राजस्थान में कोरोना की दूसरी लहर : लोग है कि मानते ही नहीं

जयपुर। प्रदेश में कोरोना की सख्ती के बाद कोई 40 दिन बाद 23 घंटे में ही नए कोरोना संक्रमितों में 110 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई। दूसरी लहर का आगाज कहे तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी क्योंकि लोग है कि मानते ही नहीं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले पर गंभीरता जताते हुए सावचेती के लिए गाइलाइन तक जारी की हुई है। लेकनि लोग इतने बेपरवाह नजर आते है कि सबसे पहले तो मास्क पहनने में किसी ना किसी बहाने से कोरोना गाईडलाईन को ठेंगा दिखाकर फाइन से बच कर निकल तो जाते हैं, इससे कार्यवाही नाममात्र ही नजर आती है। वहीं दूसरी गलती सोशल डिस्टेंसिंग को दरकिनार करने में कोई भी किसी से कम नजर नहीं आता। आम आदमी तो जिन्दगी की आपाधापी में आदतन अपराधी सा ही होता है। नियमों को दरकिनार करने में लेकिन राजनेता भी किसी से कम नहीं है, वह चाहे सत्ता के हो या विपक्षी हो, उनका बिना भीड़ जमाये काम ही नहीं चलता है। ऐसे में किससे क्या कहे। लेकिन अन्तत: आदमी को खुद ही समझने की जरूरत है। क्योंकि सभी जिम्मेदार सक्षम, सरकार, विभाग और संस्थान सी इस विश्वव्यापी महामारी से खुद बचने और लोगों को सुरक्षित रखने का भरपूर जतन करने का प्रयास भी करती है। फिर आदमी है, गधे जैसी रगड़ कर चलने की प्रवृति। आदमी भी अंकुश के बिना संयमित रहकर सर्वे भवन्तु सुखिन:, के मंत्र को बिखरा कर आगे की होड़ में आगे ही रहना चाहता है। नतीजन प्रदेश के 21 जिलों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन सख्ती की कोई सूरत ही नहीं बनती नजर आ रही है। तमाम विभागों के सक्षम और जिम्मेदार इससे पल्ला झाडक़र संयमित बयान भर ही दे रहे हैं। जबकि खबर नवीस हर सुबह आगाह करने के लिए आपात मौत की नजदीकियों से आग्रह करने के लिए आंकड़ों सहित स्थिति बताते है। फिर भी हम है कि मानते ही नहीं।

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वाई.के. शर्मा
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