सीडीएस की नियुक्ति और सेना में वरिष्ठता की परंपरा

सीडीएस की नियुक्ति और सेना में वरिष्ठता की परंपरा

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, सीडीएस का पद सभी सेनाध्यक्षों के ऊपर एक केंद्रीय कमांडर की तरह होता है। तीनों सेनाओं के, सेनाध्यक्ष, जिसमे,जनरल, एयर चीफ मार्शल, एडमिरल भी शामिल हैं, फोर स्टार जनरल के होते हैं। प्रथम, सीडीएस के रूप में बनाए गए जनरल विपिन रावत, भी सीडीएस बनने के पहले तक, जनरल/थल सेनाध्यक्ष थे तो, इस प्रकार वे स्वाभाविक रूप से, चार स्टार जनरल पहले से ही थे। और चूंकि वे रिटायर्ड होने के बाद सीडीएस बने थे तो, वे स्वाभाविक रूप से, सभी चार स्टार जनरलों/सेनाध्यक्षों से भी वरिष्ठ थे। उस समय सीडीएस के लिए चार स्टार जनरल होना अनिवार्य अर्हता थी। तब यही सोचा गया होगा कि सीडीएस के पद पर, कोई न कोई रिटायर्ड चार स्टार जनरल/सेनाध्यक्ष ही नियुक्त होगा। इसे एकीकृत कमांड प्रमुख के रूप में वह सेना की संयुक्त कमान संभालेंगे।

लेकिन, बाद में, जब अचानक जनरल विपिन रावत की एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में, दुखद मृत्यु हो गई, तब फिर नए सीडीएस की तलाश शुरू हुई। इसी के बाद सरकार ने सीडीएस नियुक्ति के मानक भी बदल दिए। नए मानक के अनुसार,

  • कोई भी अधिकारी चाहे वह सेवारत हो या अवकाशप्राप्त, उसे जनरल या कम से कम लेफ्टिनेंट जनरल रैंक का होना चाहिए.
  • नियुक्ति के समय अधिकारी की आयु 62 साल से कम होनी चाहिए. केंद्र सरकार चाहे तो उसका कार्यकाल 65 साल की उम्र तक बढ़ा सकती है।

यह नियम तय किया गया।

पुराने और नए मानक में यह अंतर है कि, पहले केवल जनरल के ही पद पर विचार किया जा सकता था अब सीडीएस के पद के लिए लेफ्टिनेंट जनरल के पद से रिटायर्ड अधिकारी की नियुक्ति पर भी विचार किया जा सकता है। इसी नए मानक के अनुसार लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान, नए सीडीएस नियुक किए गए हैं।

  • सीडीएस के दायित्व और कर्तव्य को सरकार ने इस प्रकार से तय किया है।
  • यह भारतीय सेना, नौसेना व वायुसेना में किसी ऑफिसर की सर्वोच्च रैंक है।
  • चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ को तीनों सेनाओं के सेनाध्यक्ष, रिपोर्ट करते हैं।
  • सीडीएस की भूमिका, रक्षा मंत्रालय के मुख्य रक्षा सलाहकार की भी होती है।
  • CDS रक्षा मंत्रालय के सैन्य मामले विभाग में सचिव की भूमिका भी निभाता है।

देश में पहली बार 1 जनवरी, 2020 को CDS का पद सृजित किया गया था और, तत्कालीन चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ, जनरल बिपिन रावत पहले सीडीएस बनाए गए थे।

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सीडीएस एक यूनिफॉर्म सैन्य अधिकारी होता है, तो उसके कंधे पर लगने वाले बैज का भी निर्धारण किया गया। सीडीएस के कंधे पर लगने वाले बैज में, जनरल के रैंक से थोड़ा अलग दिखने के लिए, आंशिक रूप से बदलाव किया गया। उन्हे एक सितारा, अशोक और क्रॉस ऑफ बैटन तथा सोर्ड का निशान के साथ एक फ्लोरल घेरा भी लगाने की अनुमति दी गई और जनरल को पहले की ही तरह, एक स्टार, अशोक चिह्न और क्रॉस ऑफ बैटन तथा सोर्ड का बैज बना रहा। जनरल के समकक्ष, वायु सेना और नौ सेना के अध्यक्षों जिनका पदनाम एयर चीफ मार्शल और एडमिरल होता है के कंधो पर उनके निशान अलग तरह के होते हैं। अब यह तय नहीं हुआ है कि, जब कोई सीडीएस, नौसेना या वायुसेना से बनेगा तो वह कंधे पर क्या बैज धारण करेगा। हो सकता है जब ऐसी स्थिति सामने आए, तो इसका समाधान भी तभी निकाला जाय। लेकिन यह तो तय है कि वायुसेना और नौसेना से नियुक्त हुआ सीडीएस, अपनी सेना की ही वर्दी धारण करेगा न कि आर्मी की वर्दी और रैंक तथा बैजेस।

स्टार जनरल की अवधारणा, उनके वाहनों पर लगे स्टार से तय किए जाने की परंपरा है। जिस गाड़ी पर एक स्टार होगा, वह, ब्रिगेडियर, दो स्टार वाली गाड़ी मेजर जनरल, तीन स्टार जिसके वाहन पर होगा, वह लेफ्टिनेंट जनरल और जनरल/सेनाध्यक्षों की गाड़ी पर चार स्टार लगते हैं। अब तक देश में चार स्टार की फौजी गाड़ियां केवल तीन ही होती थी पर सीडीएस पद के बाद अब चार हो गई है। पुलिस सेवा का एक पद, निदेशक, आईबी यानी इंटेलिजेंस ब्यूरो प्रमुख का होता है, उसकी गाड़ी पर भी चार स्टार लगते हैं और यह पुलिस का वरिष्ठम पद होता है।

सेनाध्यक्षों के पद, ऑर्डर ऑफ प्रेसीडेंस, या वरिष्ठता क्रम कह लीजिए के अनुसार, 12वें नंबर पर आता है। इस श्रेणी में तीनों सेनाध्यक्ष और सीडीएस के पद आते हैं। सरकार द्वारा घोषित ऑर्डर ऑफ प्रेसीडेंस में, इस श्रेणी में चार स्टार जनरल का स्पष्ट उल्लेख है।

सेना में लेफ्टिनेंट जनरल, एक रैंक है पर उनके पद भी अलग अलग है। वाइस चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ, कमांडर इन चीफ, यानी कमांड प्रमुख, कोर कमांडर और सेना मुख्यालय में अन्य वरिष्ठ पदों पर भी लेफ्टिनेंट जनरल रहते हैं। इन सबकी गाड़ियों पर तीन स्टार लगता है और इन्हें थ्री स्टार जनरल कहा जाता है। पर अधिकार और पद के रूप में उप सेनाध्यक्ष, कमांडर इन चीफ CIC और कोर कमांडर अलग अलग होते है।

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अब अगर ऑर्डर ऑफ प्रेसीडेंस की बात करें तो, वाइस चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ, और आर्मी कमांडर, यानी कमांड प्रमुख, लेफ्टिनेंट जनरल और थ्री स्टार जनरल ही होते हैं, लेकिन वे इस ऑर्डर में, 23वें नंबर पर आते हैं और सभी लेफ्टिनेंट जनरल/थ्री स्टार जनरल इस ऑर्डर में एक श्रेणी नीचे यानी 24वें नंबर पर रखे गए हैं।

सेना में या यूं कहें कि सभी यूनिफॉर्म सशस्त्र बलों में, रैंक, बैज, वरिष्ठता का बहुत महत्व होता है और सेना के अफसर इस वरिष्ठता और प्रोटोकॉल को लेकर बहुत सजग और संवेदनशील रहते हैं। मैं एक संस्मरण आप को बताता हूं। साल 2009 में लखनऊ में तत्कालीन राष्ट्रपति का आगमन था और मेरी ड्यूटी, अमौसी एयरपोर्ट पर लगी थी। राष्ट्रपति चूंकि, सभी सशस्त्र सेनाओं के सुप्रीम कमांडर भी होते है तो उनके स्वागत में, लखनऊ सेंट्रल कमांड के कमांडर इन चीफ भी आए थे। मेरे पास उन महानुभावों की सूची भी थी जो, राष्ट्रपति की अगवानी एयरपोर्ट पर करने वाले थे। राज्यपाल और मुख्यमंत्री तो नंबर एक और दो पर थे ही, फिर मेयर जो उस समय दिनेश शर्मा थे को खड़ा होना था। फिर जब अफसरों की बारी आई तो, चीफ सेक्रेटरी का स्थान था, और चीफ सेक्रेटरी के साथ डीजीपी भी थे दोनो साथ खड़े हो सकते थे।

लेकिन राष्ट्रपति का जहाज अभी उतरा नहीं था, सभी अधिकारीगण आपस में बातचीत कर रहे थे, तभी मध्य कमान के कमांडर इन चीफ के एडीसी आए और उन्होंने स्वागत करने वाले महानुभावों की सूची और उनका स्टैंडिंग अरेंजमेंट देखना चाहा। मैने फाइल से वह कागज दिखाते हुए उन्हें कहा कि, जनरल साहब, चीफ सेक्रेटरी के बाद खड़े रहेंगे और जनरल साहब के बाद, तब डीजीपी खड़े रहेंगे। उन्हे यह आशंका थी कि, कहीं मैं कमांडर इन चीफ को, चीफ सेक्रेटरी, फिर डीजीपी और तब न खड़ा कर दूं। पर मैंने उन्हें आश्वस्त किया कि यह सूची ऑर्डर ऑफ प्रेसीडेंस के ही अनुसार बनी है। तब वे हल्के से मुस्कुराए और थैंक यू सर कह कर के, यही बात जनरल साहब जो बताने के लिए चले गए। उस समय डीजीपी साहब यह सब देख रहे थे, और उन्होंने मुझे इशारे से बुलाया कि, क्या बात हो गई। उन्हे मैने बता दिया कि सर आप को चीफ सेक्रेटरी, फिर लेफ्टिनेंट जनरल और तब खड़े होना है। वे हंसे और कहे कि कोई बात नहीं।

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लेफ्टिनेंट जनरल भी थ्री स्टार जनरल है और डीजीपी की भी गाड़ी में तीन स्टार लगता है लेकिन लेफ्टिनेंट जनरल जो कमांडर इन चीफ होता है, वह 23वें पायदान पर आता है डीजीपी अन्य लेफ्टिनेंट जनरल के समान 24वें पायदान पर आते हैं। इतना सब स्पष्ट कर दिए जाने पर भी, जब जहाज़, जमीन पर उतर गया, और राज्यपाल, मुख्यमंत्री उनकी अगवानी के लिए आने लगे तो जनरल साहब ने, मुझसे फुसफुसाकर पूछा, मुझे कहां खड़ा होना है चीफ सेक्रेटरी के ठीक बाद? मैने कहा जी सर। वे फिर अपनी निर्धारित जगह पर खड़े हो गए।

यह संस्मरण मैने इस लिए बताया है कि, रैंक, पद, ऑर्डर ऑफ प्रेसीडेंस आदि का बहुत अधिक महत्व सेना में होता है और यह बहुत ही अनुशासित ढंग से होता है। सेना में एक अलग तरह की संस्कृति ही विकसित हो जाती है और ऐसा इसलिए है कि सैन्य परंपराएं इसी रेजीमेंटेशन के आधार पर विकसित हुई है।

सीडीएस की नियुक्ति और सेना में वरिष्ठता की परंपरा

सीडीएस, जो अब तक जनरल के ही पद से रिटायर या सेवारत भी होते रहे हैं तो, रैंक और अनुशासन की कोई समस्या सामने नहीं आई, क्योंकि जनरल रावत तो खुद ही चार स्टार जनरल रह चुके थे। लेकिन अब जब थ्री स्टार जनरल को भी सीडीएस के पद पर नियुक्त किया जा सकता है, के प्राविधान के अनुसार, नए सीडीएस लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान को नियुक्त कर दिया गया है, जो निश्चित ही जनरल रैंक से कनिष्ठ हैं, तो इसे लेकर, वरिष्ठता, रैंक, या ऑर्डर ऑफ प्रेसीडेंस की जटिलता और संवेदनशीलता को देखते हुए, सेना के वरिष्ठ अफसरों में क्या प्रतिक्रिया होती है, इस पर भी सरकार को नजर रखनी पड़ेगी।

चीफ ऑफ डिफेंस का पद, एक एकीकृत कमांड के रूप में, तीनो सेनाओं के बीच समन्वय और रणनीतिक जरूरतों के कारण गठित किया गया है, अतः इस पद पर नियुक्त अफसर, तीनों सेनाओं के प्रमुखों, यानी जनरल, एयर चीफ मार्शल और एडमिरल जो फोर स्टार जनरल होते हैं से, कनिष्ठ नहीं होना चाहिए, यह रेजीमेंटेशन, वरिष्ठता और यूनिफॉर्म सुरक्षा बलों की परंपरा के विपरीत है। इसका असर अनुशासन पर भी पड़ सकता है।

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Vijay Shanker Singh X-IPS
लेखक रिटायर्ड आईपीएस अफसर हैं।