नफरत भस्मासुर : टाप भाजपाई परिवार को भी नहीं बख्श रही

नफरत भस्मासुर : टाप भाजपाई परिवार को भी नहीं बख्श रही

शकील अख्तर : नफरत का एक सिद्धांत होता है। जब तक आप उसके साथ हैं वह आपको नहीं छेड़ती मगर जैसे ही उससे दूर गए वह आपको नहीं बख्शती। चाहे आपने एक शब्द प्रेम ही कहा हो वह आप पर हमालवर हो जाएगी। नफरत के लिए प्रेम सौत है। जो एक बार चाहे वह व्यक्ति हो, समुदाय हो, समाज हो, देश हो नफरत और विभाजन के चक्कर में फंस गया उसका उससे निकलना मुश्किल हो जाता है। इंसान नफरत में ही जीने को अभिशप्त हो जाता है। बर्बाद होता जाता है मगर नशे में डूबा व्यक्ति जिस तरह नशे को ही ताकत मानता है वैसे ही बर्बादी को अपनी शान समझने लगता है।

नफरत भस्मासुर : टाप भाजपाई परिवार को भी नहीं बख्श रही

नफरत भस्मासुर : टाप भाजपाई परिवार को भी नहीं बख्श रही

नफरत भस्मासुर : टाप भाजपाई परिवार को भी नहीं बख्श रही

मध्य प्रदेश जहां नफरत की नई फसल बोई जा रहा है वहां से आई एक खबर सबके लिए आई ओपनर ( आंख खोलने) का काम करने वाली होना चाहिए। मध्य प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा की पत्नी डा. स्तुति मिश्रा भक्तों और ट्रोलों का शिकार हो गईं। दुःखी होकर उन्हें अपना एक ट्वीट डिलीट करना पड़ा और लिखना पड़ा कि सामान्य धार्मिक बात करना भी मुश्किल है। क्या ट्वीट किया था डा. स्तुति ने? उन्होंने लिखा था कि रात को एक दवा की जरूरत थी। सब दुकानें बंद थीं। सिर्फ एक मुस्लिम दुकानदार की मेडिकल शाप खुली थी। मैं और ड्राइवर उस दुकान पर पहुंचे दवा ली। दुकानदार बोला दीदी ये वाली मेडिसन से नींद आती है कम ड्राप दीजिएगा। वह मुस्लिम कितना केयरिंग था।

इतना लिखना भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की पत्नी जो खुद साइंस की ( प्लांट ब्रीडिंग, जेनेटिक्स) की स्कालर हैं मुश्किल पड़ गया। यह नया भारत हम बना रहे हैं। माहौल इतना गंदा कर दिया गया है कि वह सब परिचय भी लिखना पड़ते हैं जो कभी नहीं लिखे। इसलिए बताना पड़ रहा है कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष, ब्राह्मण। पत्नी डाक्टर, ब्राह्म्ण। मगर नफरत की जो आग लगाई है वह क्या किसी को छोड़ेगी? सुषमा स्वराज तो और बड़ी नेता थीं। उन्हें किस तरह ट्रोल किया गया था? भक्तों ने उनके पति से कहा था कि जब वे घर आएं तो बाल पकड़कर, घसीटकर उनकी पिटाई करना। और बख्शा तो भाजपा को पहली बार प्रधानमंत्री की कुर्सी दिलवाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी को भी नहीं था। उस समय तो फीजिकल ट्रोलिंग होती थी। तो वे उसके शिकार बने थे। 2002 में राजधर्म की सलाह देने के बाद। आडवानी को तो आज भी एंकातवास में रहना पड़ रहा है। यह नफरत की राजनीति के परिणाम हैं। नेहरू ने देश को प्रेम से सींचा था। वाजपेयी, लोहिया, जयप्रकाश सब कट्टर विरोधी मगर नेहरू के इनके प्रति प्रेम में कभी कमी नहीं आई।

आज बहुत मुश्किल सवाल है कि क्या भाजपा और संघ परिवार वास्तव में यह समझते हैं कि जिस रास्ते पर यह देश को ले जा रहे हैं वह प्रगति का रास्ता है? भारत मजबूत बनेगा? किसी को नकली दुश्मन बनाकर उससे कब तक लड़ेंगे? और लड़ने का जो हथियार हो वह तो नफरत ही है। उसी को फैलाते हैं। रोज नई नई अफवाहें फैलाकर। व्हट्सएप के लाखों ग्रुपों के जरिए। टीवी चैनलों की डिबेटों के जरिए। हर बार नया इशु लाते हैं। नए वायरस की तरह। घर वापसी से शुरू किया था। फिर लव जिहाद, गाय, लींचिंग, तीन तलाक से होते हुए हिजाब, हलाल, अजान सब कर लिया। मगर तनाव को दंगों तक नहीं ले जा पाए। तो अब देश में सबसे ज्यादा मान्यता वाली रामनवमी और हनुमान जयंती को ही विवाद में ले आए। उनके जुलूसों में डीजे पर बजते भड़काऊ गाने, जिन्हें भजन का भी अपमान करते हुए भजन कह रहे हैं, तलवारें, पिस्तौलें लेकर मस्जिद में भगवा फहराने की जिद क्या भगवान राम और हनुमान का सम्मान है? प्रतिक्रिया में दूसरी तरफ से पत्थर चल रहे हैं क्या इससे किसी को अच्छा लग रहा है? भगवान को भी! राम तो प्रजा वत्सल थे।

रामनवमी तो हमेशा मनती रही है। दूसरे धार्मिक जुलूस भी हमेशा से निकलते रहे हैं। और सब मिलजुलकर निकलाते रहे हैं। अभी भी देख रहे हैं कि कई जगह मुसलमान फूलों की वर्षा कर रहे हैं। खुद रोजे से हैं मगर शरबत, कोल्ड ड्रिंक पिला रहे हैं। ऐसे ही मुसलमानों के बारह बफात, मोहरर्म के जुलूसों में हिन्दुओं की भागीदारी रहती है। कई हिन्दू घरों में ताजिए रखे जाते हैं। ऐसे ही जाने कितनी रामलीलाओं के आयोजक मुसलमान होते हैं। भारत में यह कोई नई बात नहीं है। मगर अब इन्हें भी विवाद के विषय बनाकर मामला दिल्ली, खरगोन झारखंड, बिहार प. बंगाल और कई जगह दंगे तक ले जाया गया।

कोरोना का नया खतरा फिर से पैदा हो गया। कई जगह मास्क फिर से अनिवार्य कर दिया गया है। मंहगाई, बेरोजगारी अपने रिकार्ड स्तर पर है। मगर इन सबसे लड़ने के बदले नफरत और विभाजन के नए नए डोज दिए जा रहे हैं। जेल भी इन्हें नहीं डरा रहा है। जमानiत पर वापस आकर और झूठे, उग्र, भड़काऊ बयान दे रहे हैं। बहुसंख्यकों को डराने के लिए एक शिगुफा छोड़ दिया कि 2029 में मुसलमान प्रधानमंत्री बन जाएगा। हेट स्पीच के मामले में यति नरसिंहानंद गिरफ्तार हुए। बाहर आते ही उन्हें एक नई थ्योरी थमा दी गई। वे कह रहे हैं कि आधे हिन्दू धर्म परिवर्तन कर लेगें और 40 प्रतिशत मार दिए जाएंगे। उनका यह वीडियो खूब सुनाया जा रहा है। क्या असर हो रहा है इसका? लोग भड़क रहे हैं। एक और नए कथा वाचक मध्य प्रदेश में अपने श्रोताओं से कह रहे हैं कि बुलडोजर उठाओ और चलो।

आज तो यह सब मुसलमानों के खिलाफ कहा जा रहा है। मगर है तो यह भस्मासुर की तरह। कब किस के सिर पर हाथ रख दे किसे पता। मध्य प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष जो संघ से आते हैं की पत्नी के सिर पर रख ही दिया था। दुनिया भर में भारत की यह शोहरत फैल रही है। नफरतों को पालता, फैलाता देश। और उस पर तुर्रा यह कि अखंड भारत बनाएंगे। अभी तो हिन्दुओं की झूठी आबादी कम करके मुसलमान प्रधानमंत्री बना रहे हैं। मगर जब पाकिस्तान, बांग्ला देश, अफगानिस्तान के मुसलमानों को भी अखंड भारत में शामिल कर लोगे तब तो वैसे ही मुसलमानों की आबादी बहुत बढ़ जाएगी। आधे के करीब हो जाएंगे। फिर क्या करोगे? तब तो मुस्लिम प्रधानमंत्री के नाम से तुम्हारा डराना सच भी हो सकता है। हालांकि इस बात को सभी मुस्लिम नेता साफ तौर पर कह चुके हैं कि किसी अल्पसंख्यक (मुसलमान) का बहुसंख्यक आबादी का नेतृत्व करने का न कोई चांस है न जरूरत। फारुक अब्दुल्ला ने इसे बहुत स्पष्ट तरीके से तब कहा था जब वीपी सिंह, चन्द्रशेखर, देवगौड़ा, गुजराल एक के बाद एक बन रहे थे तब यह मजाक भी चल पड़ा था कि अब तो कोई भी बन सकता है। तब फारुक ने श्रीनगर में हमें दिए एक इंटरव्यू में ही यह बात कही थी कि मुसलमान भारत का प्रधानमंत्री नहीं बन सकता। और यह भी कहा था कि बनने की जरूरत भी नहीं है। मगर कहा जा रहा है। अपने ही लोगों को डराया जा रहा है। दूसरी तरफ अखंड भारत भी बनाया जा रहा है।

यह सब क्या है? दरअसल यह अपने ही लोगों को बेवकूफ समझना है। दलित, पिछड़े, बेरोजगार अनजान लड़कों की जो भीड़ धार्मिक यात्राओं में इकट्ठी की जा रही है। उन्हें कुछ नहीं मालूम। बस एक बात मालूम है कि पुलिस कार्यवाही नहीं करेगी। बाकी उनका सम्मान किया जाता है। वीर बहादुर कहकर भगवा गमछा, माला पहनाई जाती है। पैसा, खाना पीना सब का इंतजाम होता है। फिर उन का दोष क्या? किस बात की चिन्ता।

मगर इन लड़कों को नहीं मालूम कि असली दुश्मन वे हैं। अगर पढ़ लिख गए नौकरी मांगी तो सबसे कड़े हमले उन्हीं पर किए जाएंगे। मुसलमान भारत में दलित पिछड़ों की ढाल हैं। आड़ हैं। मुसलमान राजनीतिक निशाना हैं। उन पर हमला करके हिन्दुओं का घ्रुवीकरण किया जाता है। वोट मिल रहे हैं। लेकिन दलित और पिछड़ों को तो शिक्षा, नौकरियों, व्यवसाय हर जगह अपना हिस्सा चाहिए। सामाजिक न्याय, बराबरी का अधिकार चाहिए। इसलिए उन्हें नफरत के नशे में डूबो दिया गया है। मुसलमानों का काल्पनिक भय दिखाकर उन्हें फ्रंट पर लगा दिया गया है। किसी बड़े नेता के बच्चे कभी तलवार लहराते, उग्र नारे लगाते दिखे?

जो भी हो लगता है अब बात प्रधानमंत्री मोदी के हाथ से निकल गई है। दुनिया भर में भारत के उग्र प्रदर्शनों वाले वीडियो और हेट स्पीचें वायरल हो रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी अपनी अन्तरराष्ट्रीय छवि को लेकर बहुत चिन्तित रहते हैं। मगर आज वे शांति की एक मामूली अपील भी नहीं कर पा रहे हैं। क्या भारत अराजकता की तरफ जा रहा है? अभी कहना जल्दबाजी होगी। मगर जिस तरह न्यायपालिका, पुलिस, प्रशासन को अपंग कर दिया गया है वह बहुत चिन्ताजनक है। देश बहुत बढ़ा है। भारी विभिन्नताओं को लिए हुए। प्रेम, उदारता, समावेशी नीतियों, एक दूसरे का सम्मान से ही एकजुटता है। हिंसा, नफरत, विभाजन से देश कमजोर ही होगा। ताकतवर नहीं बना रह सकता।

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