अभाविप के राष्ट्रीय मंत्री डॉ .विरेंद्रसिंह सोलंकी थे। उदृघाटन समारोह को संबोधित करते हुंए मुंख्य अतिथि डॉ. पांडे ने कहा युवाओं को स्वामी विवेकानंद के जीवन से प्रेरणा लेना होगी। उन्होंनें आव्हान किया कि युवा अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहें। उन्होंने अफसोस भी जताया कि इन दिनों युवा अपने कर्तव्यों  से विचलित हो कर दूर भाग रहे हैं। लगभग 30 मिनट का आपका उद्रबोघन स्वामी विवेकांनद के दर्शन पर केंद्रित रहा। वे बोले़ विवेकानंद ने युवाओं को प्रेरित किया था और उन्होनं पांच  संकल्प युवाओं के समक्ष रखे थे। युवाओं को अपनी विरासत पर गर्व के लिए इतिहास पढना होगा। विवेकानंद के पांचों संकल्प पर प्रकाश डालते हुए कुलपति ने कहा विकसित भारत के लिए युवा सहभागी बने। गुलामी से मुक्ति, विरासत पर गर्व, एकता एवं एक जुटता, तथा नागरिकों का कर्तव्य ये पांच संकल्प विवेकानंद के युवाओं से थे।इन पांचे संकल्प पर कार्य करने के लिए विवेकानंद की युवाओं से अपेक्षा थी। कुलपति ने अपनी और से आव्हान किया जीवन में अच्छे कार्य करें जिससे राष्ट्र का निर्माण होगा। यह आयोजन अभाविप के नगर अध्यक्ष कृष्णपालसिंह नरूका एवं नगरमंत्री चेतन चौहान के संयोजन में हुआ।</p>
<p><strong>देश में आज सम्मेलन</strong><br />
समारोह में राष्ट्रीय महामंत्री डॉ सोलंकी ने कहा अभाविप ने  भारत देश को राष्ट्रभक्ति के सागर में डूबोया है। युवाओं को 18 वर्ष की उम्र में मताधिकार का अधिकार अभाविप की देन है। देश की त्रासदी से अभाविप ने संघर्ष भी किया है। जम्मू कश्मीर में तिरंगे का सम्मान भी दिलाया है। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए भी अभाविप नें अपनी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा अभाविप की स्थापना 1949 में हुई। यह वर्ष अभाविप की स्थापना का 75 वां वर्ष है। समूचे देश भर के जिलों में आज इसी प्रकार के सम्मेलन आयोजित है। अध्यक्षीय विचार में  परिषद के राष्ट्रीय नेता रघुवंशी ने भारत देश की प्राचीन खुबियों का बखान किया। वे बोले कुछ ताकतों ने देश की संप्रभुता को खंडित करने का प्रयास किया है। समारोह में जिला प्रमुख सुनील व्यास ने समस्याओं का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में आशुतोष राठौर ने भी विचार रखे। समारोह के साक्षी मप्र शासन असंगठित कामगार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष सुल्तानसिंह शेखावत, भाजपा के जिला कार्यकारिणी सदस्य डॉ तेजबहादुरसिंह चौहान, पूर्व नपा उपाध्यक्ष रामसिंह शेखावत, पूर्व नपा उपाध्यक्ष राजेश धाकड़ जनभागीदारी समिति अध्यक्ष अमित सेठी,  भाजपा नेता अनिल जोशी, धर्मेद्र गुप्ता एवं मजदूर नेता सत्यनारायण शर्मा भी बने। संचालन कुमारी श्रद्धा रावल ने किया, कार्यक्रम समापन के बाद छात्र-छात्राओं की एक शोभायात्रा शहर के मुख्य मार्गो से निकली। जिसमें जिलें भर के ग्रामीण अंचल महिदपुर, बड़नगर, तराना, उन्हेल, घटिया, खाचरौद एवं उज्जैन आदि के विधार्थियों ने भाग लिया।</p>
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		<title>उद्योग मजदूरों के अन्याय एवं शोषण के खिलाफ सड़को पर उतरेगी आम आदमी पार्टी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[कैलाश सनोलिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Jan 2023 14:52:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चर्चा]]></category>
		<category><![CDATA[भारत]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="960" height="1280" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230113-WA0005.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="उद्योग मजदूरों के अन्याय एवं शोषण के खिलाफ सड़को पर उतरेगी आम आदमी पार्टी" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230113-WA0005.jpg 960w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230113-WA0005-225x300.jpg 225w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230113-WA0005-768x1024.jpg 768w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230113-WA0005-696x928.jpg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230113-WA0005-315x420.jpg 315w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230113-WA0005-313x417.jpg 313w" sizes="auto, (max-width: 960px) 100vw, 960px" title="उद्योग मजदूरों के अन्याय एवं शोषण के खिलाफ सड़को पर उतरेगी आम आदमी पार्टी 17">नागदा। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिला कांग्रेस कार्यवाहक का अध्यक्ष पद छोड़ कर आम आदमी पार्टी में शामिल हुए सुबोध स्वामी शुक्रवार को सर्किैट हाउस नागदा पर प्रेस से रूबरू हुए। अपनी पहली प्रेसवार्ता में उन्होंने आम पार्टी में अपनी प्राथमिकताओं को गिनाया। इस मौके पर कहा ,स्थानीय ग्रेसिम उद्योग में जारी मजदूरों के अन्याय [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="960" height="1280" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230113-WA0005.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="उद्योग मजदूरों के अन्याय एवं शोषण के खिलाफ सड़को पर उतरेगी आम आदमी पार्टी" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230113-WA0005.jpg 960w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230113-WA0005-225x300.jpg 225w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230113-WA0005-768x1024.jpg 768w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230113-WA0005-696x928.jpg 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230113-WA0005-315x420.jpg 315w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2023/01/IMG-20230113-WA0005-313x417.jpg 313w" sizes="auto, (max-width: 960px) 100vw, 960px" title="उद्योग मजदूरों के अन्याय एवं शोषण के खिलाफ सड़को पर उतरेगी आम आदमी पार्टी 18">



<p>नागदा। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिला कांग्रेस कार्यवाहक का अध्यक्ष पद छोड़ कर आम आदमी पार्टी में शामिल हुए सुबोध स्वामी शुक्रवार को सर्किैट हाउस नागदा पर प्रेस से रूबरू हुए। अपनी पहली प्रेसवार्ता में उन्होंने आम पार्टी में अपनी प्राथमिकताओं को गिनाया। इस मौके पर कहा ,स्थानीय ग्रेसिम उद्योग में जारी मजदूरों के अन्याय शोषण एवं उत्पीड़न के खिलाफ आम आदमी पार्टी मैदान में उतरेगी। साथ ही स्थानीय युवाओं को उद्योग में रोजगार दिलाना भी प्राथमिकता में शामिल है। प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस पार्टी में कार्यकर्ताओं की जारी उपेक्षा को लेकर वह जमकर गरजे। यहां तक बोल गए कि &nbsp; स्थानीय कांग्रेस नेतृत्व की सतापक्ष से कथित सांठगांठ है। जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। पहले तो वे इशारे-इशारे में क्षेत्र के कांग्रेस विधायक दिलीपसिह गुर्जर पर निशाना साधते रहे,लेकिन मीडिया के द्वारा कुरेद ने पर वे विधायक श्री गुर्जर&nbsp; का नाम उजागर करने में भी नहीं चुके। वे बोलेे आम आदमी पार्टी में उनके जाने के बाद तो अब श्री गुर्जर ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं की पूछ परख भी शुरू कर दी है।&nbsp; इतना नहीं सुबोध ने सत्ता पक्ष अर्थात भाजपा के राजनेताओं पर भी जनता की उपेक्षा करने की भड़ास निकाली। वे बोले सता के राजनेताओं में&nbsp; अहंकार की अंतिम पराकाष्ठा हैै । सभी दूर भ्रष्टाचार से जनता परेशान है। जनता के पास कोई विकल्प नहीं है। आम आदमी पार्टी अब जनता के सामने एक विकल्प बनकर मजबूती से खड़ी होगी। उन्होंने घोषणा की कि शीध्र नागदा में आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं का एक जिला सम्मेलन किया जाएगा। जिसमें पार्टी के उच्च राजनेताओं को शामिल करने का प्रयास होगा।</p>



<p>विधानसभा चुनाव लड़ने का सवाल : इस मौके पर हिंदुस्तान समाचार एजेंसी , संवाददाता का सवाल थाकि आगामी 10 माह के बाद मप्र में विधानसभा चुनाव है। गुजरात के बाद मप्र में आम आदमी पार्टी चुनाव&nbsp; में उतरने की घोषणा कर चुकी है। ऐसी स्थिति में&nbsp; नागदा-.खाचरौद विधानसभा में क्या वे मैदान में उतरेंगे। इस सवाल पर उन्होंने स्पष्ट खुलासा नहीं करते हुए संगठन पर छोड़ दिया। इस दौरान कांग्रेस नेता अयूब&nbsp; मेव ने आप आदमी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कीै। प्रेसवार्ता में आम आदमी पार्टी के भंवरसिंह एवं हेनरी मचार भी उपस्थित मौजूद थे</p>



<p>राजनेताओं के घर नपा के कर्मचारी : एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहां स्थानीय नगरपालिका में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। इसके खिलाफ मैंदान में उतरेंगे। उन्हें बताया गया नपा के कई कर्मचारी वेतन तो नपा से ले रहे और कार्य सतापक्ष के राजनेताओं के घर पर कार्य कर रहे हैं। सुबोध बोले, ऐसे राजनेताओं के नाम उजागर&nbsp; कर इस प्रकार की बुराई पर रोक लगाने के लिए आगे आएंगे।</p>
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		<title>राष्ट्रीय आरटीआई वेबीनार- डाटा प्रोटक्शन बिल के खिलाफ उठी आवाज।</title>
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		<dc:creator><![CDATA[कैलाश सनोलिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 01 Jan 2023 13:04:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चर्चा]]></category>
		<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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		<category><![CDATA[आंदोलन]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="1200" height="630" src="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/11/The-Harishchandra-News-Image.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="The Harishchandra News Image" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/11/The-Harishchandra-News-Image.png 1200w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/11/The-Harishchandra-News-Image-300x158.png 300w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/11/The-Harishchandra-News-Image-1024x538.png 1024w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/11/The-Harishchandra-News-Image-768x403.png 768w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/11/The-Harishchandra-News-Image-696x365.png 696w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/11/The-Harishchandra-News-Image-1068x561.png 1068w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/11/The-Harishchandra-News-Image-800x420.png 800w, https://theharishchandra.com/hindi/wp-content/uploads/sites/2/2022/11/The-Harishchandra-News-Image-313x164.png 313w" sizes="auto, (max-width: 1200px) 100vw, 1200px" title="राष्ट्रीय आरटीआई वेबीनार- डाटा प्रोटक्शन बिल के खिलाफ उठी आवाज। 19">नागदा। भारत सरकार के प्रस्तावित डेटा प्रोटेक्शन बिल 2022-23 के वर्तमान मसौदे में सूचना के अधिकार कानून को दुष्प्रभावी ढंग से संशोधित किए जाने के मुद्दे को लेकर देश के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता, आरटीआई क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों एवं वरिष्ठ सामाजिक संगठनों ने एक बार पुनः मोर्चा खोल दिया है। रविवार सुबह 11:00 से [&#8230;]]]></description>
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<p>नागदा। भारत सरकार के प्रस्तावित डेटा प्रोटेक्शन बिल 2022-23 के वर्तमान मसौदे में सूचना के अधिकार कानून को दुष्प्रभावी ढंग से संशोधित किए जाने के मुद्दे को लेकर देश के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता, आरटीआई क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों एवं वरिष्ठ सामाजिक संगठनों ने एक बार पुनः मोर्चा खोल दिया है।</p>



<p>रविवार सुबह 11:00 से दोपहर 1:00 के बीच में आयोजित&nbsp; राष्ट्रीय स्तर के वेबीनार में भारत सरकार के प्रस्तावित डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल 2022-23 के वर्तमान मसौदे में आरटीआई कानून को संशोधित किए जाने के डेटा बिल के धारा 29(2) और 30(2) पर आपत्ति जाहिर करते हुए देश के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता एवं मजदूर किसान शक्ति संगठन के सह संस्थापक निखिल डे, गुजरात महिती गुजरात पहल की संस्थापक पंक्ति जोग, वर्तमान मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह एवं पूर्व मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप ने प्रस्तावित डेटा बिल से संशोधनों को वापस लिए जाने की मांग की है जिसके पारित होने के बाद आरटीआई कानून लगभग समाप्त हो जाएगा।</p>



<p>कार्यक्रम का आयोजन आरटीआई रिवॉल्यूशनरी ग्रुप से सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के संचालन में किया गया जिसमें सहयोगियों के तौर पर अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा, आर टी आई कार्यकर्ता देवेंद्र अग्रवाल, पत्रिका समूह के वरिष्ठ पत्रकार मृगेंद्र सिंह सहित आरटीआई ग्रुप के आईटी सेल के प्रभारी पवन दुबे सम्मिलित रहे।</p>



<p>संसद में बिल पारित कर आरटीआई कानून को बनाया जाए मौलिक अधिकार &#8211; निखिल डे</p>



<p>प्रस्तावित डेटा बिल के माध्यम से दुष्प्रभावी ढंग से आरटीआई कानून में किए जाने वाले गलत संशोधनों को लेकर इस विषय पर पहली बार राष्ट्रीय आर टी आई वेबीनार में सम्मिलित हुए मजदूर किसान शक्ति संगठन और एनसीपीआरआई के सह-संस्थापक निखिल डे ने कहा की आरटीआई कानून लाने के लिए राजस्थान से एमकेएसएस और उससे जुड़े हुए मजदूरों और किसानों के कई संगठन ने आंदोलन किया था और तब हमें आरटीआई कानून के विषय में ज्यादा जानकारी भी नहीं थी। लेकिन कानून को पारित करवाने के लिए आम नागरिकों और मजदूरों के प्रयास महत्वपूर्ण रहे हैं। मस्टर रोल की जानकारी से लेकर खाद्यान्न और राशन कार्ड से संबंधित छोटी-छोटी जानकारियों को लेकर यह आंदोलन प्रारंभ हुआ और हमें आरटीआई कानून मिला। लेकिन सरकार ने वर्ष 2005 में कानून लाने के बाद ही विभिन्न स्तरों पर दुष्प्रभावी संशोधन करने के प्रयास किए जिससे कुछ हद तक आरटीआई कानून कमजोर भी हुआ है। लेकिन प्रस्तावित डेटा प्रोटक्शन बिल के मसौदे के माध्यम से किए जाने वाले आरटीआई कानून की धारा 8(1)(जे) में संशोधन और साथ में ओवरराइडिंग इफेक्ट खत्म किए जाने से आरटीआई कानून लगभग खत्म हो जाएगा और वह सब जानकारियां नागरिकों को नहीं मिलेंगी जो अब तक पब्लिक पोर्टल पर उपलब्ध होती है। उन्होंने बताया कि सामाजिक कार्यकर्ता और मजदूर किसान शक्ति संगठन की वरिष्ठ कार्यकर्ता अरुणा राय ने मनरेगा कार्यकर्ताओं के अधिकारों के लड़ने की बजाय पहले आरटीआई कानून में हो रहे संशोधनो के विरोध में गांव गांव जाकर मुहिम छेड़ दी है। श्रीमती अरुणा राय का कहना है कि यदि आरटीआई कानून ही नहीं रहेगा तो मनरेगा की कोई जानकारी हमें मिल ही नहीं पाएगी इसलिए सबसे पहले आरटीआई कानून को बचाओ इसके बाद मनरेगा की बात करो।</p>



<p>आरटीआई कानून के महत्व को एक बार पुनः रेखांकित करते हुए निखिल डे ने बताया कि आज आरटीआई कानून को सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न आदेशों में मूलभूत मौलिक अधिकार के तौर पर बताया गया है। सुप्रीम कोर्ट का पुत्तास्वामी जजमेंट सहित कई ऐसे जजमेंट है जहां सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेशों में आरटीआई कानून को फंडामेंटल राइट्स बताया है।&nbsp; जहां तक सुप्रीम कोर्ट का सवाल है तो ठीक है लेकिन अब समय आ गया है कि सूचना के अधिकार कानून को संसद में विधिवत अधिनियम बनाकर पारित करते हुए फंडामेंटल राइट्स बनाया जाए। श्री डे ने बताया की वह तीन सुझाव विशेष तौर पर रखते हैं जिसमें आरटीआई कानून को संसद में अधिनियम पारित करते हुए फंडामेंटल राइट बनाया जाना, विभिन्न सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं द्वारा प्रस्तावित डेटा प्रोटेक्शन बिल से आरटीआई कानून में कौन-कौन सी जानकारी नहीं प्राप्त हो पाएगी उसकी सूची तैयार कर प्रतिदिन लोगों के बीच में जाकर उन्हें जागरूक किया जाना और तीसरी सबसे बड़ी बात अब ऑनलाइन और डिजिटल माध्यमों को साथ में रखते हुए गांव-गांव शहर-शहर और हर कस्बे में जाकर लोगों को जागरूक किया जाना और इसे आंदोलन का रूप दिया जाना अत्यंत आवश्यक है। मजदूर किसान शक्ति संगठन के संस्थापक ने बताया कि एक बार पुनः आरटीआई कानून को बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है जिसे बचाना हमारे देश के हर नागरिक की जिम्मेदारी है। अन्यथा वह समय दूर नहीं जब निजी और प्राइवेट जानकारी के नाम पर हमें छोटी से छोटी जानकारी भी नहीं मिलेगी। हमें अपने राशन पेंशन भ्रष्टाचार से संबंधित जांच और अधिकारियों पर होने वाली कार्यवाही, मनरेगा के मस्टरोल, किसी भी प्रोजेक्ट के लिए आने वाली राशि और उसके द्वारा कराए जाने वाले कार्य जैसे सैकड़ों ऐसी जानकारियां हैं जो यदि डेटा प्रोटक्शन बिल अपने प्रस्तावित मसौदे में पारित हो जाता है तो निजता और प्राइवेसी और निजी जानकारी के नाम पर लोक सूचना अधिकारियों के द्वारा मना कर दी जाएगी। इसलिए अब समय आ गया है कि हमें डेटा बिल से ऐसे समस्त प्रावधानों को हटाने की मांग करनी चाहिए जिससे आरटीआई कानून पर दुष्प्रभाव पड़ेगा और आरटीआई कानून कमजोर होकर मात्र कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।</p>



<p>गुजरात में आंदोलन करना मुश्किल, सरकार आंदोलनकारियों के ऊपर दर्ज कर रही फर्जी मुकदमे &#8211; पंक्ति जोग</p>



<p>माहिती गुजरात पहल और आरटीआई हेल्पलाइन गुजरात की संयोजक आरटीआई एक्टिविस्ट पंक्ति जोग ने बताया कि गुजरात में उनके और उनकी टीम द्वारा डेटा प्रोटक्शन बिल के माध्यम से सूचना के अधिकार कानून में किए जा रहे दुष्प्रभावी बदलाव को लेकर जन जागरूकता फैलाई जा रही है। लेकिन जन जागरूकता के माध्यम, पत्रों के माध्यम से लेख किया जाना, सोशल मीडिया और ईमेल के माध्यम से संदेश भेजा जाना जैसी सीमित प्रक्रियाओं का ही उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गुजरात में सरकार दमनकारी नीतियां अपना रही है और सरकार की गलत नीतियों के विरोध में यदि आवाज उठाई जाती है तो उसे दबाने का प्रयास किया जाता है। पंक्ति जोग ने कहा की गुजरात में आज सभा करना और शांतिपूर्ण आंदोलन पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है जिसकी वजह से हम यदि समूह में इकट्ठा होकर यदि आंदोलन करते हैं अथवा ज्ञापन सौंपने जाते हैं उन स्थितियों में सरकार हमारे ऊपर फर्जी मुकदमे लाद रही है। पंक्ति जोग ने बताया कि आरटीआई कानून पर एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है और उसके लिए पूरे देश में सभी कार्यकर्ताओं को मिलकर प्रयास करने की जरूरत है तभी हमें सफलता प्राप्त हो पाएगी।</p>



<p>आरटीआई कानून को बचाने जन जागरूकता आवश्यक &#8211; आत्मदीप</p>



<p>कार्यक्रम में एक बार पुनः अपने विचार रखते हुए पूर्व मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप ने बताया कि कार्यक्रम में जुड़े हुए सभी कार्यकर्ताओं को अधिक से अधिक जानकारी डेटा प्रोटक्शन बिल के दुष्प्रभावों को लेकर आरटीआई कानून पर किए जाने वाले दुष्प्रभावी संशोधन वाली बात जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है। साथ में जिन आरटीआई कार्यकर्ताओं ने अब तक ज्ञापन सौंपे हैं अथवा जो भी अब तक प्रयास किए हैं वह बात वेबीनार में और अन्य सोशल मीडिया के माध्यम से रखे जिससे सरकार के साथ आम नागरिको को भी जागरूक किया जा सके। आत्मदिप ने बताया कि हमारी जिम्मेदारी है कि हम अधिक से अधिक देश की जनता को डेटा प्रोटक्शन बिल द्वारा आरटीआई कानून के दुष्प्रभावी संशोधनों को लेकर किए जा रहे प्रयास जिसमें आरटीआई कानून पर बुरा प्रभाव पड़ेगा यह बात अधिक से अधिक आमजन के समक्ष पहुचाई जानी चाहिए जिससे आमजन को भी आंदोलन में सम्मिलित किया जा सके। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार को इस बात का पता नहीं चलता की जनता आरटीआई कानून में गलत संशोधनों के खिलाफ है तब तक सरकार के कान में जूं नहीं रेंगने वाली। इसलिए हम सब की सामूहिक जिम्मेदारी है कि इस दिशा में सार्थक प्रयास किए जाने चाहिए।</p>



<p>आरटीआई कानून में संशोधन करने से कानून कमजोर पड़ेगा, डेटा बिल के नाम पर आरटीआई कानून कमजोर न किया जाए &#8211; राहुल सिंह</p>



<p>वर्तमान मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने बताया कि आरटीआई कानून पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने वाला कानून है जिसकी वजह से आज हमें काफी महत्वपूर्ण जानकारियां आसानी से प्राप्त हो रही है। उन्होंने बताया कि कैसे अभी हाल ही में मध्यप्रदेश के परिपेक्ष में डॉक्यूमेंट रूल को लेकर उन्होंने एक आदेश पारित किया है जिसमें मध्य प्रदेश सरकार को सरकारी दस्तावेजों के रखरखाव और उनके विनष्टीकरण को लेकर विधिवत अधिनियम बनाए जाने तक केंद्र सरकार के द्वारा जिस प्रकार कागजात के संरक्षण और उन को नष्ट करने पर दंड विधान है वह सभी पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। राहुल सिंह ने बताया की हम सभी सूचना आयुक्त के तौर पर प्रयास कर रहे हैं जब तक आरटीआई कानून मजबूत है लेकिन जब आरटीआई कानून को कमजोर कर दिया जाएगा उन स्थितियों में सूचना आयुक्तों के पास भी शक्तियां नहीं रहेंगी कि वह आज जैसे कई महत्वपूर्ण निर्णय दे सकें। दुष्प्रभावी संशोधनों के बाद हम सबके हांथ बांध दिए जायेंगे। उन्होंने कहा की आज यदि डेटा प्रोटक्शन बिल की आवश्यकता है तो निश्चित तौर पर उससे कहीं अधिक आरटीआई कानून की आवश्यकता है इसलिए ऐसा कोई भी बिल न तो वर्तमान में और न ही भविष्य में पारित किया जाना चाहिए जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर बुरा प्रभाव पड़े।</p>



<p>कार्यक्रम में उत्तराखंड से आरटीआई रिसोर्स पर्सन और इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार ठक्कर, छत्तीसगढ़ से आरटीआई कार्यकर्ता देवेंद्र अग्रवाल, जोधपुर राजस्थान से नरेंद्र सिंह राजपुरोहित सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने भी अपने विचार रखे और बताया कि आरटीआई कानून को कमजोर किया जाना लोकतंत्र को कमजोर किया जाना है इसलिए सभी को मिलकर डेटा प्रोटक्शन बिल की ऐसी धाराओं को हटाए जाने की मांग करनी चाहिए जिससे सूचना के अधिकार कानून पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है।</p>
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